Saturday, 23 September 2017

जुर्माना माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र। Jurmana mafi Application in Hindi

जुर्माना माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र। Jurmana mafi Application in Hindi

Jurmana mafi Application in Hindi

सेवा में ,
प्रधानाचार्य 
जयपुरिया पब्लिक स्कूल 
कानपुर। 

     विषय : जुर्माना माफ़ी के लिए प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र। 

महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मेरी कक्षा अध्यापक में मुझे दंड स्वरुप बीस रुपये लाने को कहे हैं। उनके अनुसार  कक्षा में उनकी अनुपस्थिति में शोर मचाया, परन्तु महोदय मेरे साथ अन्याय हुआ है। मैं उन छात्रों में से नहीं था जो कक्षा में शोर मचा रहे थे। 

मैंने अपने कक्षा अध्यापक को इस विषय में बताया, परन्तु उन्होंने मुझ पर विश्वास नहीं किया, जिससे मुझे अत्यंत दुःख हुआ। मैं एक अनुशासित और आज्ञाकारी छात्र हूँ। अगर मैंने शोर मचाया होता तो मैं सर्वप्रथम उसके लिए क्षमा मांगता व दंड स्वरुप पैसे भरता। 

इसलिए कृपा करके मुझे दंड मुक्ति दीजिये। मैं आपको एक बार फिर से अपने अच्छे आचरण का विशवास दिलाता हूँ। 
धन्यवाद। 
आपका आज्ञाकारी शिष्य 
रणबीर कपूर 
कक्षा 8 'ब '
तेंदुआ पर निबंध। Essay on Leopard in Hindi

तेंदुआ पर निबंध। Essay on Leopard in Hindi

तेंदुआ पर निबंध। Essay on Leopard in Hindi

Essay on Leopard in Hindi

तेंदुआ बिल्ली परिवार का एक बड़ा और ताकतवर सदस्य है। यह एक चौपाया जानवर है जिसकी एक लम्बी पूँछ होती है। यह मुख्यतः अफ्रीका, चीन और भारत में पाए जाते हैं। इसकी खाल पीले रंग की होती है, जिस पर गहरे रंग के धब्बे होते हैं जो इसकी पहचान है। परन्तु कुछ तेंदुए काले रंग के पाए जाते हैं जिसे ब्लैक पैंथर कहते हैं। यह आकार में शेर व बाघ से छोटे होते हैं। इनकी खाल की बनावट और रंग इन्हे पेड़ों और घास में छिपने में मदद करते हैं। यह एक मांसाहारी जानवर होता है। यह अपने मजबूत जबड़ों और धारदार नाखूनों का इस्तेमाल शिकार करने में करता है। इनकी पेड़ों पर चढ़ने और छलांग लगाने की क्षमता अद्भुत होती है।

तेंदुए एक एकांतप्रिय जीव होता है, यह शेरों की तरह झुण्ड बनाकर नहीं रहते। वयस्क होते ही यह अकेले रहने लगते हैं और अपने जीवन का ज्यादातर भाग पेड़ों पर अकेले ही बिता देता है। पेड़ों से ही यह अपने शिकार पर घात लगाते है। कभी-कभी यह घास में छिपकर भी अपने शिकार का पीछा करते हैं। इनकी खाल की बनावट और रंग भी इन्हे पेड़ों और घास में छिपने में मदद करते हैं। इनका वजन 50 से 70 किलोग्राम तक व उम्र औसतन 15 वर्ष होती है। नर तेंदुओं का आकार मादा तेंदुओं से बड़ा होता है। यह अपने आकार के जानवरों से लेकर छोटे जानवरों, मछलियों और पक्षियों सभी का शिकार करते हैं। इनकी अनुकूलन क्षमता भी कमाल की है, यह हर प्रकार के मौसम में आसानी से रह सकते हैं।

इन सब खूबियों के बावजूद भी आज इनकी संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। मनुष्यों की बढ़ती आबादी की साथ ही जंगलों को तेजी से काटा जा रहा है। जिससे उन जीवों की संख्या घट रही है, जिनका यह शिकार करते हैं। परिणाम यह होता है की तेंदुए, पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाते हैं। जिससे तंग आकर किसान इनको मार देते हैं। एक और कारण भी है जिसके कारण इनका तेजी से शिकार किया जा रहा है, और वह है इनकी खाल। शिकारी इनको मारकर इनकी खाल और फर को महंगे दामों पर बेच देते हैं क्योंकि इनसे बने सामानों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। हमें ऐसे सामानों का विरोध करना चाहिए और ऐसे सामान को बेचने वालों की  रिपोर्ट करनी चाहिए। जिससे तेंदुओं को संरक्षण मिल सके। सरकार को भी इनके लिए प्राकृतिक आवास बनाने चाहिए जिससे इनकी संख्या में फिर से वृद्धि हो सके।
मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मेरा प्रिय विषय पर निबंध। My Favourite Subject Essay in Hindi

मैं एक पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा का छात्र हूँ। मैं कई विषय याद करता हूँ। परन्तु अंग्रेजी विषय मुझे अत्यधिक पसंद है। हिंदी मेरी मातृभाषा है मुझे इस पर गर्व है। ये मुझे सरलता से याद हो जाती है। हम घर में भी हिंदी ही बोलते हैं। परन्तु अंग्रेजी के प्रति मेरा विशेष लगाव है। मैं इसे बड़ी रूचि से याद करता हूँ। अंग्रेजी एक अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। यह सम्पूर्ण विश्व में आसानी से समझी व बोली जा सकती है। शिक्षा के साधन के रूप में यह एक महत्वपूर्ण भाषा है। वर्तमान समय में बिना अंग्रेजी सीखे कोई भी तरक्की नहीं कर सकता है।

