Sunday, 26 November 2017

समय का महत्व पर निबंध। Samay ka Mahatva par Nibandh

समय का महत्व पर निबंध। Samay ka Mahatva par Nibandh

Samay ka Mahatva par Nibandh

समय समर्थ है समय सर्वशक्तिमान है अतः शायद समय ही ईश्वर है और अगर नहीं है तो फिर ईश्वर से कुछ कम भी नहीं है। समय राजा को रंक और फकीर को सम्राट बना देता है समय गतिशील है और निरंतर बीत रहा है। गुजरा हुआ वक्त यानी समय फिर कभी नहीं लौटता। अतः जो समय की उपेक्षा करते हैं वे कदापि सफल नहीं हो सकते समय उन्हें ठुकराकर आगे बढ़ जाता है। सुख और दुःख भी समय के साथ आते-जाते हैं।

जो समय का मूल्य समझकर उसका सम्मान करते हैं समय उनका मित्र बन जाता है। एक-एक भी क्षण कीमती है और समय नष्ट करना स्वयं की बरबादी को न्योता देने के समान है। उन्नति के इच्छुक कभी अपना समय व्यर्थ नहीं जाने देते अपितु वे एक-एक क्षण का सदुपयोग करते हैं। व्यर्थ के झगड़ो में कीमती वक्त बरबाद करने से बढ़कर मूर्खता कोई और नहीं है सीलिए किसी कवि ने कहा है-
तूने रात गँवाई सोय के दिवस गँवाया खाय के।
हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदला जाय रे।

हमें अपना हर कार्य करने के लिए एक सुनिश्चित कार्यक्रम बना लेना चाहिए और फिर उसी के अनुरूप अपने कार्यों को संपन्न करने की कोशिश करनी चाहिए। कुछ लोग कभी भी अपना काम समय पर पूरा नहीं कर पाते हर वक्त वे समय की कमी का रोना रोते रहते हैं। यदि ऐसे लोगों की दिनचर्या पर ध्यान दिया जाए तो पता चलेगा कि वे अपना अधिकांश समय यूँ ही गप्पें हाँकने में बरबाद कर देते हैं। ऐसे लोग हमेशा लेट-लतीफ होते हैं। ये कभी भी अपने दफ्तर में समय से नहीं पहुँचते और हाँफते-काँपते दौड़ते-भागते इनके सबकाम हुआ करते हैं। इन्हें यात्रा पर जाना हो तो तैयारी में ही इतनी देर हो जाती है कि लगता है कि ट्रेन छूटकर ही रहेगी। कहीं किसी के घर किन्हीं से मिलना होतो ऐसे लोग देर से पहुँचकर दूसरों से नाहक प्रतीक्षा करवाते और उनका भी समय बरबाद करते हैं। ये यदि किसी को अपने यहाँ आमंत्रित करते हैं तो अतिथि के पहुँचने पर स्वयं नदारद होते हैं और बेचारे आगंतुक को मेजबान के आने का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे लोग अपना आदर सम्मान गँवाकर समाज में अभिशप्त जीवन जीने के लिए बाध्य होते हैं। प्रकृति स्वयं समयबद्ध है। सूर्योदय और सूर्यास्त तक का समय निश्चित है। ऋतु-चक्र भी निश्चित है। उपग्रहों और ग्रहों की चाल और सीमाएँ तय हैं। संसार के किसी भी महापुरूष की जीवनी का अध्ययन करें तो हम पाएँगे कि उन्होंने हमेशा समय का सदुपयोग किया। विश्व के महानतम वैज्ञानिकों कलाकारो और साहित्यकारों की सफलता का रहस्य यही था कि समय के हर पल का उन्होंने सदुपयोग किया।
हमें समय का सम्मान करना चाहिए। जो समय पर चुक जाते हैं वह बाद में हाथ मल-मलकर पछताने के सिवा और कुछ नहीं कर पाते। फिर पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत जैसी कहावते तथा गोस्वामी तुलसीदासकी पंक्ति का वर्षा जब कृषि सुखानी समय चूकि पुनि का पछतानी हमें चेतावनी देती-सी लगती है कि समय का सचेष्ट रहकर सदुपयोग करें।

समय पर सोना समय पर जागना समय पर अध्ययन करना और समय पर खेलना यानी नियमत दिचर्या का पालन करना जीवन में सफलता के लिए आवश्यक है। आज का काम कल पर टालने वाले जीवन में असफल हो जाते हैं क्योंकि कल कभी नहीं आता।
काल करै से आज कर आज करै सो अब।
पल में प्रलय होएगी हुरी करैगा कब।।

कुछ छात्र आवारगी और बदमाशियों में वक्त गुजारते एवं अश्लील पुस्तकों में ध्यान लगाते हैं तथा समय बीत जाने पर परीक्षा के भूत से डरे-घबराए फिरते हैं। कुछ तो ऐसे आलसी होते हैं कि उनके लिए नहाना-धोना सोना-जागना या खाना-पीना कुछ भी समय पर करना कठिन होता है। ऐसे लोगों में किस्म-किस्म की बीमारियाँ घर कर लेती हैं और उनका जीवन नर्क बन जाता है।
समय का सदुपयोग पर निबंध भी देखें।
कुछ लोग अति उत्साही होते है और एक ही साथ कई कामों को करने की जिम्मेदारी उठा लेते हैं। नतीजा ये होता है कि उनका कोई काम नहीं सधता और वे अपमानित होते हैं। सफलता के लिए जरूरी है कि आप एक बार में एक ही काम हाथ में लें और उसे पूरे मनोयोग से पूरा करने की कोशिश करें। इस प्रकार एक-एक करके एक ही व्यक्ति कई सारे कामों को करने में सफल हो जाता है और ऐसे व्यक्ति के जीवन में असफलता पास नहीं फटकती।

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कामचोर कहा जा सकता है। ऐसे लोग काम से जी चुराते हैं। और यदि काम सिर पर आ जाए तो उससे कन्नी कटाना चाहते हैं। काम से बचने के लिए वे बहाने ढूँढते रहतेहैं। सरकारी-गैर सरकारी दफ्तरों में भी ऐसे बहुत –से कर्मचारी है। इनके टाल-मटोल के कारण फाईलों का ढेर बढ़ता चला जाता है। फलस्वरूप महत्वपूर्ण निर्णय समय पर नहीं लिए जा पाते हैं। इससे देश का नुकसान होता है सरकार की किरकिरी होती है और आम जनता परेशान होती है।

कार्य में सन्नद्ध होकर हम अपना भी भला कर सकते हैं और देश का भी। देश की युवाशक्ति निरर्थक आंदोलनों के जरिए धरना प्रदर्शन जुलूस और रैलियों का आयोजन करने में अपना समय व्यर्थ करती रहती है। तोड़-पोड़ और आगजनी के द्वारा राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान तो अब आम बात बनकर रह गई है। यदि यही शक्ति रचनात्मक कार्यों में लग जाए तो देशकी काया पलट जाए और हर ओर खुशहाली का साम्राज्य छा-जाएय़ यही प्रगति का मंत्र है। यदि देशका हर नगरिक कर्मठ हो और समय का सदुपयोग करे तो भारत को विकसित होने में अधिक समय नहीं लगेगा।   


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