Monday, 16 October 2017

दीवाली पर निबंध। Essay on Diwali in Hindi

दीवाली पर निबंध। Essay on Diwali in Hindi

Essay on Diwali in Hindi

हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का महत्व व लोकप्रियता सर्वाधिक है। दीपावली का अर्थ है दीपों की माला। प्रत्येक वर्ष कार्तिक मॉस की अमावस्या वाले दिन देश के सभी भागों में दीपावली को बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस पर्व को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के द्वितीया तक पूरे पांच दिन बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। दीपावली के अवसर पर असंख्य दीपकों, बल्बों, मोमबत्तियों एवं झालरों की रौशनी अमावस्या की गहरी काली रात को प्रकाश से भर देती है। इस प्रकाश के सामने आसमान के तारे भी आभाहीन से दिखाई पड़ते हैं। 

भारत वर्ष का प्रत्येक पर्व किसी न किसी महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा है। हर पर्व की अपनी एक कहानी और मनाने का एक अलग कारण है। इसी दिन भगवान् नरसिंह ने अवतार लेकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। समुद्रमंथन से माता लक्ष्मी भी इसी दिन महालक्ष्मी के रूप में प्रकट हुई थीं। जैन धर्म के अनुसार महावीर जैन का निर्वाण भी इसी दिन हुआ था। आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का निर्वाण भी इसी दिन हुआ था। किन्तु दीपावली की सबसे प्रमुख घटना भगवान् राम से सम्बंधित है। दीपावली की ही दिन भगवान् राम चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात् कर रावण के संहार के पश्चात माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वापस अयोध्या लौटे थे। माना जाता है की भगवान् राम के वापस अयोध्या लौटने की ख़ुशी में सम्पूर्ण अयोध्यावासियों ने सम्पूर्ण नगर को दीपों से सजाया। तभी से इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता रहा है। 

आधुनिक युग में नवीन भावनाओं से परिपूर्ण यह त्यौहार बड़े ही हर्ष-उल्लास से मानाया जाता है। सभी लोग दीपावली के आगमन के काफी समय पहले से ही अपने-अपने घरों, दफ्तरों और कार्यालयों की सफाई करने लगते हैं। ऐसा माना जाता है की दीवाली की रात्रि को लक्ष्मी जी भ्रमण पर निकलती हैं, इसलिए सभी लोग अपने-अपने घरों को साफ़ करके दीपों से सजाते हैं और घर के द्वार भी खुले रखते हैं। दीपावली वाले दिन घरों, दुकानों एवं अन्य प्रतिष्ठानों को खूब सजाते हैं व गणेश-लक्ष्मी का पूजन करते हैं। इस दिन बाजारों में भी खूब चहल-पहल होती है। मिठाईओं की दुकानों के आगे बड़े-बड़े पंडाल लगे होते हैं। पटाखों की दुकानों के आगे बड़े व बच्चों की लम्बी लाइन लगी होती है। सभी अपनी इच्छानुसार पटाखे, फुलझड़ियाँ, अनार एवं रॉकेट आदि खरीदते हैं। 

पारस्परिक मेल-मिलाप और भाईचारे का यह ऐसा अनोखा पर्व है जो सम्पूर्ण देश को एकता के सूत्र में पिरोता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस त्यौहार का महत्व  है क्योंकि यह पर्व स्वच्छता को प्रोत्साहन देता है। दीपावली के दिन कुछ लोग जुआ भी खेलते हैं व शराब जैसे मादक द्रव्यों का सेवन भी करते हैं जो इस पर्व के माहौल को बिगाड़ता हैं। कुछ लोग अनावश्यक रूप से पटाखों को जलाकर धन की बर्बादी तो करते ही हैं साथ ही पर्यावरण को भी प्रदूषित करते हैं। हमें दीपक जलाते समय इस भावना को मन में रखना चाहिए :-
जलाओ दीपक पर ध्यान रहे ;
अँधेरा धरा पर कहीं रह ना जाए। 
दीवाली, दीपावली, प्रकाश का पर्व एवं जश्न ए चिराग आदि अनेक नामों से पुकारा जाने वाला यह त्यौहार प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। यह लगातार पांच दिनों तक मनाया जाता है, धनतेरस से लेकर भैयादूज तक। धनतेरस के दिन कुबेर की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी के दिन श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की खुशियां मनाई जाती हैं। वास्तव में यह त्यौहार हमें अपने मन को प्रकाशित करने का संदेश देता है। 

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