अंग्रेजी का साहित्य बहुत ही विस्तृत है। भारत में भी अंग्रेजी के कई प्रसिद्ध लेखक हुए हैं। सभी शिक्षित भारतीय अंग्रेजी बोलते व समझते हैं। अंग्रेजों के आगमन के साथ ही हमारे देश में अंग्रेजी का आगमन भी हुआ। यह भारत में लगभग दो सौ सालों से है। कई लोग कहते हैं कि अंग्रेजी एक कठिन भाषा है। वे कहते हैं कि इसकी वर्तनी बहुत कठिन हैं। उच्चारण भी अलग-अलग होता है तथा लिखने व बोलने में अंतर होता है। परन्तु मेरा मानना यह है कि यह सही नहीं है। हर भाषा का अपना वाक्य प्रयोग व व्याकरण होता है। मेरा मानना यह है कि  अंग्रेजी एक बहुत ही सरल और उपयोगी भाषा है। इसकी अपनी खूबसूरती, समृद्धि और आकर्षण है। हिंदी की भांति ही अंग्रेजी में भी जगह के अनुसार अलग उच्चारण होता है जैसे अमेरिकी और ब्रिटिश अंग्रेजी के उच्चारण में फर्क होता है। परन्तु इसके बावजूद भी नियम तो अपरिवर्तित ही रहते हैं।

हमारा स्कूल अंग्रेजी माध्यम का है। बड़े-बड़े प्रशिक्षण केंद्रों में भी अंग्रेजी माध्यम ही चलता है। मैं कम्प्यूटर इंजीनियर बनना चाहता हूँ, बिना अंग्रेजी की ज्ञान के मैं अपना सपना साकार नहीं कर सकता हूँ। इसलिए मैं इस विषय में अधिक रूचि लेता हूँ। अंग्रेजी विषय में मेरे अंक भी हमेशा अच्छे आते हैं। मुझे अंग्रेजी भाषा से लगाव है। 

Friday, 22 September 2017

जल का महत्व पर निबंध। Importance of Water essay in Hindi

जल का महत्व पर निबंध। Importance of Water essay in Hindi

जल का महत्व पर निबंध। Importance of Water essay in Hindi 


जहाँ पानी होता है, वहां जीवन होता है। पानी के बिना जीवन संभव नहीं है। हमारी पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है, क्योंकि यहाँ पानी और जीवन को संभव बनाने वाली अन्य सभी जरुरी चीजें उपलब्ध हैं। अन्य ग्रह जैसे की मंगल, बुध या शुक्र पर जीवन सम्भव नहीं है। वे किसी बंजर रेगिस्तान के सामान हैं क्योंकि वहाँ पानी नहीं पाया जाता है। पानी जीवन के लिए जरुरी है और साथ ही यह वातावरण को भी स्वच्छ बनाता है।

बहुत से लोग बढ़ व भरी वर्षा में डूबकर मर जाते हैं परन्तु पानी का जीवन में विशेष महत्त्व है। पानी एक ऐसा जीवनदायी तरल है जिसके स्पर्श से बीमार से बीमार व्यक्ति भी उठ खड़ा हो जाता है और उसे नया जीवन मिल जाता है। पानी के बिना किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती है। यह प्रकृति द्वारा दिया गया एक ऐसा उपहार है जिसका हमें सम्मान करना चाहिए। पीने, नहाने-धोने, सफाई करने व बर्फ जमाने में हमें पानी की आवश्यकता पड़ती है। पानी का इस्तेमाल आग बुझाने, मनोरंजन जैसे होली में रंग खेलने आदि में भी होता है। तैरने, नाव चलाने व मछलियां पकड़ने आदि में भी पानी का प्रयोग होता है क्योंकि अगर पानी नहीं होता तो मछलियां भी नहीं होतीं।

हमें फसलों, बगीचों व जानवरों आदि सभी के लिए पानी की आवश्यकता होती है। हमें बिजली व अन्य उत्पाद बनाने, यहां तक की भोजन को पकाने के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है। पृथ्वी के क्षेत्रफल का अधिकाँश भाग द्वीपों व नदियों से घिरा हुआ है। समुद्र, झरने, नदियों, तालाब, कुएं आदि सभी पानी से संपन्न हैं। पर्यावरण में यह बर्फ, भाप व बादल के रूप में मौजूद है। 

पानी की एक-एक बूँद कीमती है। इसलिए इसको बरबाद नहीं करना चाहिए। पानी एक बहुत ही महत्वपूर्ण संसाधन है, यह पर्यावरण में संतुलन बनाये रखता है और जीवन को बनाये रखने में मदद करता है। जलचक्र की मदद वर्षा होती है और फिर वही वर्षा का जल नदियों के सहारे दोबारा समुद्र में पहुँचता है। इसलिए पानी का दुरूपयोग कर इसे व्यर्थ में बरबाद नहीं करना चाहिए। परन्तु हर एक पानी पीने लायक नहीं होता है। हम पीने के लिए न तो समुद्र का पानी प्रयोग करते हैं और न ही गन्दा और प्रदूषित पानी पी सकते हैं। हमें हमेशा साफ़ और शुद्ध जल ही पीने के लिए प्रयोग करना चाहिए। परन्तु पीने योग्य पानी की मात्रा बहुत ही अल्प है। इसलिए हमें पानी को प्रदूषित नहीं करना चाहिए। जल प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गई है। जल-प्रदूषण के रोकथाम के लिए सभी के सहयोग की आवश्यकता है। पानी प्रकृति द्वारा दिया गया एक अमूल्य उपहार है। इसलिए हमें इसे प्रदूषित नहीं करना चाहिए, क्योंकि जल ही जीवन का दूसरा नाम है। 

