Saturday, 13 May 2017

ममता की मूरत

ममता की मूरत

ममता की मूरत


क्या सीरत क्या सूरत थी

माँ ममता की मूरत थी

पाँव छुए और काम बने

अम्मा एक महूरत थी

बस्ती भर के दुख सुख में

एक अहम ज़रूरत थी

सच कहते हैं माँ हमको

तेरी बहुत ज़रूरत थी


कविता का श्रेय  मंगल नसीम जी को जाता है। 




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1 comment:

  1. ईश्वर की अनमोल कृति ''माँ'' को नमन।

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