Thursday, 19 October 2017

लाल किले पर निबंध। Essays on Red Fort in Hindi

लाल किले पर निबंध। Essays on Red Fort in Hindi

लाल किले पर निबंध। Essays on Red Fort in Hindi

Essays on Red Fort in Hindi

दिल्ली में कई ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं। लालकिला भी इन्ही ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। इसे वास्तुकला के प्रेमी मुग़ल बादशाह शाहजहां ने सन 1648 में बनवाया था। इस किले का निर्माण लाल पत्थरों से करवाया गया है इसी कारण इसे लालकिला कहते हैं। यह यमुना नदी के दांये किनारे पर स्थित है। साढ़े तीन सौ वर्ष बीत जाने के बाद भी इसका महत्व आज भी पहले जैसा ही है। 

आगरा के लालकिले के भाँती ही दिल्ली का यह लालकिला भी सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्द है। यह किला मुग़ल शासकों के वास्तुकला के प्रेम का बेमिसाल नमूना है। यह कई एकड़ में फैला हुआ है। इसके दो मुख्य द्वार हैं। लाल मंदिर वाले द्वार से प्रविष्ट होने पर इसकी आंतरिक भव्यता और बनावट आकर्षित करती है। इसके दोनों ओर दुकानें हैं। इसमें एक सड़क है जिससे होते हुए ऐसे स्थान पर पहुंचा जाता है जहां पर कभी मुग़ल शासक अपना शाही दरबार लगाया करते थे। वे इस स्थान को दीवान-ए-आम कहते थे। दीवान-ए-आम का मतलब है आम जनता के लिए दरबार। यहां बादशाह आम जनता की शिकायतों और तकलीफों को सुना करते थे और उनका निवारण करते थे। यहीं पर जिस सिंहासन पर मुग़ल बादशाह बैठते थे उसे तख़्त-ए-ताउस या मयूर सिंहासन कहा जाता है। यह सिंहासन तमाम हीरे-जवाहरातों से जड़ा हुआ था। इसके पश्चात् दीवान-ए-ख़ास आता है। यहां बादशाह अपने ख़ास मेहमानों, मंत्रीगणों एवं दरबारियों आदि से मिला करते थे। यह ख़ास लोगों की सभा होती थी अतः इसमें आम लोगों का आना वर्जित था। ऐसे ही बड़े-बड़े कक्षों से होते हुए कई बारह्दरियों से होते हुए हम लालकिये की छत पर पहुँच जाते हैं। 

लालकिले की बारह्दरियों की दीवारें सुन्दर चित्रकारी से सुसज्जित हैं। इसमें कई ऐसे कक्ष हैं, जिनमे कहीं मुग़ल सम्राट के वास का स्थान बना है तो कहीं उनकी बेगमों के लिए हरम बने हुए हैं। और कुछ कक्ष श्रृंगार कक्ष और हमाम कक्ष के रूप में प्रयोग किये जाते थे। अब तो यह केवल स्मृति मात्र ही रह गए हैं। 

वर्तमान में लालकिला भारत सरकार के पुरातत्व विभाग की देख-रेख में है। इसके मुख्य द्वार की प्राचीर पर भारत के प्रधानमन्त्री प्रतिवर्ष 15 अगस्त को तिरंगा झंडा फहराते हैं  के जनता को सम्बोधित करते हैं। कुछ समय पहले तक लालकिले के अंदर भारतीय सेना के कार्यालय बने हुए थे परन्तु अब उन्हें हटा लिया गया है। किले के अंदर एक अजायबघर भी है जिसमें मुग़ल बादशाहों की पोशाकें, शस्त्र एवं अन्य वस्तुएं रखी गयीं हैं। 

लालकिले में प्रकाश और ध्वनि का सुन्दर कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। आजाद हिन्द फ़ौज के अधिकारियों पर मुकदमा भी इसी लालकिले में ही चलाया गया था लालकिला आम लोगों लिए सदैव खुला रहता है। यह स्मारक भारत वर्ष की प्राचीन विकसित स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। स्वतंत्र भारत में लालकिले का गौरव और भी बढ़ गया है। प्रत्येक भारतवासी को लालकिले पर गर्व है। 

Tuesday, 17 October 2017

शीत ऋतु पर निबंध। Essay on Winter Season in Hindi

शीत ऋतु पर निबंध। Essay on Winter Season in Hindi

शीत ऋतु पर निबंध। Essay on Winter Season in Hindi

शीत ऋतु पर निबंध। Essay on Winter Season in Hindi

सर्दी का मौसम भारतवर्ष में नवम्बर के महीने से लेकर जनवरी के अंत तक होता है। शीत ऋतु सभी ऋतुओं में सबसे ठंडी होती है। जनवरी के महीने में तो कभी-कभी तापमान 1 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। इस समय सर्दी अपनी चरम सीमा पर होती है। नवम्बर के महीने से ही ठंडी हवाएं चलनी प्रारम्भ हो जाती हैं। ठंडी से बचने के लिए लोग गर्म और ऊनी वस्त्र पहनते हैं व रात के रजाइयां व कम्बल ओढ़ते हैं। 

शीत ऋतू में मौसम बहुत अच्छा हो जाता है। सूरज की तपती हुई गर्मी से इस मौसम में राहत मिलती है। जब अधिक सर्दी पड़ती है तो स्कूलों में सर्दी की छुट्टियां कर दी जातीं हैं। इस मौसम में लोग अधिक ऊर्जावान और क्रियाशील रहते हैं। यद्यपि दिर छोटे व रात लम्बी होती हैं, फिर भी लोग अधिक घंटे कार्य करते हैं परन्तु थकते नहीं। 