Tuesday, 19 September 2017

पर्यटन का महत्व पर अनुच्छेद। Anuched on Paryatan Ka Mahatv

पर्यटन का महत्व पर अनुच्छेद। Anuched on Paryatan Ka Mahatv

पर्यटन का महत्व पर अनुच्छेद 

पर्यटन का महत्त्व पर अनुच्छेद

पर्यटन यानि घूमना, बस घूमने के लिए घूमना, आनंद प्राप्ति के लिए घूमना, जिज्ञासा समाधान के लिए घूमना। ऐसे पर्यटन में सुख ही सुख है। ऐसा पर्यटन रोजाना की थका देने वाली चिंताओं को दूर करता है। पर्यटन से हमें देश-विदेश के खान-पान, रहन-सहन तथा सभ्यता-संस्कृति की जानकारी मिलती है। पर्यटन से हमारे मन के अंधविश्वास टूटते हैं, पूर्व धारणाएं समाप्त होती हैं। हमें यह विश्वास होता है कि -" विश्व भर में रहने वाले हम सभी मनुष्य मूल रूप से एक ही हैं। " राष्ट्रीय एकता बढ़ाने में पर्यटन का बहुत बड़ा योगदान है। वर्तमान समय में पर्यटन एक बहुत बड़े उद्योग का रूप धारण कर चुका है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर एवं उत्तराखंड जैसे पर्वतीय स्थलों की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही आधारित है। आज पर्यटन सुविधापूर्ण हो गया है। प्रायः सभी प्रसिद्ध स्थलों पर होटलों, भोजनालयों, विश्राम गृहों, मनोरंजन स्थलों एवं यातायात के साधनों की भरमार हो गयी है। कुछ पर्यटन स्थल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विख्यात हैं तो कुछ का एक अलग ही धार्मिक महत्त्व है। कुछ पर्यटन स्थान ऐतिहासिक महत्त्व है। कुछ पर्यटन स्थल वैज्ञानिक, सांस्कृतिक अन्य महत्त्व रखते हैं। इनमें से प्राकृतिक सौंदर्य तथा धार्मिक महत्त्व के पर्यटन स्थलों पर सर्वाधिक भीड़ रहती हैं। 
पुस्तकालय पर अनुच्छेद। Pustakalaya par Anuched in Hindi

पुस्तकालय पर अनुच्छेद। Pustakalaya par Anuched in Hindi

पुस्तकालय पर अनुच्छेद। Pustakalaya par Anuched in Hindi

पुस्तकालय पर अनुच्छेद

पुस्तकालय ज्ञान के मंदिर हैं। उन्नति के सभी सूत्र पुस्तकालयों में रखी पुस्तकों में सुरक्षित हैं। कोई भी विकास का इच्छुक व्यक्ति इनकी सहायता से मनोवांछित उन्नति कर सकता है। आधुनिक पुस्तकालय बहुत ही व्यवस्थित होते हैं। इसमें लाखों की संख्या में पुस्तकें संग्रहित होती हैं। ये सारी पुस्तकें विषयानुसार अलमारी में अलग-अलग राखी होती हैं। विद्यार्थियों को आरम्भ से ही पुस्तकालय का उपयोग करना सीखना चाहिए। उन्हें चाहिए की वे पुस्तकालय की नियमावली और व्यवस्था भली-भांति जान लें और उसे बनाये रखने का दृढ संकल्प करें। छात्रों को चाहिए की पुस्तकों को समय पर वापस करें। किसी और को भी उस पुस्तक की आवश्यकता हो सकती है। पुस्तकों को संभाल कर रखना चाहिए। किसी प्रकार के निशान या नोट पुस्तकालय की पुस्तकों पर नहीं लिखना चाहिए। कुछ लोग पुस्तकों के पन्ने या चित्र फाड़ लेते हैं और अपने पास रख लेते हैं जो की पूरी तरह गलत है। कुछ पुस्तकें दुर्लभ होती हैं, उन्हें चुराकर अपने पास रख लेना सामाजिक संपत्ति की चोरी समझा जाता है। मंदिर और पुस्तकालय दोनों में ही प्रवेश करते समय मन में पंक्ति की भावना होनी चाहिए। पुस्तकालय में किसी प्रकार का शोर-गुल या बातचीत नहीं करनी चाहिए। गरिमामय व्यवहार से ही पुस्तकालय का सदुपयोग हो सकता है। 

