Friday, 29 June 2018

मछलियों की मूर्खता - पंचतंत्र की कहानियाँ

मछलियों की मूर्खता - पंचतंत्र की कहानियाँ

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एक सरोवर में बहुत सी छोटी-छोटी मछलियां रहती थी। उन मछलियों में से दो मछलियां ऐसी थीं, जिनमे एक का नाम सौबुद्धि और दूसरी का नाम सहस्त्रबुद्धि था। सौबुद्धि अपने नाम के अनुसार ही समझती थी कि उसमें सौ बुद्धि है। इसी प्रकार सहस्त्र बुद्धि भी समझती थी कि उसमें सहस्त्र बुद्धि है।
सौबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि दोनों अपने को सभी मछलियों से श्रेष्ठ समझती थी। दोनों के मन में अपनी-अपनी बुद्धि का बड़ा घमंड था। दोनों जब भी बोलती थी ऐंठकर बोलती थी, गर्व के साथ बोलती थी। गर्मी के दिन थे। तालाब में पानी कम हो गया था। पानी के नीचे तैरती हुई मछलियां दिखाई पड़ जाती थी।

एक दिन एक मछुआरा जाल लेकर तालाब के किनारे पहुंचा। वह किनारे पर खड़ा होकर तालाब की ओर देखने लगा। तालाब के पानी में हजारों मछलियां तैर रही थी। मछलियों को देखकर मछुआरे के मुंह में पानी आ गया। वह अपने आप ही बोल उठा, “इस तालाब में बहुत सी मछलियां हैं, पानी भी कम हो गया है। कल सवेरे जाल डालकर इन्हें फंसा लेना चाहिए।”

मछुआरे की बात सुनकर मछलियों के कानों में डर बैठ गया। मछलियां व्याकुल हो उठीं – हाय-हाय, अब क्या किया जाए? कल सवेरे मछुआरा जाल डालकर हम सब को पकड़ लेगा। व्याकुल मछलियां सौबुद्धि के पास गई। वह सबको मछुआरे की बात सुनाकर बोली, “तुम्हारे पास सौ बुद्धि है। तुम सबसे श्रेष्ठ हो। दया करके कोई ऐसा उपाय बताओ, जिससे हम सब उसके जाल में ना फंसे।”

सौबुद्धि इतराकर बोली, “तुम सब व्यर्थ ही डर रही हो। मछुआरा कल यहां नहीं आएगा। उसे पता है कि तालाब में मेरी जैसी श्रेष्ठ मछलियां रहती हैं। तुम सब डरो नहीं। जाओ, सुख से रहो। यदि मछुआरा आएगा तो मैं देख लूंगी।

व्याकुल मछलियां सहस्त्र बुद्धि के पास गई। उसे भी मछुआरे की बात सुनाकर मछलियां ने कहा, “तुम्हारे पास सहस्त्र बुद्धि है। तुम सबसे श्रेष्ठ हो। कृपया कोई ऐसा उपाय बताओ, जिससे हम सब मछुआरों के जाल में ना फंसे।” पर सहस्त्र बुद्धि ने घमंड के साथ उसी तरह की बातें कहीं, जिस तरह सौबुद्धि ने की थी।

तालाब में एक मेंढक भी रहता था। मेंढक का नाम एकबुद्धि था। वह सबसे प्रेम से बोलता, सबके साथ मिल जुलकर रहता था। वह बड़ा अनुभवी और व्यावहारिक था। व्याकुल मछलियां एकबुद्धि के पास भी गई। उसे भी मछुआरे की बात सुनाकर मछलिया बोली, “दया करके कोई ऐसा उपाय बताओ, जिससे हम सब मछुआरे के जाल में ना फंसे।” एक बुद्धि सोचता हुआ बोला, “मेरे पास तो एक ही बुद्धि है। मेरी समझ में तो यही आ रहा है कि तुम लोगों को इस तालाब को छोड़ देना चाहिए। तालाब में पानी कम हो गया है। कल मछुआरा जरूर आएगा और वह तुम सब को फसाने के लिए जाल अवश्य डालेगा।”

एक बुद्धि की बात सौबुद्धि और सहस्त्र बुद्धि ने उसकी बड़ी हंसी उड़ाई, दोनों ने बड़े गर्व के साथ मछलियों से कहा, “यह तो मूर्ख है। इसकी बातों पर विश्वास मत करना। चुपचाप इसी तालाब में रहो, कुछ नहीं होगा।

मछलियां बुद्धि सौबुद्धि और सहस्त्र बुद्धि की बात मानकर उसी तालाब में रह गई, पर मेंढक अपने बाल-बच्चों को लेकर उसी दिन दूसरे तालाब में चला गया। दूसरे दिन सवेरा होते ही मछुआरा जाल लेकर तालाब के किनारे पहुंचा। उसने मछलियों को फसाने के लिए जाल तालाब में फैला दिया। मछलियां व्याकुल होकर इधर से उधर भागने लगी, पर भाग कर कहां जा सकती थी। सारी मछलियां जाल में फंस गई।

सौबुद्धि और सहस्त्र बुद्धि ने भी बचने का प्रयत्न किया, पर वह दोनों भी जाल में फंस गई। मछुआरा फंसी हुई मछलियों को जाल में लेकर चल पड़ा। वह जाल कंधे पर रखे हुए था। उसका रास्ता उसी तालाब की ओर से होकर जाता था, जिसमें एकबुद्धि अपने बाल-बच्चों के साथ जाकर बस गया था।
एक बुद्धि किनारे पर बैठा हुआ था। उसने जब जाल में फंसी हुई मछलियों को देखा तो उसे बड़ा दुख हुआ। उसने अपने बाल-बच्चों को बुलाकर कहा, “एकबुद्धि और सहस्त्रबुद्धि की बात मानने के कारण बेचारी सभी मछलियों को जान से हाथ धोना पड़ा। दोनों अनुभवहीन थी, घमंडी थीं। घमंड के कारण दोनों ने यह नहीं समझा कि तालाब में पानी कम है और मछुआरा तालाब में जाल डालने से रुकेगा नहीं। अगर मछलियों ने मेरी बात मान का तालाब को छोड़ दिया होता, तो उन्हें इस तरह अपनी जान गवानी पड़ती।

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