Saturday, 6 May 2017

हम जुगनू थे POEM ON MOTHER

हम जुगनू थे
हम जुगनू थे हम तितली थे

हम रंग बिरंगे पंछी थे

कुछ महो-साल की जन्नत में
माँ हम दोनों भी सांझी थे

में छोटा सा इक बच्चा था
तेरी ऊँगली थाम के चलता था

तू दूर नजर से होती थी
में आंसू आंसू रोता था

इक ख्वाबों का रोशन बस्ता
तू रोज मुझे पहनाती थी

जब डरता था में रातों में
तू अपने साथ सुलाती थी

माँ तुने कितने बरसों तक
इस फूल को सींचा हाथों से

जीवन के गहरे भेदों को
में समझा तेरी बातों से

मैं तेरे हाथ के तकिए पर
अब भी रात को सोता हूँ

माँ में छोटा सा इक बच्चा
तेरी याद में अब भी रोता हूँ



कविता का श्रेय लेखक को जाता है। 

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5 comments:

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  2. अब में आपके साथ अपनी पहली माँ पर कविताएं शेयर करने जा रहा हूँ जिसका शीर्षक है मैं माँ को मानता हूँ.मुझे पूरी उम्मीद है की आपको ये hindi kavita पसंद आयेगी. तो चलिए शुरू करते है.बचपन में माँ कहती थीबिल्ली रास्ता काटे,तो बुरा होता हैरुक जाना चाहिए…बचपन में माँ कहती थीबिल्ली रास्ता काटे,तो बुरा होता हैरुक जाना चाहिए…मैं आज भी रुक जाता हूँकोई बात है जो डरादेती है मुझे..यकीन मानो,मैं पुराने ख्याल वाला नहीं हूँ…मैं शगुन-अपशगुन को भी नहीं मानता…मैं माँ को मानता हूँ|मैं माँ को मानता हूँ|दही खाने की आदत मेरीगयी नहीं आज तक..दही खाने की आदत मेरीगयी नहीं आज तक..-विज्ञापन-माँ कहती थीघर से दही खाकर निकलोतो शुभ होता है..मैं आज भी हर सुबह दहीखाकर निकलता हूँ…मैं शगुन-अपशगुन को भी नही मानता….मैं माँ को मानता हूँ|मैं माँ को मानता हूँ|आज भी मैं अँधेरा देखकर डर जाता हूँ,भूत-प्रेत के किस्से खोफा पैदा करते हैं मुझमें,जादू, टोने, टोटके पर मैं यकीन कर लेता हूँ|बचपन में माँ कहती थीकुछ होते हैं बुरी नज़र लगाने वाले,कुछ होते हैं खुशियों में सताने वाले…यकीन मानों, मैं पुराने ख्याल वाला नहीं हूँ…मैं शगुन-अपशगुन को भी नहीं मानता….मैं माँ को मानता हूँ|मैं माँ को मानता हूँ|मैंने भगवान को भी नहीं देखा जमीं परमैंने अल्लाह को भी नहीं देखालोग कहते है,नास्तिक हूँ मैंमैं किसी भगवान को नहीं मानतालेकिन माँ को मानता हूँमें माँ को मानता हूँ||घुटनों से रेंगते-रेंगते,कब पैरों पर खड़ा हुआ,तेरी ममता की छाँव में,जाने कब बड़ा हुआ..काला टीका दूध मलाईआज भी सब कुछ वैसा है,मैं ही मैं हूँ हर जगह,माँ प्यार ये तेरा कैसा है?सीधा-साधा, भोला-भाला,मैं ही सबसे अच्छा हूँ,कितना भी हो जाऊ बड़ा,“माँ!” मैं आज भी तेरा बच्चा हूँ|

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    1. Very well written @Manglesh Doye ji. keep writing like this. We would like to publish your Rhymes on our website with author credit as soon as you permit. Please drop us a comment to let us know. We would also like to wish your mom a very happy mother's day................from team Hindivyakran

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