सम्बंधित पोस्ट पुस्तकों का महत्त्व पर अनुच्छेद लेखन भी पढ़ें। 

Monday, 18 September 2017

वृक्षारोपण का महत्व vriksharopan ka mahatva anuched in hindi

वृक्षारोपण का महत्व vriksharopan ka mahatva anuched in hindi

वृक्षारोपण का महत्व पर अनुच्छेद

वृक्षारोपण का महत्त्व पर अनुच्छेद 
वृक्षों के बिना धरती कैसी होगी, यह हम किसी मरुस्थलीय प्रदेश के दर्शन करके सहज ही समझ सकते हैं। वृक्ष हमारे लिए अनेक प्रकार से लाभदायक हैं। गर्मी की तपती दोपहर में वृक्षों की शीतल छाया का सुख तो वृक्षों से ही प्राप्त हो सकता है। छाया के अलावा वृक्षों से फल-फूल, जड़ी-बूटी, इमारती लकड़ी एवं ईंधन आदि अनेक आवश्यक सामग्रियाँ हमें प्राप्त होती हैं। वृक्षों से वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ने में मदद मिलती है। वनों से मानसून का चक्र भी संयमित होता है तथा मृदा के क्षरण पर भी रोक लगती है और जल संरक्षण भी संभव होता है। बेल और पीपल जैसे वृक्षों को पवित्र माना जाता है। लोग पवित्र वृक्षों की पूजा करते हैं। बाढ़ की विभीषिका को रोकने तथा मिट्टी को उर्वर बनाये रखने में वृक्षों का अमूल्य योगदान है। वृक्षों के इस व्यापक महत्त्व को देखते हुए हर वर्ष वन महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर स्कूलों तथा कॉलेजों में वृक्षारोपण का कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। हमें भी अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए और प्राकृतिक सौंदर्य तथा स्वास्थ्य का उपहार इन वृक्षों से प्राप्त करना चाहिए। 

Sunday, 17 September 2017

10 lines on himalaya in hindi

10 lines on himalaya in hindi

10 lines on himalaya in hindi


  1. हिमालय पर्वत विश्व के प्राचीनतम पहाड़ों में से एक हैं जो भारत के उत्तर में है। 
  2. हिमालय को पर्वतराज व गिरिराज आदि नामों से भी पुकारा जाता है। 
  3. हिमालय - हिम और अालय से मिलकर बना है अर्थात बर्फ का घर। 
  4. यह पर्वत पाकिस्तान, भारत, तिब्बत, चीन, नेपाल और भूटान तक फैला है। 
  5. संसार की सबसे ऊँची छोटी माउंट एवेरेस्ट (8648 मी) भी यहीं स्थित है। 
  6. नंदादेवी, धौलागिरी और कंचनजंघा आदि इसके कुछ प्रमुख शिखर हैं। 
  7. यह भारत में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल से लेकर कश्मीर तक फैला है। 
  8. हिमालय से सम्पूर्ण भारत में प्रवाहित होने वाली अनेक नदियां निकलती हैं। 
  9. गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और रामगंगा जैसे पवित्र नदियों का स्रोत हिमालय ही है। 
  10. यह भारत के उत्तर में रक्षक की भाँती खड़ा होकर हमारी रक्षा करता है। 
  11. हिमालय का भौगोलिक महत्त्व होने के साथ-साथ धार्मिक महत्त्व भी है।
  12. हिमालय में ही कैलाश पर्वत पर भगवान् शिव का निवास स्थान माना जाता है। 
  13. हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गोमुख, अमरनाथ आदि धार्मिक स्थान यहीं बसे हैं। 
  14. यह जैव विविधता से और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण एक दुर्गम पर्वत है। 


अंधविश्वास पर निबंध। Essay on Andhvishwas in Hindi

अंधविश्वास पर निबंध। Essay on Andhvishwas in Hindi

अंधविश्वास पर निबंध। Essay on Andhvishwas in Hindi

अंधविश्वास पर निबंध। Essay on Andhvishwas in Hindi

अन्धविश्वास बहुत ही बुरी चीज होती है क्योंकि इसकी जड़ें अज्ञानता में फैली होती हैं। यह हमारे भय, निराशा, असहायता व ज्ञान की कमी को दर्शाता है। यह बहुत ही दुखद है की बहुत से पढ़े-लिखे लोग भी अंधविश्वासों में जकड़े होते हैं। इस ज्ञान और विज्ञान के युग में यह हमारी बौद्धिक निर्धनता को दिखाता है। यह बहुत ही मूर्खतापूर्ण है की जब इंसान किसी बात को समझ नहीं पाता है तो वह उस चीज के लिए अंधविश्वासी हो जाता है। हम इन्हें दैवीय कारण समझकर डरने लगते हैं। 

बहुत से अंधविश्वास बहुत ही हास्यास्पद बन जाते हैं, जैसे कि 13 नंबर को अशुभ माना जाता है या कोई छींक दे तो यात्रा के लिए मत जाओ। इसी प्रकार बिल्ली के रास्ता काटने से माना जाता है की कुछ बुरा होने वाला है। उल्लू की आवाज़ या भेड़िये की आवाज़ सुनकर अनहोनी की आशंका करना, यह सब  अंधविश्वास के कारण हैं। इससे यह पता चलता है की हम मानसिक स्तर पर आज भी आदिम युग में ही जी रहे हैं। कई जगहों पर तो यह भी माना जाता है की अगर घोड़े की नाल को घर के दरवाजों पर लगा दिया जाए तो वह सौभाग्य का प्रतीक होता है। इन सभी अंधविश्वासों को मानना वास्तव में हास्यास्पद है। 

अंधविश्वास किसी विशेष समाज या देश से नहीं जुड़े हैं बल्कि यह हर जगह पाए जाते हैं। अंधविश्वास में आस्था रखने वालों में अधिकतर गरीब, अनपढ़ व निचले तबके के लोग हैं। हम वैज्ञानिक सोच का प्रचार-प्रसार करके अंधविश्वासों में कमी ला सकते हैं। कारण व तथ्यों की मदद से सभी अनसुलझे रहस्यों को सुलझाया जा सकता है और अंधविश्वास की जड़ों पर प्रहार किया जा सकता है। 

