Tuesday, 24 July 2018

ध्रुवयात्रा कहानी का उद्देश्य

ध्रुवयात्रा कहानी का उद्देश्य

dhruva yatra kahani ka uddeshya

ध्रुवयात्रा हिंदी के सुप्रसिद्ध कहानीकार जैनेंद्र कुमार द्वारा लिखित एक मनोवैज्ञानिक और मार्मिक कहानी है। कहानीकार ने इसमें मानवीय संवेदना को मनोवैज्ञानिक तथा दार्शनिक दृष्टिकोण में समन्वित करके एक नवीन विचारधारा को जन्म दिया है। प्रस्तुत कहानी में जैनेंद्र जी ने बताया है कि प्रेम एक पवित्र बंधन है और विवाह एक सामाजिक बंधन है। प्रेम की भावना व्यक्ति को लक्ष्य तक पहुंचने में सहायता करती है। प्रेम में पवित्रता होती है और विवाह में स्वार्थता। प्रेम की पवित्रता को आदर्शवाद की कसौटी पर कसना ही कहानी का प्रतिपाद्य रहा है। अपने प्रतिपाद्य को प्रकट करने में कहानीकार को पूर्ण सफलता मिली है। कहानीकार के अनुसार व्यक्तित्व की की अपेक्षा सार्वभौमिक और अलौकिक उपलब्धि अधिक श्रेष्ठ हैं। अतः प्रेम को ही सर्वोच्च दर्शाना इस कहानी का मुख्य उद्देश्य है, जिसमें कहानी कार्य को पूर्ण सफलता मिली है।

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