Saturday, 23 June 2018

हाथी और कुत्ता - जातक कहानी

हाथी और कुत्ता - जातक कहानी 

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एक समय की बात है काशी में ब्रम्हदत्त नाम का राजा राज्य करता था। उसके पास एक हाथी था। हाथी का महावत उसका बहुत ध्यान रखता था। महावत रोज सुबह हाथी को नहलाता, फिर उसे खाना खिलाता। महावत का कुत्ता भी वहां आ जाता। हाथी और कुत्ता साथ मिलकर खाते। देखते ही देखते हाथी और कुत्ते में गहरी दोस्ती हो गई। 

हाथी कुत्ते का इंतजार करता। अगर कुत्ता नहीं आता तो हाथी भी खाना नहीं खाता। कुत्ता भी हाथी के साथ खूब खेलता। उसकी सूंढ़ पर चढ़कर झूलता। एक बार महावत को पैसों कि जरूरत पड़ी। उसने अपने कुत्ते को बेच दिया। कुत्ते का दिल टूट गया पर बेचारा क्या करता ? चुपचाप अपने नए घर चला गया।

हाथी को जब अपना मित्र दिखाई नहीं दिया तो वह बहुत उदास हो गया। उसने खाना खाने से मना कर दिया, नहाने भी नहीं गया। वह दिनभर गुमसुम बैठा रहता। हाथी के खाना ना खाने का समाचार राजा तक जा पहुंचा। उसने अपने मंत्री को हाथी का हाल चाल पूछने भेजा। मंत्री ने वहां पहुंचते ही हाथी की जांच की। हाथी शारीरिक रूप से तो बीमार नहीं था। मंत्री ने सोचा अवश्य ही उसके मन में कोई चिंता होगी।

उसने आस पास के सभी लोगों से बातचीत की। लोगों ने मंत्री को बताया कि कुत्ते से बिछड़ने के दुख में हाथी उदास है। जब से कुत्ता गया है, तभी से उसने खाना पीना छोड़ दिया है। मंत्री ने यह सूचना राजा तक पहुंचाई। राजा ने तुरंत ढोल बजाकर ऐलान करवाया कि जिसके पास भी महावत का कुत्ता हो वह तुरंत उसे छोड़ दे।

जिस आदमी ने कुत्ते को खरीदा था उसने भी यह एलान सुना। बस उसने उसी क्षण कुत्ते की रस्सी काट दी।कुत्ता की छलांग मारता, कूदता-फांदता हाथी के पास जा पहुंचा। दोनों दोस्त एक दूसरे को देख कर बहुत खुश हुए। हाथी ने अपनी सूंढ़ से कुत्ते को उठाया और फिर अपने सिर पर बैठा लिया।

उसकी आंखों से खुशी के आंसू छलकने लगे। महावत भागा-भागा हाथी के लिए खाना लाया। हाथी ने पहले कुत्ते को खिलाया, उसके बाद खुद खाया।

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