Saturday, 2 September 2017

चरित्र का महत्व पर अनुछेद लेखन

चरित्र का महत्व पर अनुछेद लेखन 

चरित्र का महत्त्व पर अनुछेद लेखन
मानव जीवन में चरित्र का महत्त्व सर्वोपरि है। सच्चरित्र व्यक्ति का उत्थान होता है और दुष्चरित्र व्यक्ति पतन के गर्त में समा जाता है। जीवन में कठिनाइयाँ सबको झेलनी पड़ती हैं और सच्चरित्र व्यक्ति कठिनाइओं से तपकर कुंदन बनकर निखरता है। किन्तु दुष्चरित्र की रक्षा कोई नहीं कर पाता और वह सर्वनाश को प्राप्त होता है। चरित्र व्यक्ति को ऊँचा उठता है। चरित्रवान की रक्षा करता है, उसका बल बढ़ाता है और विजय दिलाता है। रावण शक्तिशाली सम्राट था, किन्तु दुष्चरित्र था और राम वनवासी थे, किन्तु चरित्रवान थे, अतः वे रावण का नाश करने में सफल हुए। चरित्र का ही बल था की आज गौतम बुद्ध, महावीर जैन, सूरदास, तुलसीदास, कबीर और गुरुनानक आदि आज भी पूजनीय हैं। इसी कारण आज भी हम सब उनकी यशोगाथा गाते-गुनगुनाते हैं। जबकि दुर्योधन और कंस का नाम सुनकर ही घृणा से भर उठते हैं। अतः हमें चरित्रवान बनना चाहिए। इसीलिए कहा भी गया है की धन-सम्पदा, वैभव आदि तो आते-जाते रहते है परन्तु चरित्र की हानि एक ऐसी हानि होती है की यदि एक बार ये हुई तो वापस नहीं आती। 


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