अवकाश का सदुपयोग पर निबंध। Essay on avkash ka sadupyog

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अवकाश का सदुपयोग पर निबंध। Essay on avkash ka sadupyog

avkash ka sadupyog

प्रस्तावना : यह कहा जाता है कि “कार्य ही पूजा है।” लेकिन हम सदैव मशीनों की तरह कार्य नहीं कर सकते हैं। मशीनें जब कार्य करना बंद कर देती हैं तो उन्हें तेल और मरम्मत की आवश्यकता होती है। इसलिए मनुष्य को अवकाश चाहिए होता है। अवकाश हमें भौतिक और मानसिक शक्ति प्रदान करता है। यह जीवन की उदासीनता को हटाता है। वास्तव में अवकाश प्रसन्न और स्वस्थ जीवन के लिए अति आवश्यक है। एक समय था जब लोग अवकाश की महत्ता को नहीं जानते थे। अब हमारे समाज ने अवकाश को लोगों के लिए निश्चित कर दिया है।

आलस को त्यागना : हमें अवकाश के समय सुस्त नहीं रहना चाहिए। वास्तव, में बहुत कम लोग ही अवकाश का उचित उपयोग करना जानते हैं। मजदूर अवकाश के समय शराब पीते हैं जबकि शिक्षित लोग अवकाश का समय गपशप में या ताश के पत्ते खेलने में बिताते हैं। जबकि कुछ लोग अपना अवकाश घर पर सोने में बिताते हैं। यह अवकाश का उपयोग नहीं है बल्कि अवकाश को गाली देना है।

अवकाश का उपयोग : हमें अवकाश का उचित ढंग से उपयोग करना चाहिए तथा उचित क्रियाकलापों में समय बिताना चाहिए। हम अपना अवकाश पुस्तकें पढ़ने, यात्रा करने, शिकार करने तथा खेलने में बिता सकते हैं। कुछ लोगों का कला के प्रति लगाव होता है तो वह अपना अवकाश कला में बिताते हैं। कुछ लोग संगीत सुनने और फिल्म देखने के शौकीन होते हैं तो वे लोग अपना अवकाश संगीत सुनने और फिल्म देखने में बिता सकते हैं। मैं अवकाश में लता मंगेशकर और सोनू निगम के गाने सुनता हूं। इस प्रकार हम अवकाश का समय आनंद के लिए उपयोग कर सकते हैं।

कुछ अन्य क्रियाकलाप : कुछ क्रियाकलाप हैं, जिनमें हम अपना अवकाश बिता सकते हैं। बागवानी वह अभिरुचि है जो कुछ लोगों को संतुष्टि और आनंद प्रदान करती है। कुछ लोग अपना अवकाश सब्जियां उगाने में बिताते हैं। कुछ लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर और बौद्धिक विवेचन में बिताते हैं।

अवकाश का महत्व : अवकाश हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। अवकाश हमें कठिन परिश्रम के बाद आनंद की अनुभूति कराता है। वास्तव में अवकाश भी उतना ही आवश्यक है जितना कि कार्यशील दिवस । हमें अपने अवकाश का उपयोग आनंद और विश्राम में बिताना चाहिए। एक आधुनिक मनुष्य हमेशा व्यस्त और चिंतित रहता है। उसके पास कोई एक ऐसा समय नहीं होता जिसे वह अपना कह सके।

अवकाश को उचित ढंग से बिताना भी एक कला है। कुछ ही लोग होते हैं जो अवकाश का पूर्ण लाभ उठाते हैं। अवकाश का समय घूमने में बिताना भी एक अच्छा अवकाश का सदुपयोग है। घूमना हमारे स्वास्थ्य को एक नई स्फूर्ति देता है। घूमने से हम थोड़ी देर तक जीवन की सभी चिंताएं भूल जाते हैं और अपने मस्तिष्क को ताजा कर देते हैं। जब मनुष्य घूमने के बाद अपना कार्य करता है तो वह उस कार्य को पूरे उत्साह और शक्ति के साथ करता है।

उपसंहार : एक समय था जब भारतीय कारीगर अपना अवकाश सुंदर टोकरियां व खिलौने आदि बनाने में बिताते थे। लेकिन अब वह कला खो चुकी है। आज भी अनेक किसान और शिल्पकार बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, क्योंकि वह अपना अवकाश उचित कार्यों में बिताने के लिए असमर्थ हैं। उन्हें सलाह दी जाती है कि वह भी अपना अवकाश सुंदर वस्तुओं को बनाने में ही बिताएं, जैसे कि उनके पूर्वज बिताते थे। एक शिक्षित व्यक्ति अपना अवकाश हमेशा उचित कार्यों में ही बिताता है। जैसे कि वह कविताएं छपवाता है या स्वयं छापता है। एक व्यक्ति अपना अवकाश कैसे बिता रहा है यह उसकी शिक्षा की परीक्षा है। लेकिन वास्तव में भारतीय लोग अवकाश का उचित ढंग से उपयोग नहीं कर पाते हैं।

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