राज्य के मातृसत्तात्मक सिद्धांत को समझाइये।

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राज्य का मातृसत्तात्मक सिद्धांत 

राज्य के मातृसत्तात्मक सिद्धांत के अनुसार, समाज की सबसे प्राचीन इकाई पैतृक परिवार न होकर मातृक परिवार थी। मनुष्य का सबसे पहला संगठन टोली अथवा झुण्ड (Pack) था जो बन्दर, आदि जीवों में आज भी पाया जाता है। स्त्री तथा पुरुष विवाह द्वारा किसी स्थायी बन्धन में नहीं बँधे थे। प्रारम्भिक समाज में एक स्त्री के कई पति होने की रीति प्रचलित थी। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली सन्तान को केवल माता का ही ज्ञान होता था, पिता का नहीं। वास्तव में, इस प्रारम्भिक समाज में 'पिता' शब्द कोई अर्थ ही नहीं रखता था। सन्तान सम्पत्ति और परिवार की शक्ति पर माता का अधिकार होता था और उत्तराधिकार माता से ही जाना जाता था। 

मातृसत्तात्मक सिद्धान्त की विशेषताएं

  1. वैवाहिक सम्बन्ध अस्थायी थे।
  2. रक्त सम्बन्ध माता के माध्यम से माना जाता था।
  3. परिवार की प्रतिनिधि और स्वामी माता ही होती थी।
  4. पारिवारिक सम्पत्ति पर स्त्रियों का ही उत्तराधिकार होता था।

मातृक सिद्धांत के प्रमुख प्रतिपादक मैक्लेनान (McLenan), मॉर्गन (Morgan), वैशोफन तथा जैक्स (Jenks) हैं। जे० जे० वैशोफन का मत है कि "प्रारम्भिक समाज में न केवल वंश-परम्परा माता से होती थी और सम्पत्ति का अधिकार स्त्री को मिलता था, बल्कि समाज में स्त्रियों की स्थिति भी अत्यन्त महत्वपूर्ण थी।" वर्तमान समय में भी भारत के कुछ भागों-विशेषतया उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल जिलों के कांगरा, लाहोल स्फीति, किन्नार और रेनुका क्षेत्रों में बहुपतित्व की प्रथा विद्यमान है। इन लेखकों ने मेन के इस मत का खण्डन किया है परिवारों ने बढ़कर कुलों का और कुलों ने जातियों का रूप धारण किया। मातृक सिद्धांत बड़े समुदाय से छोटों का जन्म मानता है, छोटे समुदायों से बड़ों का नहीं। मातृक सिद्धांत द्वारा वर्णित विकासक्रम के अनुसार समाज का प्राचीन तथा प्रारम्भिक समुदाय कबीला था। समय पाकर एक कबीला कई कुलों (clans) में विभाजित हो गये। कुलों से घरानों (households) का और घरानों से अन्त में परिवारों का जन्म हआ। परिवार का जन्म इतिहासक्रम में उस समय हुआ जब मनुष्य ने कृषि को अपना व्यवसाय बनाया। इसके परिणामस्वरूप स्थायी निवास और स्थायी वैवाहिक सम्बन्ध सामने आये और इस प्रकार परिवार का जन्म हुआ। इन लेखकों ने मातक सिद्धान्त की पुष्टि द्रविड़ जातियों, आस्ट्रेलिया तथा मलाया के मल निवासियों में आज भी पाये जाने वाले मातक परिवार का उदाहरण देकर की है।

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