Wednesday, 21 March 2018

मेरे मित्र की सीख अनुच्छेद लेखन

मेरे मित्र की सीख अनुच्छेद लेखन 

mere mitra ki seekh
मेरा प्रिय मित्र अजय बहुत ही सज्जन एवं व्यवहारी सदाचारी है। वह कभी किसी की बुराई नहीं करता और न ही किसी की चुगली करता है। हम स्कूल में  बहुत ही सहमे-सहमे रहते थे। खाना  भी हम अकेले ही खाते थे। लेकिन जब से मुझे अजय मिला है तब से मैं अब अकेला नहीं रहता। हम दोनों मिलकर पढ़ते हैं¸ साथ में ही स्कूल आते-जाते हैं और खाना भी साथ मिलकर ही खाते हैं। अजय का मानना है कि खाना सदैव मिलकर ही खाना चाहिए। इससे हमारे बीच प्यार तो बढ़ता ही है साथ ही हमें कई प्रकार की सब्जी या दाल खाने को मिल जाती है जिससे शरीर की पौष्टिकता और ऊर्जा भी बढ़ती है। उसकी यह सीख मुझे अत्यंत अच्छी लगी। तब से मैं उसके एवं अन्य मित्रों के साथ मिलकर ही खाना खाता हूँ। बड़ा आनंद आता है। प्रतिदिन तरह-तरह की सब्जियाँ खाने को मिलती हैं। कभी कोई लड्डू लेकर आता है तो लड्डू खाने को मिलता है कभी कोई कुछ और अच्छी चीज लाता है  तो वह खाने को मिलती है। इस प्रकार साथ मिलकर काम करने के अनेक लाभ हैं। यह सीख मैं प्रत्येक मनुष्य को देना चाहता हूँ जिससे कभी कोई लड़े-झगड़े नहीं और सभी मनुष्य प्रेम एवं शांति से रहें।

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