आज से कुछ शताब्दी पूर्व चेचक को भगवान् का प्रकोप समझा जाता था। लेकिन मेडिकल विज्ञान की सहायता से इसे जड़ से ख़त्म कर दिया गया। इसके लिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की प्रशंसा करनी चाहिए। कई बार ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए मानव बलि की ख़बरें सुनाई देती हैं। यह कैसी मूर्खता है ? यही अंधविश्वास हमें एक ही समय में हंसाने और रुलाने, दोनों का ही कार्य करता है। इसका सुधार सिर्फ लोगों में शिक्षा और ज्ञान के प्रचार द्वारा किया जा सकता है। 
दशहरा पर निबंध। Essay on Dussehra in Hindi

दशहरा पर निबंध। Essay on Dussehra in Hindi

दशहरा पर निबंध। Essay on Dussehra in Hindi

दशहरा पर निबंध। Essay on Dussehra in Hindi

हिन्दुओं के अनेक पर्व-त्यौहार हैं जिनका किसी न किसी रूप में विशेष महत्त्व है। इन सभी पर्वों से हमें नवजीवन, उत्साह के साथ-साथ विशेष आनंद भी मिलता है। इन पर्वों से हम सच्चाई, आदर्श और नैतिकता की शिक्षा ग्रहण करते हैं। दशहरा भी एक ऐसा ही त्यौहार है जो सम्पूर्ण देश में बड़े ही जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दशहरा को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। 

दशहरा का पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। कहा जाता है की महाशक्ति दुर्गा ने नौ दिन तक महिषासुर के साथ युद्ध किया और दसवें दिन अर्थात दशमी को उस पर विजय प्राप्त की। इसीलिए इसे विजयादशमी भी कहते हैं। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्तम रामचंद्र जी ने रावण पर विजय प्राप्त की थी। इस विजय के उपलक्ष्य में यह दिन आज भी दशहरा के रूप में मनाया जाता है। 

उत्तर-पूर्वी भारत में दशहरे का पर्व मुख्य रूप से राम-रावण के युद्ध से जुड़ा है। इसको मनाने के लिए जगह-जगह रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है। नगर व कस्बों के प्रमुख बाजारों में श्रीराम के जीवन को चित्रित करने वाली झाँकियाँ निकाली जाती हैं। इस दिन रावण, कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के पुतले जलाये जाते हैं। आस-पास के गाँवों व नगरों से हजारों लोग न्याय और सत्य के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम की विजय और पाप, अधर्म और बुराई के प्रतीक रावण की हार देखने आते हैं। इस पर्व के दिन चारों ओर खूब चहल-पहल होती है। बाजारों में मेले जैसा दृश्य दिखाई पड़ता है। सभी लोग परिवार के साथ मेले का आनंद लेते हैं। 

बंगाल में महाशक्ति दुर्गा के सम्मान और श्रद्धा में यह पर्व मनाया जाता है। वहाँ के जनमानस में यह धारणा है की इस दिन महाशक्ति दुर्गा कैलाश पर्वत प्रस्थान करती हैं। नवरात्र तक प्रायः प्रत्येक घर में दुर्गा माता की प्रतिमा सजा-धजा कर बड़ी श्रद्धा के साथ झाँकियाँ निकाली जाती हैं और रात्रि में भजन-कीर्तन होते हैं।

क्षत्रिय लोग दशहरे के दिन अपने शास्त्रों का पूजन करते हैं। इस दिन राजा लोगों की सवारी बड़ी धूम-धाम से निकलती है। सभी लोग दशहरे की इस अवसर पर एक-दूसरे को बधाई देते हैं। वैश्य लोग इस  बहीखातों व बाँटों  करते हैं। इस दिन नीलकंठ का दर्शन भी अत्यंत शुभ माना जाता है। 

विजयादशमी का यह त्यौहार रावण पर राम की विजय का संदेश देता है। हमें निष्ठा और पवित्र भावना से इस पर्व को मनाना चाहिए। यह पर्व हमारे सामने राम का आदर्श चरित्र रखकर हमको यह प्रेरणा देता है की शत्रु एवं अत्याचारों को नष्ट कर देना च्चिए 

Saturday, 16 September 2017

अच्छा आचरण पर निबंध

अच्छा आचरण पर निबंध

अच्छा आचरण पर निबंध। 

अच्छा आचरण पर निबंध

अच्छा आचरण इंसान को सभ्य बनता है। वह हमारे जीवन को शांतिदायक, आसान और रुचिकर बनाता है। एक सभ्य व्यक्ति का हर जगह स्वागत किया जाता है। सभ्य व्यक्ति  सभी स्नेह व प्रेम पर दुष्ट व्यक्ति से सभी घृणा व नफरत करते हैं। लोग इस प्रकार के लोगों से बहुत बचकर रहते हैं। 

अच्छे आचरण से तात्पर्य है अच्छे व्यवहार से। यह हमारी कोमलता, कुलीनता और प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करता है। इसका अर्थ यह है की हमारी बातों, हमारी आदतों से किसी के दिल को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। इसका अर्थ यह भी हुआ की हमें दूसरों के बारे में कभी भी बुरा-भला नहीं कहना चाहिए। हमें हमेशा विनम्र व मीठी भाषा का ही प्रयोग करना चाहिए। अगर कोई हमारी सहायता करे तो हमें सच्चे दिल से उसे धन्यवाद कहना चाहिए। हमें ज्यादा से ज्यादा कृतज्ञ शब्दों का प्रयोग करना चाहिए परन्तु सिर्फ तभी जब इसकी जरुरत हो। अच्छे आचरण का अर्थ है की हमें किसी भी प्रकार के झूठ से बचना चाहिए। इसका यह भी अर्थ है की हमें दूसरों को प्रभावित करने पर बल देना चाहिए। इसके लिए चाहे हमें अप्रिय सच ही क्यों न बोलना पड़े। 

