Saturday, 6 May 2017

हम जुगनू थे POEM ON MOTHER

हम जुगनू थे
हम जुगनू थे हम तितली थे
हम रंग बिरंगे पंछी थे

कुछ महो-साल की जन्नत में
माँ हम दोनों भी सांझी थे

में छोटा सा इक बच्चा था
तेरी ऊँगली थाम के चलता था

तू दूर नजर से होती थी
में आंसू आंसू रोता था

इक ख्वाबों का रोशन बस्ता
तू रोज मुझे पहनाती थी

जब डरता था में रातों में
तू अपने साथ सुलाती थी

माँ तुने कितने बरसों तक
इस फूल को सींचा हाथों से

जीवन के गहरे भेदों को
में समझा तेरी बातों से

मैं तेरे हाथ के तकिए पर
अब भी रात को सोता हूँ

माँ में छोटा सा इक बच्चा
तेरी याद में अब भी रोता हूँ


कविता का श्रेय लेखक को जाता है। 

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