भारत में शीत ऋतू का हिमालय पर्वत से गहरा सम्बन्ध है। जब हिमालय पर्वत  बर्फ़बारी होती है और उत्तर दिशा की ओर से हवाएं चलना प्रारम्भ करती हैं तो भारत में शीत ऋतू का आगमन होता है। सुबह के समय अधिकतर कोहरा व पाला पड़ता है और कुछ भी देखना मुश्किल हो जाता है। कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता, हवाई जहाज़ों की उड़ानें रद्द हो जाती हैं। इसी प्रकार ट्रेनें भी देर से चलने लगती हैं। सड़कों पर यातायात का भी यही हाल होता है। देश के उत्तरी भाग में कड़ाके की ठण्ड पड़ती है। जगह-जगह लोग आग जलाकर उसको चारों ओर से घेरकर बैठे दिखाई पड़ते हैं। गरीब लोग लम्बी और कड़ाके की सर्दी से अधिक प्रभावित होते हैं। सुविधाएं न होने के कारण कई बार तो इनकी ठण्ड से मृत्यु भी हो जाती है। सर्दी व जुकाम जैसी समस्याएँ आम हो जाती हैं। 

यह गर्म भोजन, फल, मिठाई व स्वादिष्ट व्यंजनों का मौसम है। इस मौसम में चाय भी अन्य मौसमों की तुलना में अधिक पी जाती है। इस मौसम में सब्जियां भी अन्य मौसमों से अधिक आती हैं। कई प्रकार की सब्जियां बाजारों में देखी जाती हैं जैसे फूलगोभी, गाजर, सिंघाड़ा, मेथी व मूली आदि। क्रिसमस व नए साल का त्यौहार भी सर्दी के मौसम में ही मनाया जाता है। 

Monday, 16 October 2017

दीवाली पर निबंध। Essay on Diwali in Hindi

दीवाली पर निबंध। Essay on Diwali in Hindi

दीवाली पर निबंध। Essay on Diwali in Hindi

Essay on Diwali in Hindi

हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का महत्व व लोकप्रियता सर्वाधिक है। दीपावली का अर्थ है दीपों की माला। प्रत्येक वर्ष कार्तिक मॉस की अमावस्या वाले दिन देश के सभी भागों में दीपावली को बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस पर्व को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के द्वितीया तक पूरे पांच दिन बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। दीपावली के अवसर पर असंख्य दीपकों, बल्बों, मोमबत्तियों एवं झालरों की रौशनी अमावस्या की गहरी काली रात को प्रकाश से भर देती है। इस प्रकाश के सामने आसमान के तारे भी आभाहीन से दिखाई पड़ते हैं। 

भारत वर्ष का प्रत्येक पर्व किसी न किसी महत्वपूर्ण घटना से जुड़ा है। हर पर्व की अपनी एक कहानी और मनाने का एक अलग कारण है। इसी दिन भगवान् नरसिंह ने अवतार लेकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। समुद्रमंथन से माता लक्ष्मी भी इसी दिन महालक्ष्मी के रूप में प्रकट हुई थीं। जैन धर्म के अनुसार महावीर जैन का निर्वाण भी इसी दिन हुआ था। आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का निर्वाण भी इसी दिन हुआ था। किन्तु दीपावली की सबसे प्रमुख घटना भगवान् राम से सम्बंधित है। दीपावली की ही दिन भगवान् राम चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात् कर रावण के संहार के पश्चात माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वापस अयोध्या लौटे थे। माना जाता है की भगवान् राम के वापस अयोध्या लौटने की ख़ुशी में सम्पूर्ण अयोध्यावासियों ने सम्पूर्ण नगर को दीपों से सजाया। तभी से इस दिन को दीपावली के रूप में मनाया जाता रहा है। 

आधुनिक युग में नवीन भावनाओं से परिपूर्ण यह त्यौहार बड़े ही हर्ष-उल्लास से मानाया जाता है। सभी लोग दीपावली के आगमन के काफी समय पहले से ही अपने-अपने घरों, दफ्तरों और कार्यालयों की सफाई करने लगते हैं। ऐसा माना जाता है की दीवाली की रात्रि को लक्ष्मी जी भ्रमण पर निकलती हैं, इसलिए सभी लोग अपने-अपने घरों को साफ़ करके दीपों से सजाते हैं और घर के द्वार भी खुले रखते हैं। दीपावली वाले दिन घरों, दुकानों एवं अन्य प्रतिष्ठानों को खूब सजाते हैं व गणेश-लक्ष्मी का पूजन करते हैं। इस दिन बाजारों में भी खूब चहल-पहल होती है। मिठाईओं की दुकानों के आगे बड़े-बड़े पंडाल लगे होते हैं। पटाखों की दुकानों के आगे बड़े व बच्चों की लम्बी लाइन लगी होती है। सभी अपनी इच्छानुसार पटाखे, फुलझड़ियाँ, अनार एवं रॉकेट आदि खरीदते हैं। 