अच्छे आचरण का अर्थ है कि हम अपने बड़े-बूढ़ों और असहाय लोगों, विशेषकर महिलाओं को आगे आने का अवसर प्रदान करें। हमें सभी की मदद करनी चाहिए और उनका ध्यान रखना चाहिए। हमें अपने आस-पास के वातावरण को भी साफ़ रखना चाहिए। हम किसी के भावों को आहात न करें। किसी की गलती पर न हँसना भी सभ्यता का ही एक अंग है। अच्छे आचरण के अंतर्गत हमें अपने शारीरिक भाषा का भी ध्यान रखना चाहिए, सदैव अपने से बड़े-बूढ़ों का अभिवादन करना चाहिए। 

चिड़ियों व बेजुबान जानवरों को मारना भी अच्छा आचरण नहीं कहलाता, इसी प्रकार पेड़-पौधों से अनावश्यक रूप से पत्तियाँ व फूलों को तोडना भी अच्छा आचरण नहीं है। अच्छी सभ्यता अच्छे आदर्शों व मित्रता को फैलाती है। इससे एक स्वस्थ और शांतिपूर्ण जीवन का निर्माण होता है। अच्छा आचरण छोटी उम्र से ही सीखा जाता है। यह बहुत आसानी से सीखे जा सकते है, यह हमें सामाजिक होने में मदद करते हैं व एक सफल जीवन का निर्माण करते हैं। 

Friday, 15 September 2017

डाकिये पर निबंध। Essay on Postman in Hindiनिबंध। Essay on Postman in Hindi

डाकिये पर निबंध। Essay on Postman in Hindiनिबंध। Essay on Postman in Hindi

डाकिये पर निबंध। Essay on Postman in Hindi

डाकिये पर निबंध। Essay on Postman in Hindi

डाकिये के नाम से सभी व्यक्ति परिचित हैं। वह एक जाना-माना जनता का सेवक है। वह डाक घर में काम करता है लेकिन उसका अधिकतर समय डाक घर के बाहर व्यतीत होता है। वह घर-घर, गली-गली जाकर लोगों को चिठ्ठियां, मनीऑर्डर्स, पत्र, कार्ड्स और किताबें आदि पहुँचता है। उसकी सेवायें बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। लोग डाकिये के दरवाजा खटखटाने की प्रतीक्षा करते हैं, उसका हमेशा स्वागत करते हैं। 

डाकिया खाकी वर्दी पहनता है व उसके कंधे पर एक चिठ्ठियों से भरा थैला लटका रहता है। वह डाक के डिब्बों से डाक इकठ्ठी करता है। तत्पश्चात उन्हें गाडी व ट्रेनों की सहायता से अलग-अलग शहरों में विभिन्न पतों पर पहुँचा दिया जाता है। वह अन्य डाकघर तथा स्थानों से प्राप्त किये गए पत्रों को बांटता है। वह मनीऑर्डर्स, रजिस्टर्ड लेटर्स या स्पीड पोस्ट डाक का वितरण करता है। 

वह लोगों तथा शहरों को आपस में मिलाता है। दूर रहने वाले सम्बन्धियों को भी आ[अस में मिलाता है। वह कई बार अच्छी ख़बरें लाता है तो कई बार अनचाही ख़बरें भी सुनाता है। परन्तु फिर भी वह हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है और उसका कार्य महत्वपूर्ण है। खबर तो खबर है फिर चाहे अच्छी हो या बुरी। 

डाकिये की ड्यूटी बहुत ही कठिन होती है। गाँव में कार्यरत डाकियों का काम तो और भी कठिन है क्योंकि गाँव में उन्हें लम्बी दूरी कई बार साइकिल, ऊंट, नाव से या कई बार तो उन्हें पैदल भी चलना पड़ता है। तेज धूप हो या बरसात, बर्फ पड़े या फिर गर्मी की झुलसा देने वाली तपिश हो, एक डाकिये को सदैव अपने कार्य के लिए उपस्थित रहना पड़ता है। लेकिन इन सभी सेवाओं की तुलना में उसका वेतन बहुत ही कम होता है। उसकी तरक्की की संभावना भी नहीं होती। 

डाकिये के पास जिम्मेदार पोस्ट होती है लेकिन उसके बदले में उसे उचित प्रतिफल नहीं मिलता है। उसके कार्य की परिस्थितियों  व अनुदान में सुधार किये जाने चाहिए। उसके बच्चों को अच्छी शिक्षा व उचित ट्रेनिंग सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए। चूंकि वह कठिन परिस्थितियों में कार्य करता हैं इसलिए उसको बीमा प्रदान करना चाहिए। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में वह बड़ी पार करके, घने जंगलों को पार करके काम करते हैं और इससे इन्हें खतरों का सामना करना पड़ता है। जब वह मनीऑर्डर्स लाते हैं तो उनको ज्यादा खतरा होता है। वह हमारी सहानुभूति और इज्जत के पात्र हैं। उन्हें बहुत ही कम छुट्टियां  मिलती हैं व उनका कार्य बहुत ही लम्बा और मुश्किल होता है। अतः सरकार द्वारा उन्हें उनके कार्य के अनुरूप ही वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए। 

