Sunday, 18 March 2018

प्रदूषण कारण और निवारण निबंध। Pollution Problem And Solution Essay In Hindi

प्रदूषण कारण और निवारण निबंध। Pollution Problem And Solution Essay In Hindi

Pollution Problem And Solution Essay In Hindi
प्रदूषण का खतरा अत्यंत गंभीर समस्याओं में से एक है जिनका की विश्व प्रत्येक गुजरते दिन का आज सामना कर रहा है। प्रत्येक दिन के बीतते हमारा वातावरण बराबर और अधिक प्रदूषित होता जा रहा है। प्रकृति ने हमें ऐसा वातावरण प्रदान किया है जो प्रदूषण कारक तत्वों से मुक्त है किंतु मानव अपने जीवन को चलाने वाले वातावरण को प्रदूषित करके अपने साथ ही निर्दयता कर दी है। सामान्य रूप से वातावरण प्रदूषण तीन प्रकार से होता है : (1) वायु प्रदूषण¸ (2) जल प्रदूषण और (3) ध्वनि प्रदूषण। 

हमारी हवा फैक्ट्रियों की चिमनियों से¸ स्वचालित सवारियों से निकले धुएं एवं महाशक्तियों द्वारा किए गए नाभिकीय विस्फोटों से बराबर दूषित की जा रही है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा हद से ज्यादा बढ़ती जा रही है मेट्रोपोलिटन नगरों में जहां पर यंत्रीकृत परिवहन भयावह चरणों में पहुंच चुका है वहां पर तो प्रदूषण का खतरा बहुत ही बढ़ गया है। इसके अतिरिक्त ज्यों-ज्यों औद्योगिकरण बढ़ता जा रहा है हमारे वातावरण को खतरा भी बढ़ता जा रहा है। औद्योगिक नगरों में तो पूर्व से ही वायुमंडल में कार्बन बहुत पहुँच चुका है और ताजा हवा मिलना दुर्लभ हो गई है। इससे स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरे उत्पन्न हो गए हैं। लोग विभिन्न प्रकार के रोगों के शिकार बन रहे हैं विशेषकर फेफड़ों से सम्बन्धित रोगों में कैंसर का विस्तार बढ़ता ही जा रहा है।

जल प्रदूषण के कारण स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। नदी का पानी तो पीने लायक रह ही न हीं गया है कारण फैक्टरियों से निकले कूड़े करकट को नदी में बहाना है। बहुत-से स्थानों से तो मछलियाँ पूरी तरह से गायब हो गयी हैं जिसका कारण नदी के पानी में जहरीले पदार्थों का मिश्रण हो जाना है। इन खाद्य पदार्थों के अच्छे स्त्रोत का ही खात्मा नहीं हो गया है अपितु इसने पारिस्थिति की संतुलन को भी बिगाड़ दिया है। बड़े औद्योगीकृत नगरों में लोगों को ताजा और शुद्ध जल मुश्किल से ही मिल पाता है। जल को शुद्ध करने की क्रिया से दूषित जल को एक सीमा तक ही शुद्ध किया जा सकता है। उसके परे जल को पीने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है। 

वृहद स्तर पर वनों के काटे जाने से और अधिक गंभीर परिणामों को जन्म मिला है। वनों के कटाव ने प्रकृति के वातावरण को अपने ही उपायों द्वारा शुद्ध करने की क्षमता पर गहरी चोट की है। वनों के कटाव ने जंगली जीव जंतुओं का विनाश किया है। इस प्रकार आधुनिक मनुष्य उन वनस्पति और जीव जंतुओं का कट्टर शत्रु बन कर प्रकट हुआ है जिनकी पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रदूषण का खतरा शोर द्वारा गठित वायुमंडलीय प्रदूषण से और अधिक गंभीर हो चला है। जहां तक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव होने का प्रश्न है शोर को एक बहुत बड़ा प्रदूषण कारक तत्व माना गया है। भागती-दौड़ती मोटर-कारें¸ तेजी से दौड़ती ट्रेन¸ ऊपर उड़ते हुए वायुयान और शोर मचाते लाउडस्पीकरों से जो शोर निकलता है उससे हमारा नाड़ी संस्थान प्रभावित होता है। ईंधन में विद्युत उत्पन्न करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले जनरेटर ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। वे जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड ही नहीं उगलते बल्कि इतना शोर पैदा करते हैं कि एक दूसरे की बात को सुनना दूभर हो जाता है। 