पारस्परिक मेल-मिलाप और भाईचारे का यह ऐसा अनोखा पर्व है जो सम्पूर्ण देश को एकता के सूत्र में पिरोता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस त्यौहार का महत्व  है क्योंकि यह पर्व स्वच्छता को प्रोत्साहन देता है। दीपावली के दिन कुछ लोग जुआ भी खेलते हैं व शराब जैसे मादक द्रव्यों का सेवन भी करते हैं जो इस पर्व के माहौल को बिगाड़ता हैं। कुछ लोग अनावश्यक रूप से पटाखों को जलाकर धन की बर्बादी तो करते ही हैं साथ ही पर्यावरण को भी प्रदूषित करते हैं। हमें दीपक जलाते समय इस भावना को मन में रखना चाहिए :-
जलाओ दीपक पर ध्यान रहे ;
अँधेरा धरा पर कहीं रह ना जाए। 
दीवाली, दीपावली, प्रकाश का पर्व एवं जश्न ए चिराग आदि अनेक नामों से पुकारा जाने वाला यह त्यौहार प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। यह लगातार पांच दिनों तक मनाया जाता है, धनतेरस से लेकर भैयादूज तक। धनतेरस के दिन कुबेर की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी के दिन श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की खुशियां मनाई जाती हैं। वास्तव में यह त्यौहार हमें अपने मन को प्रकाशित करने का संदेश देता है। 

Friday, 13 October 2017

टेलीविजन पर निबंध। Essay on Televishin in Hindi

टेलीविजन पर निबंध। Essay on Televishin in Hindi

टेलीविजन पर निबंध। Essay on Televishin in Hindi

टेलीविजन पर निबंध। Essay on Televishin in Hindi

टेलीविजन एक महान आविष्कार है। यह विज्ञान का बहुत ही महत्वपूर्ण उपहार है। इसका आविष्कार सन 1926 में जे. एल. बर्ड द्वारा किया गया। थोड़े ही समय में दूरदर्शन लोगों के बीच बहुत ही लोकप्रय हो गया। इसमें विभिन्न चैनल्स और चौबीसों घंटे कार्यक्रम आते रहते हैं। हम अपनी पसंद के अनुसार कोई भी चैनल चुनकर देख सकते हैं। दूरदर्शन के माध्यम से हम अपने घर में आराम से बैठकर सम्पूर्ण विश्व की जानकारी पलभर में ले सकते हैं। 

यह शिक्षा का एक बहुत ही सस्ता और प्रभावी साधन है, साथ ही इससे सभी का मनोरंजन भी होता है। पहले जब टेलीविजन बना था तब यह ब्लैक एंड व्हाइट हुआ करता था। परन्तु आज रंगीन टी.वी. चलन में हैं। टी.वी. पर ख़बरें, खेलकूद, फ़िल्में, गाने, जादू के कार्यक्रम, धार्मिक कार्यक्रम, व बच्चों के लिए कार्टून चैनल्स प्रसारित किये जाते हैं। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी के लिए टेलीविजन पर कुछ न कुछ जरूर आता है। 

ये सभी चैनल अलग-अलग भाषाओं में भी उपलब्ध होते हैं। टी.वी ने कुछ हद तक भाषायी सीमाओं को ख़त्म कर दिया है। आज हम अंग्रेजी की कार्यक्रमों को भी हिंदी या अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में देख सकते हैं। इसमें विकल्पों की कोई सीमा नहीं है। घरेलु स्त्रियों के लिए भी कुकिंग चैनल्स व कार्यक्रम आते हैं। आजकल सभी लोग अपना ज्यादा से ज्यादा समय टी.वी. देखकर व्यतीत करना पसंद करते हैं। बच्चों के लिए अलग से एजुकेशनल चैनल आते हैं, जिससे बच्चें खेल-खेल में ही बहुत कुछ सीख सकते हैं। 

टीवी पर प्रसारित कोई भी सन्देश व खबर उसी क्षण हजारों-लाखों लोगों तक पहुँच जाती है। दूरदर्शन ने प्रत्येक व्यक्ति तक शिक्षा के महत्व को पहुंचा दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में टीवी का योगदान अतुलनीय है। आज टी.वी. की पहुँच देश के कोने-कोने तक है। यह हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। इसके द्वारा लोगों में जागरूकता आयी है, साथ ही इसने अंधविश्वासों को ख़त्म करने में भी सराहनीय भूमिका निभाई है। 

टेलीविजन का एक दूसरा पक्ष भी है। जहां एक ओर इसने सस्ता मनोरंजन उपलब्ध कराया है तो वहीँ दूसरी ओर इसकी वजह से लोगों की खेल-कूद और अन्य शारीरिक क्रियाओं पर बुरा प्रभाव भी डाला है। घंटों लोग टी.वी. के सामने बैठ कर अपना कीमती समय गंवा देते हैं। टी.वी देखने से हमारा दिमाग भी सुस्त हो जाता है व आँखें कमजोर हो जाती हैं। बच्चे टेलीविजन के कारण पढ़ने से जी चुराते हैं। कुछ कार्यक्रम व फ़िल्में तो ऐसी होती है जिन्हे देखकर हमारी भावी पीढ़ी बिगड़ रही है। 

टेलीविजन देखना चाहिए परन्तु उसका एक निश्चित समय होना चाहिए। टीवी का आदी नहीं बनना चाहिए क्योंकि कहा गया है की टी.वी. एक अच्छा सेवक है, परन्तु बुरा मालिक है। हद से ज्यादा टी.वी देखना हानिकारक हो सकता है। 