Thursday, 14 September 2017

अखबार पर निबंध। Essay on Newspaper in Hindi

अखबार पर निबंध। Essay on Newspaper in Hindi

अखबार पर निबंध। Essay on Newspaper in Hindi

अखबार पर निबंध। Essay on Newspaper in Hindi

अखबार हमारे जीवन का भाग और एक पोटली है। बहुत से शिक्षित लोग अपना दिन अखबार पढ़कर शुरू करते हैं। अखबार के बिना नहुत से लोगों का चाय व नाश्ता भी संभव नहीं होता है। हम लोग सुबह अखबार वाले की प्रतीक्षा करते हैं की अखबार वाला आये जिससे की हमें देश की साड़ी ताज़ी ख़बरें प्राप्त हों। देश के अशिक्षित व अनपढ़ लोग दूसरों के द्वारा ख़बरें सुन्ना बहुत पसंद करते हैं। संसार तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। सभी चीजें बड़ी ही तेजी से नए से नया रूप ले रही हैं। अखबार ज्ञान और जानकारी का एक बहुत ही सस्ता और बढियाँ स्रोत है। यह नै गतिविधियों को जानने का प्रमुख साधन है। (समाचार पत्र पर निबंध यहाँ पढ़ें।)

अखबार देश-विदेश की ख़बरें, झलकियां व मनोरंजन का प्रमुख साधन है। यह पढ़ने वालों को विभिन्न विषयों की जानकारी देता है। सिर्फ अखबार ही एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा सरकार को जनता के बारे में और जनता को सरकार की नीतियों के बारे में पता चलता है। वर्गीकरण के माध्यम से जनता को रोजगार की प्राप्ति भी होती है। इसके द्वारा बिक्री को बढ़ाकर उद्योगों को भी प्रोत्साहन दिया जाता है। 

अच्छे अखबार हमेशा सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज़ प्रथा को ख़त्म करने का प्रयास करते हैं, सामाजिक कुरीतियों जैसे बालविवाह, जात-पाँत आदि के भेद भाव को ख़त्म करने का प्रयास करते हैं। अखबार में बहुत से अच्छे लेख व उदाहरण छपते हैं जो पाठकों को अपने बारे में ज्ञान कराते हैं। इसमें कहानियां, कॉमिक्स, कार्टून्स, बहुत सी कवितायें एवं चित्र या तस्वीर होती हैं। जिसकी मदद से हमें मुश्किल चीजों को समाजगने का अवसर मिलता है। 

भारत में रोज अनेक अखबार हजारों भाषा में प्रकाशित होते हैं। हिंदी, अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओँ के अखबार पढ़ने वाले लाखों लोग हैं। शिक्षा के प्रसार के कारण इनको पढ़े वाले लोगों की संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है जनसमुदाय में इसकी बहुत ही शक्ति और महत्त्व है। 
समय का सदुपयोग पर निबंध। Samay ka Sadupyog par Nibandh

समय का सदुपयोग पर निबंध। Samay ka Sadupyog par Nibandh

समय का सदुपयोग पर निबंध। 

समय का सदुपयोग पर निबंध। Samay ka Sadupyog par Nibandh

वास्तव में समय एक बहुत हीअद्भुत चीज है। समय का न तो कोई आदि है और न ही कोई अंत है। सभी चीजें अपने निश्चित समय पर जन्म लेती, बड़ी होती और फिर ख़ास समय पर नष्ट हो जाती हैं। समय सदैव अपने ढंग से चलता रहता है। समय ही सबका संचालन करता है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता चाहे वह राजा हो या रानी। समय का विश्लेषण भी नहीं किया जा सकता है। हम व्यतीत समय व उसकी उपयोगिताओं को समझने के लिए सचेत हैं। हमने समय की रफ़्तार को देखने के लिए घड़ियों का भी निर्माण किया। हमने दिन, दिनांक और सालों को अपने हिसाब से मापने की योजना भी तैयार की परं वास्तव में समय एक अविभाज्य और अमापनीय चीज है। 

लोगों ने समय को ही सबसे बड़ा धन माना ? पर समय धन से भी अधिक कीमती है। खोया हुआ धन तो दोबारा पाया जा सकता है परन्तु एक बार जो समय बीत जाय वो वापस लौटकर नहीं आता। समय परिवर्तनशील है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। समय के परिवर्तन से कुछ भी मुक्त नहीं है। मनुष्य का जीवन क्षण-भंगुर होता है और कार्य ज्यादा और कठिन होते हैं। इसलिए हम अपने जीवन का एक भी मिनट बर्बाद नहीं कर सकते हैं। यहां तक की हर सांस, हर सेकेण्ड का भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए। हमें विद्यालय सम्बन्धी कार्य, गृहकार्य, आराम करने का समय, मनोरंजन, व्यायाम इन सभी कार्यों को सही ढंग से योजनाबद्ध तरीके से करना चाहिए। 

हमें समय बरबाद नहीं करना चाहिए। वास्तव में कोई भी समय की खराब नहीं कर सकता। यह केवल हम ही हैं जी समय द्वारा बेकार कर दिए जाते हैं। समय की व्यवस्था होना बहुत जरुरी है। इतिहास के सभी महान लोगों ने अपने समय का एक-एक क्षण बहुत ही लाभदायक और व्यवस्थित तरीके से प्रयोग किया जिससे इतिहास में उनका नाम अमर हो गया। 

