Sunday, 17 September 2017

अंधविश्वास पर निबंध। Essay on Andhvishwas in Hindi

अंधविश्वास पर निबंध। Essay on Andhvishwas in Hindi

अंधविश्वास पर निबंध। Essay on Andhvishwas in Hindi

अन्धविश्वास बहुत ही बुरी चीज होती है क्योंकि इसकी जड़ें अज्ञानता में फैली होती हैं। यह हमारे भय, निराशा, असहायता व ज्ञान की कमी को दर्शाता है। यह बहुत ही दुखद है की बहुत से पढ़े-लिखे लोग भी अंधविश्वासों में जकड़े होते हैं। इस ज्ञान और विज्ञान के युग में यह हमारी बौद्धिक निर्धनता को दिखाता है। यह बहुत ही मूर्खतापूर्ण है की जब इंसान किसी बात को समझ नहीं पाता है तो वह उस चीज के लिए अंधविश्वासी हो जाता है। हम इन्हें दैवीय कारण समझकर डरने लगते हैं। 

बहुत से अंधविश्वास बहुत ही हास्यास्पद बन जाते हैं, जैसे कि 13 नंबर को अशुभ माना जाता है या कोई छींक दे तो यात्रा के लिए मत जाओ। इसी प्रकार बिल्ली के रास्ता काटने से माना जाता है की कुछ बुरा होने वाला है। उल्लू की आवाज़ या भेड़िये की आवाज़ सुनकर अनहोनी की आशंका करना, यह सब  अंधविश्वास के कारण हैं। इससे यह पता चलता है की हम मानसिक स्तर पर आज भी आदिम युग में ही जी रहे हैं। कई जगहों पर तो यह भी माना जाता है की अगर घोड़े की नाल को घर के दरवाजों पर लगा दिया जाए तो वह सौभाग्य का प्रतीक होता है। इन सभी अंधविश्वासों को मानना वास्तव में हास्यास्पद है। 

अंधविश्वास किसी विशेष समाज या देश से नहीं जुड़े हैं बल्कि यह हर जगह पाए जाते हैं। अंधविश्वास में आस्था रखने वालों में अधिकतर गरीब, अनपढ़ व निचले तबके के लोग हैं। हम वैज्ञानिक सोच का प्रचार-प्रसार करके अंधविश्वासों में कमी ला सकते हैं। कारण व तथ्यों की मदद से सभी अनसुलझे रहस्यों को सुलझाया जा सकता है और अंधविश्वास की जड़ों पर प्रहार किया जा सकता है। 

आज से कुछ शताब्दी पूर्व चेचक को भगवान् का प्रकोप समझा जाता था। लेकिन मेडिकल विज्ञान की सहायता से इसे जड़ से ख़त्म कर दिया गया। इसके लिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की प्रशंसा करनी चाहिए। कई बार ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि की ख़बरें सुनाई देती हैं। यह कैसी मूर्खता है ? यही अंधविश्वास हमें एक ही समय में हंसाने और रुलाने, दोनों का ही कार्य करता है। इसका सुधार सिर्फ लोगों में शिक्षा और ज्ञान के प्रचार द्वारा किया जा सकता है। 

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