Monday, 9 October 2017

इंदिरा गांधी पर निबंध। Essay on Indira Gandhi in Hindi

इंदिरा गांधी पर निबंध। Essay on Indira Gandhi in Hindi

इंदिरा गांधी पर निबंध। Essay on Indira Gandhi in Hindi

इंदिरा गांधी पर निबंध। Essay on Indira Gandhi in Hindi

श्रीमती इंदिरा गांधी स्वतंत्र भारत की पहली महिला प्रधानमन्त्री थीं। इंदिरा जी की बचपन का नाम इंदिरा प्रियदर्शिनी था। उनका जन्म 17 नवम्बर 1917 को इलाहाबाद के पुश्तैनी घर आनंद भवन में हुआ था। इनकी माता जी कमला नेहरू व पिता जी जवाहरलाल नेहरू था। इंदिरा जी का बचपन बड़े ही लाड़-प्यार में बीता। तथापि माता की बीमारी और पिता का कारावास इन दोनों ने बचपन में ही इंदिरा जी को झकझोर के रख दिया।

इंदिरा जी बचपन से ही आनंद भवन में आने-जाने वाले नेताओं तथा बुद्धिजीवियों के संपर्क में आती रहीं थी। इस कारण स्वतंत्रता के संघर्ष से वे स्वाभाविक रूप से परिचित हो गयी थीं। उन्होंने बच्चों का एक संगठन बनाया जिसे वानर सेना कहा जाता था।

नेहरू जी कारावास से इंदिरा जी को पत्र लिखा करते थे जिन्हे इंदिरा जी बड़े ही चाव से पढ़ा करती थीं। उन पत्रों का संग्रह 'पिता के पत्र पुत्री के नाम' शीर्षक से एक पुस्तक से रूप में प्रकाशित हो चुके हैं। इंदिरा जी का विवाह एक सुयोग्य पत्रकार, विद्वान् एवं लेखक गिरोज गांधी से हुआ जो एक पारसी परिवार से थे। इंदिरा जी 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में जेल भी गयीं।

15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ व स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जवाहरलाल नेहरू देश के प्रथम प्रधानमन्त्री बने। इंदिरा जी, जवाहर जी के साथ ही तीन मूर्ती भवन में रहने लगीं। इसी दौरान उनके दो पुत्रों का जन्म हुआ जो थे राजीव गांधी व संजय गांधी। इस समय था इंदिरा जी ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना शुरू कर दिया था। सन 1959 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। इसी बीच सन 1960 को उनके पति फिरोज गांधी जी का निधन हो गया।

सन 1964 में पंडित नेहरू की मृत्यु के बाद श्री लालबहादुर शास्त्री जी प्रधानमन्त्री बने। श्रीमती इंदिरा गांधी शास्त्री जी के कैबिनेट में सूचना व प्रसारण मंत्री बनीं। सन 1966 में दुर्भाग्य से श्री शास्त्री जी की मृत्यु होने के बाद 24 जनवरी 1966 को प्रथम महिला बार प्रधानमन्त्री बनीं। 1967 के लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से दुबारा प्रधानमन्त्री चुनी गयीं। सन 1971 में पाकिस्तान को युद्ध में हराया और बांग्लादेश के निर्माण में सफल भूमिका निभाई। 1977 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा जी को पराजय का सामना करना पड़ा परन्तु उन्होंने हार नहीं मानी और 1979 के मध्यावधि चुनाव में फिर से दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में आयीं। 

इंदिरा जी एक कुशल प्रधानमन्त्री और राजनीतिज्ञ थीं इसमें कोई संदेह नहीं है। इनके काल में कई अभूतपूर्व कार्य हुए जिनमें से विधवा पेंशन, बैंकों का राष्ट्रीयकरण, अंतरिक्ष के क्षेत्र में अनुसंधान, पडोसी मुल्कों से युद्ध में विजय, सोवियत रूस से मित्रतापूर्ण सम्बन्ध एवं गुट निरपेक्षता प्रमुख हैं। बड़े ही दुःख की बात है की 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा जी को उनके ही अंगरक्षक ने गोली मारकर ह्त्या कर दी। इंदिरा जी भारत वर्ष के सफलतम प्रधानमंत्रियों में से एक थीं। उनकी सूझ-बूझ, राजनीतिक समझ आज भी देश के नेताओं के लिए पथ-प्रदर्शक का कार्य करती है। 

Sunday, 8 October 2017

मेरी महत्वाकांक्षा पर निबंध। Essay on My Aim in life in hindi

मेरी महत्वाकांक्षा पर निबंध। Essay on My Aim in life in hindi

मेरी महत्वाकांक्षा पर निबंध। Essay on My Aim in life in hindi

essay on my aim in life in hindi

हर किसी की एक महत्वकांक्षा होती है। जीवन बिना महत्वकांक्षा के अधूरा है। यह जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाती है व जीने की राह दिखाती है। बिना उद्देश्य के जीवन व्यर्थ है। पहले उद्देश्य बनाओ फिर उस पर चलो। बहुत से लोग व्यापारी, बैंकर, कारखानों के मालिक बनना चाहते है। कई लोग डॉक्टर, इंजीनियर, राजनीतिज्ञ, समाज-सुधारक, शिक्षक या सरकारी अफसर बनने की इच्छा रखते हैं तो कई और लोग पुलिस अधिकारी, पॉयलट, वैज्ञानिक या लेखक बनना चाहते हैं। हर व्यक्ति अपने जीवन में कुछ अलग करना चाहता है व बनना चाहता है। 

परन्तु लक्ष्य हमेशा ऐसा होना चाहिए जिसे हासिल भी किया जा सके। क्योंकि जब सपने पूरे नहीं होते तो दुःख, निराशा व असफलता ही मिलती है। हवाई किले बनाने से समय की बर्बादी ही होती है। इसलिए हर व्यक्ति को ईमानदारी से अपनी क्षमताओं का आकलन करना चाहिए। अपनी खूबियों व कमियों को पहचानना चाहिए जिससे लक्ष्य का चयन करने में आसानी हो। 

