Tuesday, 7 February 2017

कारक एवं कारक चिन्ह

परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम क वाक्य के अन्य पदों से जो सम्बंध होता है उसे कारक कहते हैं|
 जैसे -राम ने रावण को बाण से मारा|

इस वाक्य मे राम कर्ता है और रावण इसका कर्म है, बाण से यह क्रिया सम्पन्न की गई है, इसलिये बाण क्रिया का साधन होने से करण है

कारक एवं कारक चिन्ह

कारक।                                    कारक चिन्ह

कर्ता                                             ने

कर्म।                                            को

करण।                                            से

सम्प्रदान                                          लिए

अपादान                              अलग होने के अर्थ में।

सम्बन्ध।                      का की के,  रा री रे,  ना नी ने

अधिकरण                                        में, पर 

सम्बोधन                                हे,  ओ, अरे आदि


करण तथा अपादान में अंतर:  करण तथा अपादान दोनो कारक में से कारक चिन्ह का प्रयोग होता है किंतु दोनो में अंतर है
कर्ता कार्य करने के लिये जिस उपकरण या साधन का प्रयोग करता है उसे करण कहते है जैसे-) मै कलम से लिखता हूं!
यहां कलम लिखने का उपकरण है
अपादान में अलगाव का या दूर जाने का भाव निहित होता है!
जैसे-) जेब से सिक्का गिरा
जेब से सिक्का अलग हो रहा है इसलिये यहां अपादान कारक है। इस वाक्य में जेब अपादान कारक है क्योंकि जेब स्थिर है और उससे सिक्का अलग हो रहा है।

कारकों की पहचान

कर्ता----क्रिया को सम्पन्न करने वाला ।

कर्म----क्रिया को प्रभावित करने वाला।

करण----क्रिया का साधन या उपकरण।

सम्प्रदान----जिसके लिये कोई कार्य किया जाये।

अपादान----जहाँ अलगाव हो वहाँ स्थिर वस्तु अपादान होगी।

संबंध----जहाँ दो पदों में पारस्परिक संबंध हो।

अधिकरण----जो क्रिया का आधार जैसे स्थान, समय और अवसर आदि का बोध कराये।

सम्बोधन----किसी को पुकार कर सम्बोधित किया जाये।                  



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