Sunday, 23 July 2017

Essay on Sparrow in Hindi

Essay on Sparrow in Hindi

Essay on Sparrow in Hindi : गौरैया पर निबंध 

Essay on Sparrow in Hindi

गौरैया आकार में एक छोटा पक्षी है जो दुनिया भर में पाया जाता है। यह बहुत ही फुर्तीला पक्षी होता है जिसका शरीर, भूरे, काले का होता है। यह एक सर्वाहारी पक्षी है जो बीज, जामुन, फल ​​और कीड़े आदि सब-कुछ खाता है। इसका जीवन काल 4-7 साल है। गौरैया बहुत सामाजिक पक्षी होती हैं। वे आमतौर पर छतों, पुलों और पेड़ के खोखले में अपने घोंसले का निर्माण करते हैं। शहरों में तो ये इंसानों के घरों में ही अपना घोसला बना लेते हैं। गौरैया आमतौर पर प्रति घंटे 24 मील प्रति घंटे की गति से उड़ते हैं। 
नर गौरैया और मादा गौरैया दिखने में अलग होते हैं। नर गौरैया की आँखों के पास काला धब्बा पाया जाता है जबकि मादा में नहीं। नर गौरैया दिखने में ज्यादा आकर्षक होते हैं। परन्तु जैसे-जैसे हम पेड़-पौधों को काटते जा रहे हैं उससे गौरैया आज लुप्त होने की कगार पर पहुँच गयी है। अब घरों में न तो गौरैया दिखाई देती है और न ही उसकी चीं-चीं करती आवाज़। आज गौरैया पक्षी को बचाने के लिए तरह-तरह के आयोजन किये जा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए 20 मार्च को हर वर्ष पूरे विश्व में गौरैया दिवस मनाया जाता है। 
पहला विश्व स्पैरो दिवस 20 मार्च, 2010 को विश्व भर में मनाया गया था ताकि घर के गौरैया नाम के  को बचाया जा सके। आज गौरैया को बचाने के लिए लोग अपने-अपने घरों के बाहर लकड़ी के बने घोसले लगा रहे हैं। हमें भी इस कार्य में सहयोग करना चाहिए ताकि गौरैया को लुप्त होने से बचाया जा सके। 
10 lines on rainy season in hindi

10 lines on rainy season in hindi

10 lines on rainy season in hindi

10 lines on rainy season in hindi
  1. मुझे बरसात के मौसम की सबसे अधिक पसंद है।
  2. इसे मानसून के मौसम के रूप में भी जाना जाता है।
  3. यह चारों मौसम में मेरा पसंदीदा और सर्वश्रेष्ठ मौसम है।
  4. जून के महीने में बारिश का मौसम भारत में शुरू होता है,
  5. जब दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाएं उड़ाने लगती हैं।
  6. मानसून जून के मध्य में शुरू होता है, और सितंबर तक जारी रहता है।
  7. वर्षा ऋतू में पेड़ पौधों में हरे पत्ते आते हैं और हरियाली छा जाती है।
  8. हिंदू कैलेंडर के अनुसार ये मौसम आषाढ़ और श्रावण के महीनों में महसूस होता है।
  9. वर्षा ऋतू में सभी अपने-अपने घरों से प्रायः रेनकोट और छाता लेकर निकलते हैं.
  10. सभी सूखे तालाब और पोखर बारिश के  भर जाते हैं।
  11. गरजते ,बरसते बादलो क़ो देखकर किसानों के मुख पर हँसी छा जाती है।
  12. मानसून के दौरान तापमान बहुत ही सुखद रहा है।
  13. वर्षा ऋतू हमें सूरज की गर्मी से राहत देती हैं 
  14. सभी जीवित चीजों को बरसात के पानी में गीला करके बरसात के मौसम का आनंद मिलता है।


10 lines on Akbar in Hindi

10 lines on Akbar in Hindi

10 lines on Akbar in Hindi

10 lines on Akbar in Hindi

  1. अकबर सभी मुग़ल सम्राटों में सबसे महान शासक था। परन्तु उसे पढ़ना-लिखना नहीं आता था। 
  2. अकबर की माता का नाम हमीदाबानू बेगम तथा पिता का नाम हुमायूं था ।
  3. जब अकबर गद्दी पर बैठा तब उसकी उम्र मात्र 13 वर्ष थी। 
  4. उसने पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू को पराजित किया और दिल्ली पर अधिकार कर लिया। 
  5. अकबर सभी धर्मों का सम्मान करता था। उसने दीन-ए-इलाही नामक धर्म शुरू किया। 
  6. वह विद्वानों का बहुत सम्मान करता था। इसीलिए उसके दरबार में नवरत्न नियुक्त किये। 
  7. उसने लगभग संपूर्ण भारत को अपने युद्ध कौशल और कुशल नेतृत्व से जीत लिया। 
  8. अकबर का विवाह जोधाबाई से हुआ। उसके पुत्र का नाम जहांगीर था। 
  9. उसने फतेहपुर सीकरी, जोधाबाई का महल, पंचमहल, आगरे का किला आदि का निर्माण करवाया 
  10. अकबर ने सती प्रथा, बाल विवाह, मद्यपान जैसी कुरीतियों पर रोक लगाई। 
  11. 27 अक्‍टूबर 1605 ई ० को भारत के इस महान सम्राट की मृत्यु हो गई। 