मैं अपनी खूबियों व कमजोरियों को भली-भाँति पहचानता हूँ। मै एक फिल्म स्टार बनने का सपना नहीं देखता हूँ और न ही मैं फुटबॉलर या क्रिकेटर बनना चाहता हूँ। मैं पढ़ाई में बहुत अच्छा हूँ, गणित विषय में मेरी विशेष रूचि है। मेरे पिताजी भी गणित के अध्यापक है। अतः मैं बड़ा होकर एक विद्यालय खोलना चाहता हूँ। 

अध्यापन का गुण मेरे रक्त में है। मेरे पिता जी से मुझे यह गुण विरासत में मिला है। इसलिए मैं अपने विद्यालय में गणित का अध्यापन स्वयं करना चाहता हूँ। दूसरा प्रमुख कारण यह है की मेरा यह मानना है की शिक्षा सभी को मिलनी चाहिए जिससे सभी एक अच्छे नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में मदद कर सकें। मैं अपने विद्यालय में न्यूनतम शुल्क रखना चाहता हूँ जिससे सभी को अच्छी शिक्षा मिल सके। मेरे पिता जी भी मेरी इस महत्वकांक्षा में मेरा सहयोग देना चाहते हैं। वह अक्सर मुझे बताते है की एक अच्छा विद्यालय कैसा होना चाहिए। यह मेरी एकमात्र इच्छा है की मैं एक विद्यालय खोलूं और मैं अपनी इस आकाँक्षा को पूरा करने के लिए सदैव तत्पर हूँ। 

Monday, 2 October 2017

10 lines on mahatma gandhi in hindi

10 lines on mahatma gandhi in hindi

10 lines on mahatma gandhi in hindi

10 lines on mahatma gandhi in hindi


  1. महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।
  2. महात्मा गांधी के पिता का नाम करमचंद गांधी व माता का नाम पुतली बाई था।
  3. इनका विवाह 15 वर्ष की आयु में हुआ, इनकी पत्नी का नाम पुतलीबाई था।
  4. गांधी जी ने बैरिस्टर बनने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से क़ानून की पढ़ाई की।
  5. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में नागरिक अधिकारों के लिए कठिन संघर्ष किया।
  6. गांधी जी, गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।
  7. गांधी जी लियो टालस्टाय की रचनाओं और गीता से बहुत प्रभावित थे।
  8. उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध असहयोग, सविनय अवज्ञा जैसे आंदोलन किये।
  9. गांधी जी ने करो या मरो व अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसे प्रसिद्ध नारे दिए।
  10. गांधी जी सत्य और अहिंसा के समर्थक थे, वे भारत में रामराज्य की स्थापना चाहते थे।
  11. 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने गांधी जी की गोली मारकर ह्त्या कर दी।
  12. महात्मा गांधी की समाधि आज भी नई दिल्ली के राजघाट में स्थित है। 
  13. वे भारत के सच्चे स्वंतंत्रता सेनानी थे, मुझे गर्व है की मैंने गांधी के देश में जन्म लिया। 

Saturday, 23 September 2017

जुर्माना माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र। Jurmana mafi Application in Hindi

जुर्माना माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र। Jurmana mafi Application in Hindi

Jurmana mafi Application in Hindi

सेवा में ,
प्रधानाचार्य 
जयपुरिया पब्लिक स्कूल 
कानपुर। 

     विषय : जुर्माना माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र। 

महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मेरी कक्षा अध्यापक में मुझे दंड स्वरुप बीस रुपये लाने को कहे हैं। उनके अनुसार  कक्षा में उनकी अनुपस्थिति में शोर मचाया, परन्तु महोदय मेरे साथ अन्याय हुआ है। मैं उन छात्रों में से नहीं था जो कक्षा में शोर मचा रहे थे। 

मैंने अपने कक्षा अध्यापक को इस विषय में बताया, परन्तु उन्होंने मुझ पर विश्वास नहीं किया, जिससे मुझे अत्यंत दुःख हुआ। मैं एक अनुशासित और आज्ञाकारी छात्र हूँ। अगर मैंने शोर मचाया होता तो मैं सर्वप्रथम उसके लिए क्षमा मांगता व दंड स्वरुप पैसे भरता। 

इसलिए कृपा करके मुझे दंड मुक्ति दीजिये। मैं आपको एक बार फिर से अपने अच्छे आचरण का विशवास दिलाता हूँ। 
धन्यवाद। 
आपका आज्ञाकारी शिष्य 
रणबीर कपूर 
कक्षा 8 'ब '
तेंदुआ पर निबंध। Essay on Leopard in Hindi

तेंदुआ पर निबंध। Essay on Leopard in Hindi

तेंदुआ पर निबंध। Essay on Leopard in Hindi

Essay on Leopard in Hindi

तेंदुआ बिल्ली परिवार का एक बड़ा और ताकतवर सदस्य है। यह एक चौपाया जानवर है जिसकी एक लम्बी पूँछ होती है। यह मुख्यतः अफ्रीका, चीन और भारत में पाए जाते हैं। इसकी खाल पीले रंग की होती है, जिस पर गहरे रंग के धब्बे होते हैं जो इसकी पहचान है। परन्तु कुछ तेंदुए काले रंग के पाए जाते हैं जिसे ब्लैक पैंथर कहते हैं। यह आकार में शेर व बाघ से छोटे होते हैं। इनकी खाल की बनावट और रंग इन्हे पेड़ों और घास में छिपने में मदद करते हैं। यह एक मांसाहारी जानवर होता है। यह अपने मजबूत जबड़ों और धारदार नाखूनों का इस्तेमाल शिकार करने में करता है। इनकी पेड़ों पर चढ़ने और छलांग लगाने की क्षमता अद्भुत होती है।

