Friday, 21 December 2018

मनुष्य का चन्द्रमा पर पहला कदम हिंदी निबन्ध

मनुष्य का चन्द्रमा पर पहला कदम हिंदी निबन्ध

परिचय- संसार भौचक्का रह गया जब 4 अक्टूबर, 1957 को रूस ने एक उपग्रह पृथ्वी की सतह से बाहर अंतरिक्ष में भेजा। यह संसार के इतिहास में महान दिन था। यह विज्ञान की महान उपलब्धि थी। यह तीन माह तक पृथ्वी का चक्कर लगाता रहा।

अंतरिक्ष यान और उसका उतरना-16 जून, 1969 को अमेरिका ने अपना अंतरिक्ष यान तैयार किया। यह यान तीन अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों को चन्द्रमा पर ले जाने के लिए तैयार किया गया था। यह चन्द्रमा के लिए मनुष्य की प्रथम यात्रा थी इसलिए प्रत्येक वस्तु को सावधानीपूर्वक तैयार किया था। संसार ने मनुष्य की चन्द्रमा के लिए प्रथम यात्रा को टेलीविजन पर देखा और बड़ी उत्सुकता से चन्द्रमा पर पहुँच जाने की प्रतीक्षा की। अन्त में, 2 जुलाई 1969 को मनुष्य ने चन्द्रमा पर अपना प्रथम बार कदम रखा। युगों से चला आ रहा स्वप्न सत्य हो गया। नील आर्मस्ट्रांग चन्द्रमा पर कदम रखने वाले प्रथम व्यक्ति बने और द्वितीय कदम बज़ एल्ड्रिन ने रखे। उन्होंने चन्द्रमा पर संयुक्त राज्य अमेरिका का झंडा लगाया और वे लगभग 160 कदम चन्द्रमा पर चले, वे चन्द्रमा से मिट्टी, पत्थर इत्यादि पृथ्वी पर लाये। संसार में सनसनी फैल गयी कि मनुष्य ने चन्द्रमा पर भी विजय प्राप्त कर ली है।

सब कुछ एक योजना के अनुसार हुआ। यह यात्रा सफल रही। वैज्ञानिक बहुत खुश थे। इतिहास बन चुका था और संयुक्त राज्य अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता संसार में झण्डे गाड़ चुकी थी।

चन्द्रमा पर विजय- हमारी उड़ान ने अनुसरण किया और अमेरिका एक बार फिर चांद पर कदम रखने में सफल रहा और इस बार वे लम्बे समय तक वहाँ रहे और वहाँ से महत्वपूर्ण जानकारियों तथा मूल्यवान वस्तुएँ लाए। चन्द्रमा पर विजय का एक महान महत्व है। चन्द्रमा पर कदम रखना अंतरिक्ष में विजय की शुरूआत ही थी। संयुक्त राज्य अमेरिका पहले ही अपना सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान कोलम्बिया अंतरिक्ष में भेज चुका है। सैकड़ों उपग्रह आज भी अंतरिक्ष की बाहरी सतह पर तैर रहे हैं वे पहले ही दूरसंचार के लिए उपयोग किये जा चुके हैं तथा यह उपग्रह टेलीविजन कार्यक्रम पूर्ण संसार में प्रदर्शित करते हैं। स्टार टी.वी और ग्लोबल टी.वी. इसकी वास्तविकता बन चुके हैं। इन उपग्रह के हमारे व्यावहारिक जीवन में बहुत उपयोग हैं। भाग्यवश 15 अगस्त सन् 2003 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत के 2008 चन्द्रमा मिशन की घोषणा की थी।

उपसंहार- इसमें कोई सन्देह नहीं है कि अंतरिक्ष में विजय प्राप्त करना एक महान उपलब्धि है। हमें इस उपलब्धि का प्रयोग मानव सेवा के लिए करना चाहिए न कि मानव को खत्म करने के लिए। संयुक्त राज्य अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति रीजन इस उपलब्धि का उपयोग युद्ध के लिए करना चाहते थे। वे अंतरिक्ष यान जो अंतरिक्ष की बाहरी सतह पर तैर रहे हैं उनका उपयोग शत्रु पर आक्रमण करने के लिए किया जा सके। लेकिन सोवियत संघ से तोड़ के बाद अंतरिक्ष युद्ध के पूर्व विषय बन गया।

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