Saturday, 22 July 2017

मोर पर निबंध essay on peacock in hindi

मोर पर निबंध essay on peacock in hindi

मोर पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4 के लिए

essay on peacock in hindi

मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। इनको मयूर भी कहा जाता हैं। मोर दिखने में बहुत ही आकर्षक होते हैं। ये भारत में लगभग सभी जगह पाए जाते हैं। मोर चमकीले हरे-नीले रंग के होते हैं। इनकी गर्दन नीले रंग की तथा बहुत ही लम्बी होती है। इसके पंख लंबे हैं व रंगीन होते हैं जिन पर हरे, नीले, पीले और सुनहरे रंगों के चांद जैसे स्पॉट होते हैं। इनके पैर बहुत लम्बे होते हैं। इनके सर पर एक कलगी होती है जिसके कारण इन्हें पक्षियों का राजा भी कहा जाता है। इनकी उम्र लगभग 10 से 25 वर्ष तक की होती है। इनके पंख बहुत ही बड़े होते हैं जिससे इनकी लम्बाई लगभग 1 मीटर से भी ज्यादा हो जाती हैं। मोर बादलों को बहुत पसंद करता है। यह बरसात के मौसम में नृत्य करता है। जब मोर नृत्य के लिए अपने पर फैलाता है, तो यह एक रंगीन पंखे की तरह दिखाई देती है। वहीँ दूसरी ओर मोरनी इतनी आकर्षक नहीं होती। यह आकार में मोर से छोटी होती है। मोरनी का रंग भूरा होता है। इसके पैर बदसूरत होते हैं। मोर अपने भोजन के लिए खाद्यान्नों और कीड़ों पर निर्भर रहता है। मयूर खेतों और बगीचों में पाए जाते हैं वे अनाज खाते हैं।  वे किसानों के दोस्त और कीड़े के दुश्मन हैं। मोर सांप का भी शिकार कर लेते हैं। 
मोर भारत के विभिन्न जगहों पर पाए जाते हैं जैसे उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान आदि। परन्तु आज मोर लुप्त होने की कगार पे हैं। एक ओर जहां इनकी सुंदरता के लिए इनको सराहा गया वहीँ दूसरी ओर  इनका शिकार भी  किया गया। मोर के संरक्षण के लिए सरकार ने विभिन्न नेशनल पार्क बनाये हैं परन्तु इनके संरक्षण के लिए अभी बहुत-कुछ किया जाना बाकी है। 

Friday, 21 July 2017

बंदर पर निबंध essay on monkey in hindi

बंदर पर निबंध essay on monkey in hindi

बंदर पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4 के लिए

बंदर पर निबंध

बंदर शरारती और बहुत बुद्धिमान जानवर है। ये नकल करने की कला में बहुत माहिर होते हैं। इसमें मनुष्यों की तरह भावनाएं पायी जाती हैं। एक सामान्य बन्दर लगभग 15 से 35 वर्ष तक जीता है। यह एक पारिवारिक जीव है जो झुण्ड में रहता है। इनके झुण्ड का एक मुखिया भी होता है। यह विभिन्न आकार-प्रकार व रंगों में पाए जाते हैं। बन्दर एक चौपाया जानवर होता है। यह अपने अगले पंजो का उपयोग हाथ की तरह करता है क्योंकि यह हाथ खाने, खेलने और उसके बच्चों की देखभाल करने के लिए है। बंदर के आहार में अखरोट, बेरी और फल शामिल हैं इसका पसंदीदा फल केले है। यह जंगल में रहता है और इसे एक पेड़ से दुसरे पेड़ तक कूदते रहना पसंद है। बन्दर को मनुष्य का सबसे करीबी रिश्तेदार भी माना जाता है। ऐसा माना जाता है की पहले मनुष्य भी ऐसा ही दिखता था। यह नक़ल उतारने की कला में बहुत ही माहिर होते हैं इसलिए इन्हें बड़ी ही आसानी से प्रशिक्षित किया जा सकता है। सड़क पर मदारी भी इसी प्रकार इन्हें प्रशिक्षित करके सबका मनोरंजन करते हैं। 
10 lines about raksha bandhan in hindi