तेंदुए एक एकांतप्रिय जीव होता है, यह शेरों की तरह झुण्ड बनाकर नहीं रहते। वयस्क होते ही यह अकेले रहने लगते हैं और अपने जीवन का ज्यादातर भाग पेड़ों पर अकेले ही बिता देता है। पेड़ों से ही यह अपने शिकार पर घात लगाते है। कभी-कभी यह घास में छिपकर भी अपने शिकार का पीछा करते हैं। इनकी खाल की बनावट और रंग भी इन्हे पेड़ों और घास में छिपने में मदद करते हैं। इनका वजन 50 से 70 किलोग्राम तक व उम्र औसतन 15 वर्ष होती है। नर तेंदुओं का आकार मादा तेंदुओं से बड़ा होता है। यह अपने आकार के जानवरों से लेकर छोटे जानवरों, मछलियों और पक्षियों सभी का शिकार करते हैं। इनकी अनुकूलन क्षमता भी कमाल की है, यह हर प्रकार के मौसम में आसानी से रह सकते हैं।

इन सब खूबियों के बावजूद भी आज इनकी संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। मनुष्यों की बढ़ती आबादी की साथ ही जंगलों को तेजी से काटा जा रहा है। जिससे उन जीवों की संख्या घट रही है, जिनका यह शिकार करते हैं। परिणाम यह होता है की तेंदुए, पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाते हैं। जिससे तंग आकर किसान इनको मार देते हैं। एक और कारण भी है जिसके कारण इनका तेजी से शिकार किया जा रहा है, और वह है इनकी खाल। शिकारी इनको मारकर इनकी खाल और फर को महंगे दामों पर बेच देते हैं क्योंकि इनसे बने सामानों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। हमें ऐसे सामानों का विरोध करना चाहिए और ऐसे सामान को बेचने वालों की  रिपोर्ट करनी चाहिए। जिससे तेंदुओं को संरक्षण मिल सके। सरकार को भी इनके लिए प्राकृतिक आवास बनाने चाहिए जिससे इनकी संख्या में फिर से वृद्धि हो सके।
मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मैं एक पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र हूँ। मैं कई विषय याद करता हूँ। परन्तु अंग्रेजी विषय मुझे अत्यधिक पसंद है। हिंदी मेरी मातृभाषा है मुझे इस पर गर्व है। ये मुझे सरलता से याद हो जाती है। हम घर में भी हिंदी ही बोलते हैं। परन्तु अंग्रेजी के प्रति मेरा विशेष लगाव है। मैं इसे बड़ी रूचि से याद करता हूँ। अंग्रेजी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। यह सम्पूर्ण विश्व में आसानी से समझी व बोली जा सकती है। शिक्षा के साधन के रूप में यह एक महत्वपूर्ण भाषा है। वर्तमान समय में बिना अंग्रेजी सीखे कोई भी तरक्की नहीं कर सकता है।

अंग्रेजी का साहित्य बहुत ही विस्तृत है। भारत में भी अंग्रेजी के कई प्रसिद्ध लेखक हुए हैं। सभी शिक्षित भारतीय अंग्रेजी बोलते व समझते हैं। अंग्रेजों के आगमन के साथ ही हमारे देश में अंग्रेजी का आगमन भी हुआ। यह भारत में लगभग दो सौ सालों से है। कई लोग कहते हैं कि अंग्रेजी एक कठिन भाषा है। वे कहते हैं कि इसकी वर्तनी बहुत कठिन हैं। उच्चारण भी अलग-अलग होता है तथा लिखने व बोलने में अंतर होता है। परन्तु मेरा मानना यह है कि यह सही नहीं है। हर भाषा का अपना वाक्य प्रयोग व व्याकरण होता है। मेरा मानना यह है कि  अंग्रेजी एक बहुत ही सरल और उपयोगी भाषा है। इसकी अपनी खूबसूरती, समृद्धि और आकर्षण है। हिंदी की भांति ही अंग्रेजी में भी जगह के अनुसार अलग उच्चारण होता है जैसे अमेरिकी और ब्रिटिश अंग्रेजी के उच्चारण में फर्क होता है। परन्तु इसके बावजूद भी नियम तो अपरिवर्तित ही रहते हैं।

हमारा स्कूल अंग्रेजी माध्यम का है। बड़े-बड़े प्रशिक्षण केंद्रों में भी अंग्रेजी माध्यम ही चलता है। मैं कम्प्यूटर इंजीनियर बनना चाहता हूँ, बिना अंग्रेजी की ज्ञान के मैं अपना सपना साकार नहीं कर सकता हूँ। इसलिए मैं इस विषय में अधिक रूचि लेता हूँ। अंग्रेजी विषय में मेरे अंक भी हमेशा अच्छे आते हैं। मुझे अंग्रेजी भाषा से लगाव है। 

Friday, 22 September 2017

जल का महत्व पर निबंध। Importance of Water essay in Hindi

जल का महत्व पर निबंध। Importance of Water essay in Hindi

जल का महत्व पर निबंध। Importance of Water essay in Hindi 


जहाँ पानी होता है, वहां जीवन होता है। पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। हमारी पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है, क्योंकि यहाँ पानी और जीवन को संभव बनाने वाली अन्य सभी जरुरी चीजें उपलब्ध हैं। अन्य ग्रह जैसे की मंगल, बुध या शुक्र पर जीवन सम्भव नहीं है। वे किसी बंजर रेगिस्तान के सामान हैं क्योंकि वहाँ पानी नहीं पाया जाता है। पानी जीवन के लिए जरुरी है और साथ ही यह वातावरण को भी स्वच्छ बनाता है।