हमने महान आविष्कार किये हैं। आश्चर्यजनक चीजों की खोज की, तथा समय की धारा में अपने पदचिन्ह छोड़ दिए। वास्तव में खाली समय का भी सदुपयोग किया जा सकता है। खाली समय का उपयोग कुछ प्राप्त करने की चाहत व स्वस्थ अर्थपूर्ण रुचियों में किया जा सकता है। हम किताबें पढ़कर, संगीत सीखकर या कुछ और जरुरी काम करके समय बिता सकते हैं। बच्चों साथ खेलना, बगीचों में फूल लगाना या अपने खाली समय में कुछ भी करना सीख सकते हैं। समय को न तो रोका जा सकता है और न ही इस पर किसी का जोर चलता है और न ही समय को वापस लाया जा सकता है। समय शाश्वत एवं सर्वज्ञ है। इस प्रकार हमें समय का महत्त्व समझना चाहिए। अगर हम समय का सही उपयोग कर सकें तो समय ही सफलता की वास्तविक कुंजी है। इसकी कोई सीमा नहीं है लेकिन व्यक्तिगत तौर पर यह बहुत सीमित है। 
हिंदी भाषा का महत्व पर निबंध। Essay on Hindi Bhasha ka Mahatva

हिंदी भाषा का महत्व पर निबंध। Essay on Hindi Bhasha ka Mahatva

हिंदी भाषा का महत्व पर निबंध 

हिंदी भाषा का महत्त्व पर निबंध। Essay on Hindi Bhasha ka Mahatva

किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की अपनी एक भाषा होती है जो उसका गौरव होती है। राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र के स्थायित्व के लिए राष्ट्रभाषा अनिवार्य रूप से होनी चाहिए जो किसी भी राष्ट्र के लिये महत्वपूर्ण होती है। 
निजभाषा उन्नति अहै, सब उन्नति कौ मूल। 

बिनु निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को सूल। 
स्वंत्रता प्राप्ति से पूर्व कांग्रेस ने यह निर्णय लिया था की स्वंत्रता प्राप्ति के बाद भारत की राजभाषा हिंदी होगी। स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने 14 सितम्बर 1949 को ही हिंदी भाषा को भारत संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता दे दी। (राष्ट्र भाषा: हिन्दी पर निबंध पढ़ें

किसी भी भाषा को राष्ट्रभाषा बनने के लिए उसमें सर्वव्यापकता, प्रचुर साहित्य रचना, बनावट की दृष्टि से सरलता और वैज्ञानिकता, सब प्रकार के भावों को प्रकट करने की सामर्थ्य आदि गुण होने अनिवार्य होते हैं। यह सभी गुण हिंदी भाषा में हैं। 

आज भी हिंदी देश के कोने-कोने में बोली जाती है। अहिंदी भाषी भी थोड़ी-बहुत और टूटी-फूटी हिंदी बोल और समझ सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली आदि राज्यों की यह राजभाषा है। पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और अंडमान निकोबार में इसे द्वितीय भाषा का दर्जा दिया गया है। शेष प्रांतों में यदि कोई भाषा संपर्क भाषा के रूप में प्रयोग की जा सकती है तो वह हिंदी ही हो सकती है। विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में हिंदी का पठन-पाठन हो रहा है। परन्तु आज अपने ही देश में हिंदी को तिरस्कृत होना पड़ रहा है। विदेशी मानसिकता के रोग से पीड़ित कुछ लोग आज भी अंग्रेजी के पक्षधर और हिंदी के विरोधी बने हुए हैं। 

ऐसे व्यक्तियों की कमी नहीं जो हिंदी को अच्छी तरह बोलना व लिखना जानते हैं लेकिन वे अपने मिथ्याभिमान का प्रदर्शन अंग्रेजी बोलकर करते हैं, फिर चाहे वो सरकारी व्यक्ति हो या आम आदमी। यद्यपि सरकारी आदेशों में यह प्रचारित है की अपना सभी कामकाज हिंदी में कीजिये लेकिन उन्हें यदि कोई पत्र हिंदी में लिखा जाए तो आपको उसका उत्तर अंग्रेजी में मिलेगा। अन्य देशों के प्रधानमन्त्री या राष्ट्रपति जहाँ भी जाते हैं, अपने ही देश की भाषा बोलते हैं परन्तु हमारे राजनेता अन्य देशों को छोड़िये अपने ही देश में अंग्रेजी में बोलकर अपने अहं की तुष्टि करते हैं। संसद में भी प्रश्न अंग्रेजी में पुछा जाता है तो उसका उत्तर अंग्रेजी में मिलता है। 

यह विवाद रहित सत्य है की व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास अपनी ही भाषा के पठन-पाठन से होता है, अन्य किसी भाषा से नहीं। विदेशी भाषा के माध्यम से पढ़ने के कारण बालक अपने विचारों को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पाता। फलतः उसके व्यक्तित्व का पूर्ण रूप से विकास नहीं हो पाटा है। (अंग्रेजी भाषा के महत्व पर निबंध यहाँ पढ़ें।)

हम सबका कर्तव्य है की हम हिंदी को राष्ट्रभाषा के पद पर आसीन करने के लिए हर संभव प्रयास करें। व्यवहार में हिंदी भाषा का प्रयोग हीनता नहीं गौरव का प्रतीक है। हमारे पूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी पहले भारतीय थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्रसंघ में हिंदी में भाषण देकर सबको चौंका दिया था। उनकी इसके लिए जितनी प्रसंशा की जाए कम है। ऐसे लोग जो अपनी संकीर्ण पृथकवादी भावनाओं का प्रदर्शन कर हिंदी का विरोध करते हैं उन्हें भी राष्ट्रीय सम्मान के लिए अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन कर संकुचित मनोवृत्ति को छोड़कर हिंदी को अपनाना चाहिए।