स्नेह निर्झर बह गया है कविता का भावार्थ और उद्देश्य sneh nirjhar beh gaya kavita ka bhavarth aur udeshya

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स्नेह निर्झर बह गया है कविता का भावार्थ और उद्देश्य

कवि परिचय : सूर्यकांत त्रिपाठी निराला छायावाद के प्रसिद्ध कवि हैं। विद्रोह, क्रांतिकारीता, दार्शनिकता, प्रकृति प्रेम, रहस्यवाद एवं श्रृंगारिकता उनके काव्य की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

स्नेह निर्झर बह गया है कविता का भावार्थ

कविता का भावार्थ: 'स्नेह निर्झर बह गया है' कविता में कवि की आत्मानुभूति व्यक्त हुई है। इसमें कवि का निराशा और असंतोष का भाव व्यक्त हुआ है। जिस प्रकार पानी खत्म हो जाने पर नदी में केवल रेत रह जाती है। उसी प्रकार कवि का जीवन हो गया है। कवि के जीवन में से प्रेम समाप्त हो चुका है। अपनी बातों को स्पष्ट करते हुए कवि ने आम की डाली का उदाहरण दिया हुआ है। आम की डाल सूख जाने पर वहाँ पर मोर या कोयल नहीं आ जाते उसी प्रकार मेरा जीवन हो गया है। आज मैं किसी काम के नहीं आता हूँ। सब कुछ समाप्त हो गया है।

कवि कहता है अपनी प्रतिभा से मैंने संपूर्ण जगत को चकित किया है। मैंने जगत को फूल - फल दिए हैं। अर्थात अभिजात्य साहित्य कवि ने निर्माण किया है। एक प्रकार का मेरे जीवन का रूतबा अब नहीं रहा। अब मेरे साथ पुलिन पर बैठने के लिए या संख्या के समय हरियाली पर बैठने के लिए प्रिय व्यक्ति नहीं आते। अब मेरे हृदय में केवल अंधकार ही बल रहा है। अब मैं दुर्लक्षित हो गया हूँ।

स्नेह निर्झर बह गया है कविता का उद्देश्य

कविता का उद्देश्य : 'स्नेह निर्झर बह गया' कविता में कवि की आत्मानुभूति व्यक्त हुई है। जीवन के हर पड़ाव पर उनको संघर्ष करना पड़ा। कविता में पूरी तरह से निराशा का स्वर दिखाई देता है। यह पीड़ा केवल कवि की नहीं है। बल्कि ऐसे हर व्यक्ति की है जिसने जीवन में बहुत बड़े कार्य किए हैं। परंतु अब जो समाज से उपेक्षित हो गया है।

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