इस प्रकार हम पाते हैं कि आज मानवता के सामने वातावरण प्रदूषण का एक अत्यंत कष्टकारक खतरा मंडरा रहा है। इस खतरे पर काबू पाने के लिए कदम उठाने चाहिए। सर्वप्रथम आवश्यकता इस बात की है कि लोगों में वातावरण प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों के विषय में चैतन्य जागृत किया जाए। सार्वजनिक संचार माध्यमों के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि मानवता के सामने उपस्थित प्रदूषण के खतरों का दिग्दर्शन कराया जाए। द्वितीय¸ प्रदूषण के विरुद्ध आंदोलन प्रारंभ किया जाए। प्रदूषण के विरुद्ध कानून बनाए गए हैं किंतु इनको लागू नहीं किए जाने के कारण वे बेकार पड़े हुए हैं। जो लोग प्रदूषण को समाप्त करने वाले कानूनों का उल्लंघन करें उन्हें दंडित किया जाना चाहिए। समस्त विश्व में नाभिकीय विस्फोटों पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। तृतीय¸ प्रदूषण से लड़ने में वन बहुत प्रभावी होते हैं। पौधे और वृक्ष हवा को शुद्ध करते हैं। वे एक अनुमत स्तर से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को वायुमंडल में एकत्र होने से रोकते हैं। हमें अपने शहरों और गांवों को स्वच्छ और हरे भरे बनाने की आवश्यकता है। प्रत्येक व्यक्ति में अधिक से अधिक वनस्पति लगाने की आवश्यकता का भाव जगाने के लिए निरंतर अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। प्रत्येक घर के सामने वृक्ष होने चाहिए। यदि इस संबंध में लोगों पर समझाने बुझाने का असर ना हो तो कानून भी बनाया जाना चाहिए। बिना वनस्पति के बिल्कुल भी भूमि नहीं छोड़नी चाहिए। हम एकदम सभी कारखानों को बंद नहीं कर सकते और ना ही ऑटोमोबाइल का चलना ही बंद कर सकते हैं। हमारे पास हरियाली लगाने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है क्योंकि इसमें उपर्युक्त वर्णित प्रदूषकों को सोख लेने की क्षमता है। हमारे थल भाग के कम से कम 33% क्षेत्र को वनों से शीघ्र से शीघ्र आच्छादित करने के लिए सभी संभव प्रयास किए जाने चाहिए। वनस्पति के संरक्षण और विस्तार के अतिरिक्त जीव जंतु विशेषकर जंगली जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए भी प्रयासों को गतिशील बनाया जाना चाहिए। चतुर्थ जल प्रदूषण के खतरे से लड़ने के लिए बड़ी नदियों की सफाई की जानी चाहिए। नदियों को गहरा करने के लिए खुदाई की जानी चाहिए ताकि पानी की स्वतः शुद्ध करने की क्षमता प्रतिकूल रूप से प्रभावित ना हो और मछलियों को पैदा होने के लिए उपयुक्त परिस्थितियां मिल सके। फैक्ट्री मालिकों को अपनी फैक्ट्रियों से निकले गंदे पानी और कूड़े करकट को नदियों में बहाने के विरुद्ध सख्त चेतावनी दी जानी चाहिए। इस प्रकार प्रदूषण हरण उपायों का प्रयोग किया जाना चाहिए जिससे ऑटोमोबाइल्स से निकले धुएँ से हुए प्रदूषण से लड़ा जा सके। शोर प्रदूषण को सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर चलाने पर प्रतिबंध लगा कर नियंत्रित किया जा सकता है। जनरेटरों के स्थान पर सौर ऊर्जा और विद्युत इनवर्टरों का उपयोग किया जा सकता है।

 निश्चय ही¸ प्रदूषण की समस्या पर चारों ओर से प्रहार समय की बहुत बड़ी आवश्यकता है यदि मानव जाति को जीवित रहना है। संतोष का विषय है कि पर्यावरणीय प्रदूषण के विषय में जागृति समस्त विश्व में हो रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अब तक तीन शिखर पृथ्वी सम्मेलनों का आयोजन किया है जिससे कि इस समस्या से लड़ने हेतु उपाय खोजे जा सकें। जीव विविधता की सुरक्षा और बहुत सी जंगली प्रजातियों को नष्ट होने से बचाने के लिए अधिक से अधिक बल दिया जा रहा है। भारत की केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों ने एकाग्रता के साथ इस बुराई के विरुद्ध अभियान चलाया है। केंद्र में पृथक से पर्यावरण मंत्रालय की स्थापना की गई है। राज्य सरकारें विस्तृत वनीकरण कार्यक्रम चला रही हैं। उद्योगों के मालिकों को प्रदूषण विरोधी उपाय करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। नई फैक्ट्रियों की स्थापना के लिए लाइसेंस तभी निर्गत किया जाता है जबकि यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि प्रदूषण विरोधी निर्देशों का पालन कर लिया गया है। प्रदूषण विरोधी लड़ाई एक अभियान के रूप में युद्ध स्तर पर लड़ी जानी चाहिए। हम इस कार्य में असफल होना सहन नहीं कर सकते हैं क्योंकि यदि असफल हुए तो आने वाली पीढ़ियों को प्रदूषण विध्वंसात्मक परिणाम भुगतने को बाध्य होना पड़ेगा। क्या हम अपनी संतान को उन कार्यों के लिए प्रदूषण के परिणामों को भुगतने हेतु अनुमति दे सकते हैं जिनके लिए हम स्वयं उत्तरदाई हैं।


SHARE THIS

Author:

Etiam at libero iaculis, mollis justo non, blandit augue. Vestibulum sit amet sodales est, a lacinia ex. Suspendisse vel enim sagittis, volutpat sem eget, condimentum sem.

0 comments: