Sunday, 26 August 2018

अपना हाथ जगन्नाथ पर अनुच्छेद लेखन

अपना हाथ जगन्नाथ पर अनुच्छेद लेखन। Apna Haath Jagannath par Anuched
Apna Haath Jagannath par Anuched

अपना हाथ जगन्नाथ अर्थात स्वावलंबन या आत्मनिर्भरता। जीवन में सुख दुख, आशा निराशा, स्वाधीनता पराधीनता आदि अपने वास्तविक स्वरुप में क्या हुआ करते हैं ? केवल स्वावलंबी व्यक्ति या आत्मनिर्भर व्यक्ति ही इन सब का अनुभव एवं साक्षात्कार कर सकता है अन्य कोई नहीं। इसी दृष्टि से स्वाधीनता और स्वतंत्रता को आवश्यक तो बताया ही गया है, मानव का जन्म सिद्ध अधिकार भी माना गया है। जिस व्यक्ति का अपना हाथ की जगन्नाथ अर्थात स्वाधीन नहीं, उसे हमेशा दूसरों का मुंह देखते रहना पड़ता है। ऐसा परावलंबी मनुष्य अपनी कोई स्वतंत्र इच्छा आकांक्षा कर ही नहीं सकता। कर लेने पर उसके लिए पूर्ण कर पाना संभव नहीं हुआ करता। वह नहीं जान पाता कि स्वर्ग-नर्क अर्थात वास्तविक सुख-दुख क्या होते हैं। उसे अधीन बनाकर रखने वाला जिस हाल में रखे, विवश होकर रहना पड़ता है। इस कारण उसके उचित-अनुचित का निर्णय कर पाने की शक्ति का धीरे-धीरे नाश होकर रह जाता है। उसका जीवन पशुओं से भी गया गुजरा बनकर उसके अस्तित्व के सामने भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया करता है। इसके विपरीत जो व्यक्ति आत्मनिर्भर या स्वावलंबी होता है, केवल वही जान पाता है कि वास्तविक सुख-दुख क्या हुआ करते हैं। घने वृक्षों की छाया में बैठकर कलरव करने या स्वच्छ आकाश में उड़ने का क्या आनंद, क्या अनुभव होता है, पिंजरे में बंद रहने वाला पंछी भला कहां जान पाता है यह सब ? इसका अनुभव तो केवल पिंजरे से बाहर रहकर अपने पंखों की शक्ति पर विश्वास करने वाला पंछी ही जान सकता है। इसलिए हर बुद्धिमान व्यक्ति को प्रयत्न करके अपने हाथों की शक्तियों को उजागर करना चाहिए। केवल उन्हीं पर विश्वास करके अपने जीवन को उन्नत तथा संतुलित बनाने का प्रयास करना चाहिए। यही उनकी सफलता, हर प्रकार की सुख समृद्धि का रहस्य बन सकता है।

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