Sunday, 26 November 2017

मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध।

मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध।

meri priya pustak panchatantra

जीवन में पुस्तकों का बहुत महत्व है। पुस्तकें ज्ञान का भण्डार होती हैं। ज्ञानी व्यक्ति के लिए गुणवान, विद्वान, समझदार व् धनवान होना आसान हो जाता है और विनम्र विनयशील उदार कर्मठ तथा दयालु तो वह अक्सर होता ही है। ज्ञान प्राप्ति  के अनेक माध्यम हैं किंतु उनमें से सबसे सुविधाजनक सस्ता और सटीक है पुस्तक।

विश्व में अनेक भाषाओं में असंख्य पुस्तकें लगातार प्रकाशिततथा प्रसारित की जा रही हैं। पुस्तकालयों में पुस्तकों का विशाल संग्रह मौजूद है। किसी बी विषय की जानकारी हेतु पुस्तकों का अभाव नहीं है। समाचार सूचना विज्ञान तकनीक इतिहास समाज दर्शन साहित्य की विविध विधाओं के ग्रंथ आदि सब पुस्तकों के रूप में उपलब्ध हैं। यद्यपि इंटरनेट पर भी विविध विषयों की विस्तृत जानकारी सुलभ है तथापि वह बहुत खर्चीला साधन है।
पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि पाठक हर वक्त उसे अपने पास और अपने साथ रख सकता है और चाहे जब उससे जानकारी उपलब्ध कर सकता है।

कुछ लोगों को पढ़ने-लिखने का चाव होता है और वे अक्सर बाजार से अपनी मनपसंद पुस्तकें खरीदते ही लहतेहैं। अपनी ज्ञान-पिपासा की तृप्ति हेतु ऐसे लो विभिन्न पुसतकालयों की सहायता भी लेते नहीं हिचकते। ऐसे लोगों की पुस्तक-पिपासा का हाल यूँ है कि मानो मानव-शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जिस प्रकार पौष्टिक भोजन की आवश्यकता होती है ठीक उसी प्रकार मन को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी-पुसतकों का पढ़ना तथा उप पर विचार करना बहुत जरूरी है ऐसा ये मानते हैं।

मुझे पुस्तकें पड़ने का बहुत शौक है और अपनी जेब-खर्च का अधिकांश हिस्सा मैं पुस्तके खरीदने में खर्च कर देता हूँ। मेरे पास स्वयं खरीदी हुई तथा पिताजी द्वारा अक्सर मेरे लिए खरीद कर लाई हुई पुस्तकों का एक अच्छा संग्रह है। अपने संग्रह की सब पुस्तकें मैं कई-कई बार पढ़ चुका हूँ तथा उनमें से चुन-चुनकर मैंने उन पंक्तियों को रेखांकित कर लिया है जिन्हें पढ़कर मुझे विशेष सुख और आनंद की प्रप्ति होती है।

पंचतंत्र मेरी प्रिय पुस्तक : मुझे मेरे संग्रह की प्रत्येक पुस्तक प्रिय है तथा जब मुझे पढ़ने के ले कोई नई पुस्तक सुलभ नहीं होती तो मैं उन्ही पुरानी पुस्तकों की रेखांकित पंक्तियाँ पढ़कर मन बहलाया करता हूँ। पर अब तक देखी-पढ़ी सभी पुस्तकों में से मुझे पंचतंत्रत्र सबसे अधिक प्रिय है।

सफल जीवन और संपर्ण व्यक्तित्व के लिए नैतिक तथा व्यावहारिक शिक्षा मह्तवपूर्ण है तथा इस उद्देश्य को पुरा करने के लिए पंचतंत्र एक बहुत उत्तम पुस्तक है। कहते हैं कि एक आप्रतिम पंडित विष्णुदत्त शर्मा ने तत्कालीन राजा के युवराज को – जो पटन-पठन में कम तथा खेल-कूद में अधिक मन लाता था  शिक्षित करने के उद्देश्य से यह पुस्तक रची थी।

इस पुस्तक में लेखक ने छोटी-छोटी मनोरंजक कथाओं के माध्यम से साम-दम-दंड-भेद आदि राजनीति वि,यक ज्ञान नैतिक मानदंडो का ज्ञान कराने का अत्यंत सफल प्रयास किया है। पशु-प7यों को पात्र बनाकर नैतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान अत्यंत रोचक तथा सहज सरल कथाओं के माध्यम से संप्रेषितक कर सकने में सक्षम कहानियों का संग्रह है ये पुस्तक।

प्रगति मैदान में लगे पुस्तक मेले में एक स्टाल पर मुझे ये पुस्तक दिखाई दी और मैंने तत्क्षण इसे खरीद लिया। यह रोतक तो है ही ज्ञानवर्धक भी है। इस पुस्तक की कहानियों को पढ़ने-पढ़ाने और सुनने-सुनाने का कुछअलग ही आनंदहै। इसे पढ़ने-सुनने वाला सहज भाव से कथा के पशु-पक्षी रूपी नायक-नायिकाओं के साथ तादात्म्य स्थापित कर प्रकृति की गोद में पहुँच जाता है र अनजाने ही कथा के आनंद में मग्न रहता हुआ उपयोगी ज्ञान यानी शिक्षा बी प्राप्त कर लेता है।

इसकी निर्विवाद उत्कृष्टता इस बात से असंदिग्ध रूप में प्रमाणित हो जाती है कि इस पुस्तक का अनुवाद संसार की अनेक भाषाओं में हो चुका है। मानव-चरित्र और स्वभाव तथा कर्त्तव्य का चित्रण जंतु पात्रों के माध्यम से सफलता पूर्वक किया जाना स पुस्तक की प्रमुख विशेषता है। विश्व-वाड़्मय में सके जोड़ की अथवा होड़ की कोई अन्य पुस्तक दुर्लभ हैँ।

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