बहुत से लोग बढ़ व भरी वर्षा में डूबकर मर जाते हैं परन्तु पानी का जीवन में विशेष महत्त्व है। पानी एक ऐसा जीवनदायी तरल है जिसके स्पर्श से बीमार से बीमार व्यक्ति भी उठ खड़ा हो जाता है और उसे नया जीवन मिल जाता है। पानी के बिना किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। यह प्रकृति द्वारा दिया गया एक ऐसा उपहार है जिसका हमें सम्मान करना चाहिए। पीने, नहाने-धोने, सफाई करने व बर्फ जमाने में हमें पानी की आवश्यकता पड़ती है। पानी का इस्तेमाल आग बुझाने, मनोरंजन जैसे होली में रंग खेलने आदि में भी होता है। तैरने, नाव चलाने व मछलियां पकड़ने आदि में भी पानी का प्रयोग होता है क्योंकि अगर पानी नहीं होता तो मछलियां भी नहीं होतीं।

हमें फसलों, बगीचों व जानवरों आदि सभी के लिए पानी की आवश्यकता होती है। हमें बिजली व अन्य उत्पाद बनाने, यहां तक की भोजन को पकाने के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है। पृथ्वी के क्षेत्रफल का अधिकाँश भाग द्वीपों व नदियों से घिरा हुआ है। समुद्र, झरने, नदियों, तालाब, कुएं आदि सभी पानी से संपन्न हैं। पर्यावरण में यह बर्फ, भाप व बादल के रूप में मौजूद है। 

पानी की एक-एक बूँद कीमती है। इसलिए इसको बरबाद नहीं करना चाहिए। पानी एक बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधन है, यह पर्यावरण में संतुलन बनाये रखता है और जीवन को बनाये रखने में मदद करता है। जलचक्र की मदद वर्षा होती है और फिर वही वर्षा का जल नदियों के सहारे दोबारा समुद्र में पहुँचता है। इसलिए पानी का दुरूपयोग कर इसे व्यर्थ में बरबाद नहीं करना चाहिए। परन्तु हर एक पानी पीने लायक नहीं होता है। हम पीने के लिए न तो समुद्र का पानी प्रयोग करते हैं और न ही गन्दा और प्रदूषित पानी पी सकते हैं। हमें हमेशा साफ़ और शुद्ध जल ही पीने के लिए प्रयोग करना चाहिए। परन्तु पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत ही अल्प है। इसलिए हमें पानी को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। जल प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गई है। जल-प्रदूषण के रोकथाम के लिए सभी के सहयोग की आवश्यकता है। पानी प्रकृति द्वारा दिया गया एक अमूल्य उपहार है। इसलिए हमें इसे प्रदूषित नहीं करना चाहिए, क्योंकि जल ही जीवन का दूसरा नाम है। 

Tuesday, 19 September 2017

पर्यटन का महत्व पर अनुच्छेद। Anuched on Paryatan Ka Mahatv

पर्यटन का महत्व पर अनुच्छेद। Anuched on Paryatan Ka Mahatv

पर्यटन का महत्व पर अनुच्छेद 

पर्यटन का महत्त्व पर अनुच्छेद

पर्यटन यानि घूमना, बस घूमने के लिए घूमना, आनंद प्राप्ति के लिए घूमना, जिज्ञासा समाधान के लिए घूमना। ऐसे पर्यटन में सुख ही सुख है। ऐसा पर्यटन रोजाना की थका देने वाली चिंताओं को दूर करता है। पर्यटन से हमें देश-विदेश के खान-पान, रहन-सहन तथा सभ्यता-संस्कृति की जानकारी मिलती है। पर्यटन से हमारे मन के अंधविश्वास टूटते हैं, पूर्व धारणाएं समाप्त होती हैं। हमें यह विश्वास होता है कि -" विश्व भर में रहने वाले हम सभी मनुष्य मूल रूप से एक ही हैं। " राष्ट्रीय एकता बढ़ाने में पर्यटन का बहुत बड़ा योगदान है। वर्तमान समय में पर्यटन एक बहुत बड़े उद्योग का रूप धारण कर चुका है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर एवं उत्तराखंड जैसे पर्वतीय स्थलों की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही आधारित है। आज पर्यटन सुविधापूर्ण हो गया है। प्रायः सभी प्रसिद्ध स्थलों पर होटलों, भोजनालयों, विश्राम गृहों, मनोरंजन स्थलों एवं यातायात के साधनों की भरमार हो गयी है। कुछ पर्यटन स्थल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात हैं तो कुछ का एक अलग ही धार्मिक महत्त्व है। कुछ पर्यटन स्थान ऐतिहासिक महत्त्व है। कुछ पर्यटन स्थल वैज्ञानिक, सांस्कृतिक अन्य महत्त्व रखते हैं। इनमें से प्राकृतिक सौंदर्य तथा धार्मिक महत्त्व के पर्यटन स्थलों पर सर्वाधिक भीड़ रहती हैं। 
पुस्तकालय पर अनुच्छेद। Pustakalaya par Anuched in Hindi

