Wednesday, 22 March 2017

समाचार पत्र पर निबंध Essay on News paper in hindi

Essay on News paper in hindi

प्रस्तावना : वर्तमान काल में संसार के किसी भी कोने में कोई भी घटना घटित हो जाये, दुसरे दिन उसकी खबर हमारे पास आ जाती है। ऐसा होता है समाचार पत्र के कारण। घटना के दुसरे दिन ही समाचार पत्रों में उसका विस्तृत वर्णन दे दिया जाता है। इस प्रकार समाचार पत्रों का हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्त्व है। भारत में भी कई समाचार राष्ट्रीय व लोकल समाचार पत्र प्रकाशित किये जाते है। दैनिक भास्कर, द हिन्दू, अमर उजाला  कुछ प्रमुख समाचार पत्र हैं। समाचार पत्र भी कई प्रकार  है जैसे दैनिक समाचार पत्र,  समाचार पत्र, गॉसिप समाचार पत्र इत्यादि।

समाचार पत्र का इतिहास : भारत में अंग्रेजों के आने के पहले तक समाचार पत्रों का प्रचलन नहीं था। अंग्रेजों ने ही भारत में समाचार पत्रों का विकास किया। सन 1780 में कलकत्ता से भारत का सबसे पहला समाचार पत्र प्रकाशित किया गया जिसका नाम था "दी बंगाल गैजेट" जिसका सम्पादन जेम्स हिक्की ने किया था। यही वो क्षण था जब से भारत में समाचार पत्रों का विकास हुआ। आज भारत में विभिन्न भाषाओँ में समाचार पत्र प्रकाशित किये जा रहे हैं। 

समाचार पत्र से होने वाले लाभ :समाचार पत्र से हमें अनेक लाभ होते हैं।  समाचार पत्रों से हमें नवीन ज्ञान मिलता है। नए अनुसन्धान, नयी खोजों की जानकारी हमें समाचार पत्रों से ही मिलती है। इसमें प्रकाशित होने वाली सरकारी सूचनाओं, आज्ञाओं और विज्ञापनों से हमें आवश्यक और महत्वपूर्ण जानकारी मिल  जाती है। कहीं कोई दुर्घटना हो जाये, भूकंप या बाढ़ जैसी आपदा आ जाए तो इसकी जानकारी समाचार परतों के माध्यम से तुरंत मिल जाती है। समाचार पत्र एक व्यवसाय बन गया है। जिससे हजारों संपादकों, लेखकों, रिपोर्टरों व अन्य कर्मचारियों को जीविका का साधन भी मिलता है। 

समाचार पत्रों से हानि :  समाचार पत्रों से जहां इतने लाभ हैं, वहां इनसे कुछ हानियां भी हैं। कभी-कभी कुछ समाचार पत्र झूठे समाचार छापकर जनता को भ्रमित करते हैं। कुछ समाचार पत्र साम्प्रदायिक भावनाओं को उभरते रहते हैं। जिसके कारण दंगे जैसी घटनाएं भी हो जाती है तथा अशांति का माहौल व्याप्त हो जाता है। सरकार की सही नीतियों को भी कभी-कभी गलत तरीके से पेश करके जनता को भ्रमित किया जाता है। 

उपसंहार : यह कहना गलत नहीं होगा की आज भी समाचार पत्रों का  जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। समाचार पत्र के लाभ और हानि का सारा भार संपादक के ही ऊपर निर्भर होता है। अतः उसे  महत्त्व को अच्छे से समझना चाहिए। यदि वे धर्म, जाती, निजी लाभ जैसे विषयों को छोड़कर ईमानदारी से अपना काम करे तो वे वास्तव में देश की सच्ची सेवा कर सकते हैं।


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