Sunday, 21 April 2019

राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्त्व व इतिहास पर लेख। National Youth Day in Hindi

राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्त्व व इतिहास पर लेख। National Youth Day in Hindi

देश के युवाओं को प्रेरित करने के लिए हर साल 12 जनवरी को पूरे उत्साह के साथ भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को क्यों मनाया जाता है, इसका महत्व क्या है, इसे कैसे मनाया जाता है, इसके उत्सव के पीछे का इतिहास क्या है, स्वामी विवेकानंद आदि कौन थे, आइए इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं।

राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को क्यों मनाया जाता है?

राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वह एक समाज सुधारक, दार्शनिक और विचारक थे। उत्सव के पीछे मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के दर्शन और आदर्शों का प्रचार करना है, जिसका उन्होंने आजीवन पालन किया। कोई शक नहीं कि वह भारत के सभी युवाओं के लिए एक महान प्रेरणा थे। इस दिन देश भर में, स्कूल, कॉलेज आदि में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

राष्ट्रीय युवा दिवस: इतिहास

1984 में, भारत सरकार ने पहली बार स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन यानि 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। इस दिन को 1985 से पूरे देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करके देश का बेहतर भविष्य बनाना है। यह युवाओं की अनन्त ऊर्जा को जगाने के साथ-साथ देश को विकसित बनाने का एक शानदार तरीका है।

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार :
"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये। ”- स्वामी विवेकानंद
“जब तक जीना, तब तक सीखना” – अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक हैं।" - स्वामी विवेकानंद
"जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे। खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे।"-स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद का परिचय : आपका जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। आपके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। “स्वामी विवेकानंद” नाम आपको आपके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने दिया था। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। वह अच्छे परिवार से ताल्लुक रखते थे। सन् 1871 में, आठ साल की उम्र में, नरेंद्रनाथ ने ईश्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में दाखिला लिया जहाँ वे स्कूल गए। 1877 में उनका परिवार रायपुर चला गया। 1879 में, कलकत्ता में अपने परिवार की वापसी के बाद, वह एकमात्र छात्र थे जिन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम डिवीजन अंक प्राप्त किये। उनके एक अंग्रेजी प्रोफेसर ने उन्हें 'श्री रामकृष्ण परमहंस' के नाम से परिचित कराया और 1881 में, उन्होंने दक्षिणेश्वर के काली मंदिर में श्री रामकृष्ण परमहंस से मुलाकात की और संत रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बन गए। उन्होंने वेदांत और योग के भारतीय दर्शन से पश्चिमी दुनिया को परिचित कराया। उन्होंने भारत में व्यापक रूप से फैली गरीबी की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और देश के विकास के लिए गरीबी के मुद्दे को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके शिष्यों के अनुसार जीवन के अन्तिम दिन ४ जुलाई १९०२ को उन्होंने ध्यानावस्था में ही महासमाधि ले ली। 

उन्हें 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में अपने भाषण के लिए जाना जाता है जब उन्होंने "अमेरिका की बहनों और भाइयों ....." कहते हुए अपना भाषण शुरू किया और उन्होंने भारत की संस्कृति, इसके महत्व, हिंदू धर्म आदि का परिचय दिया।

इसलिए, स्वामी विवेकानंद ज्ञान, विश्वास, एक सच्चे दार्शनिक हैं, जिनकी शिक्षाओं ने न केवल युवाओं को प्रेरित किया, बल्कि देश के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। इसलिए, इसीलिए भारत में हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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