पुस्तकालय पर अनुच्छेद। Pustakalaya par Anuched in Hindi

पुस्तकालय पर अनुच्छेद। Pustakalaya par Anuched in Hindi

पुस्तकालय पर अनुच्छेद

पुस्तकालय ज्ञान के मंदिर हैं। उन्नति के सभी सूत्र पुस्तकालयों में रखी पुस्तकों में सुरक्षित हैं। कोई भी विकास का इच्छुक व्यक्ति इनकी सहायता से मनोवांछित उन्नति कर सकता है। आधुनिक पुस्तकालय बहुत ही व्यवस्थित होते हैं। इसमें लाखों की संख्या में पुस्तकें संग्रहित होती हैं। ये सारी पुस्तकें विषयानुसार अलमारी में अलग-अलग राखी होती हैं। विद्यार्थियों को आरम्भ से ही पुस्तकालय का उपयोग करना सीखना चाहिए। उन्हें चाहिए की वे पुस्तकालय की नियमावली और व्यवस्था भली-भांति जान लें और उसे बनाये रखने का दृढ संकल्प करें। छात्रों को चाहिए की पुस्तकों को समय पर वापस करें। किसी और को भी उस पुस्तक की आवश्यकता हो सकती है। पुस्तकों को संभाल कर रखना चाहिए। किसी प्रकार के निशान या नोट पुस्तकालय की पुस्तकों पर नहीं लिखना चाहिए। कुछ लोग पुस्तकों के पन्ने या चित्र फाड़ लेते हैं और अपने पास रख लेते हैं जो की पूरी तरह गलत है। कुछ पुस्तकें दुर्लभ होती हैं, उन्हें चुराकर अपने पास रख लेना सामाजिक संपत्ति की चोरी समझा जाता है। मंदिर और पुस्तकालय दोनों में ही प्रवेश करते समय मन में पंक्ति की भावना होनी चाहिए। पुस्तकालय में किसी प्रकार का शोर-गुल या बातचीत नहीं करनी चाहिए। गरिमामय व्यवहार से ही पुस्तकालय का सदुपयोग हो सकता है। 

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Monday, 18 September 2017

वृक्षारोपण का महत्व vriksharopan ka mahatva anuched in hindi

वृक्षारोपण का महत्व vriksharopan ka mahatva anuched in hindi

वृक्षारोपण का महत्व पर अनुच्छेद

वृक्षारोपण का महत्त्व पर अनुच्छेद 
वृक्षों के बिना धरती कैसी होगी, यह हम किसी मरुस्थलीय प्रदेश के दर्शन करके सहज ही समझ सकते हैं। वृक्ष हमारे लिए अनेक प्रकार से लाभदायक हैं। गर्मी की तपती दोपहर में वृक्षों की शीतल छाया का सुख तो वृक्षों से ही प्राप्त हो सकता है। छाया के अलावा वृक्षों से फल-फूल, जड़ी-बूटी, इमारती लकड़ी एवं ईंधन आदि अनेक आवश्यक सामग्रियाँ हमें प्राप्त होती हैं। वृक्षों से वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ने में मदद मिलती है। वनों से मानसून का चक्र भी संयमित होता है तथा मृदा के क्षरण पर भी रोक लगती है और जल संरक्षण भी संभव होता है। बेल और पीपल जैसे वृक्षों को पवित्र माना जाता है। लोग पवित्र वृक्षों की पूजा करते हैं। बाढ़ की विभीषिका को रोकने तथा मिट्टी को उर्वर बनाये रखने में वृक्षों का अमूल्य योगदान है। वृक्षों के इस व्यापक महत्त्व को देखते हुए हर वर्ष वन महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर स्कूलों तथा कॉलेजों में वृक्षारोपण का कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। हमें भी अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए और प्राकृतिक सौंदर्य तथा स्वास्थ्य का उपहार इन वृक्षों से प्राप्त करना चाहिए। 

Sunday, 17 September 2017

10 lines on himalaya in hindi

10 lines on himalaya in hindi

10 lines on himalaya in hindi


  1. हिमालय पर्वत विश्व के प्राचीनतम पहाड़ों में से एक हैं जो भारत के उत्तर में है। 
  2. हिमालय को पर्वतराज व गिरिराज आदि नामों से भी पुकारा जाता है। 
  3. हिमालय - हिम और अालय से मिलकर बना है अर्थात बर्फ का घर। 
  4. यह पर्वत पाकिस्तान, भारत, तिब्बत, चीन, नेपाल और भूटान तक फैला है। 
  5. संसार की सबसे ऊँची छोटी माउंट एवेरेस्ट (8648 मी) भी यहीं स्थित है। 
  6. नंदादेवी, धौलागिरी और कंचनजंघा आदि इसके कुछ प्रमुख शिखर हैं। 
  7. यह भारत में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल से लेकर कश्मीर तक फैला है। 
  8. हिमालय से सम्पूर्ण भारत में प्रवाहित होने वाली अनेक नदियां निकलती हैं। 
  9. गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और रामगंगा जैसे पवित्र नदियों का स्रोत हिमालय ही है। 
  10. यह भारत के उत्तर में रक्षक की भाँती खड़ा होकर हमारी रक्षा करता है। 
  11. हिमालय का भौगोलिक महत्त्व होने के साथ-साथ धार्मिक महत्त्व भी है।
  12. हिमालय में ही कैलाश पर्वत पर भगवान् शिव का निवास स्थान माना जाता है। 
  13. हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, अमरनाथ आदि धार्मिक स्थान यहीं बसे हैं। 
  14. यह जैव विविधता से और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण एक दुर्गम पर्वत है।