Sunday, 12 February 2017

आ गया बसंत Vasant panchami , spring poem in hindi

Vasant panchami poem in hindi

आ गया बसंत (Hindi poem on vasant)

आ गया बसंत है, छा गया बसंत है
खेल रही गौरैया सरसों की बाल से
मधुमाती गन्ध उठी अमवा की डाल से
अमृतरस घोल रही झुरमुट से बोल रही
बोल रही कोयलिया

आ गया बसंत है, छा गया बसंत है 
नया-नया रंग लिए आ गया मधुमास है
आंखों से दूर है जो वह दिल के पास है 
फिर से जमुना तट पर कुंज में पनघट पर 
खेल रहा छलिया 

आ गया बसंत है छा गया बसंत है
मस्ती का रंग भरा मौज भरा मौसम है
फूलों की दुनिया है गीतों का आलम है
आंखों में प्यार भरे स्नेहिल उदगार लिए
राधा की मचल रही पायलिया 



आ गया बसन्त है छा गया बसंन्त है


– कंचन पाण्डेय ( मिर्जापुर उत्तर प्रदेश )



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