10 lines about raksha bandhan in hindi

10 lines about raksha bandhan in hindi

10 lines about raksha bandhan in hindi

  1. रक्षाबंधन हुन्दुओं का एक एक प्रमुख त्यौहार है। 
  2. यह त्यौहार भाई-बहन के परस्पर प्रेम का प्रतीक है। 
  3. इस दिन बहिन भाईओं को एक रक्षा सूत्र बांधती है। 
  4. प्रत्येक भाई बहनों को हर स्थिति में रक्षा देने का वचन देते है 
  5. इस दी लोग अपने घरों को स्वच्छ रखते है 
  6. सभी घरों में स्वादिष्ट पकवान और मिष्ठान बनाये जाते हैं 
  7. पूजा के समय सभी भाई-बहन सुन्दर और नए वस्त्र पहनते हैं। 
  8. रक्षासूत्र बाँधने पर प्रायः भाई बहनों को उपहार देते हैं। 
  9. यह भारत के संस्कृति और परम्परा का एक प्रतीक है 
  10. इस त्यौहार को हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी धर्म के लोग मिल कर बनाते हैं। 
रक्षाबंधन पर पत्र यहाँ देखें। 

Tuesday, 18 July 2017

वर्षा ऋतु पर निबंध Hindi Essay on Rainy Season

वर्षा ऋतु पर निबंध Hindi Essay on Rainy Season

वर्षा ऋतु पर निबंध - Hindi Essay on Rainy Season 

वर्षा ऋतु पर निबंध

प्रस्तावना : हमारा भारतवर्ष ऋतुओं का देश है। यहाँ पर प्रत्येक ऋतु अपनी प्राकृतिक शोभा के साथ आती। है अपने सौंदर्य के छठा को चरों और फैला देती है। यद्यपि सभी ऋतुओं की अपनी-अपनी विशेषताएं और महत्त्व है , किन्तु अपने मनोरम दृश्य तथा विविध उपयोगिता के कारण वर्षा ऋतु का अपना विशेष महत्त्व है।

वर्षा के पूर्व की दशा : वर्षा के आने से पूर्व ग्रीष्म की भयंकर गर्मी से धरती  तवे के समान तपने लगती है। ग्रीष्म की लपट भूमि -कण  कण को झुलसा देती है। पेड़-पौधे आदि  वनस्पतियां सूख जाती हैं। पशु-पक्षी भी व्याकुल होकर पानी के लिए तड़पने लगते हैं। भयंकर गर्मी से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और  सभी लोग दुखी होकर अपनी तपन को को शांत करने के लिए वर्षा की प्रतीक्षा में आकाश की और दृस्टि लगाए रहते हैं।

वर्षा का वर्णन : आषाढ़ मॉस के प्रारम्भ होते ही आकाश में बादल दिखाई देने लगते हैं। दिनों-दिन आकाश मंडल में काले बादल छाते ही चले जाते है। और वर्षा की बूँदें धीरे-धीरे गिरने लगती है ,जिसको देखकर पशु-पक्षी आनंदित होकर क्रीड़ाएं करने लगते हैं।  वर्षा के पड़ते ही सारी पृथ्वी , आकाश और अंतरिक्ष का दृश्य  है। जैसे ही पृथ्वी पर बूँदें पड़ने लगती है वैसे ही पृथ्वी से अद्भुत भीनी-भीनी सुगंध उठने लगती है। वृक्षों में नया जीवन आ जाता है और वे हरे-भरे हो जाते हैं। पक्षी गण कलरव करने लगते हैं। इस प्रकार वर्षा के आगमन से  वातावरण ही बदल जाता हैं।

वर्षा का दृश्य : पृथ्वी को मनोरम और अलौकि रूप को देखकर बादल भी उसकी औ आकर्षित होकर प्रेमी नायक की भांति झुकते ही चले आते हैं। और रसमय होकर उसे सरस बना देतें हैं। महाकवि तुलसीदास को उनके नमन में नम्रता दिखलाई देती है  कि -
वरषहिं जल्द भूमि नियराये, जथा नवहिं बुध विद्या पाए। 
वर्षा काल में बादल आकाश में इधर-उधर दौड़ते हुए दिखाई देते हैं। वर्षा में स्त्रियां भी आनंदित होकर झूले के गीत और मल्हारों को जाती हुई बागों में झूला झूलते दिखाई देती हैं।  

वर्षा ऋतु से लाभ : वर्षा के आगमन से हमारा मन और शरीर प्रसन्न हो जाता है। वर्षा के अनेक लाभ हैं। वर्षा के बिना कृषि करना संभव नहीं है। वर्षा होने पर ही खेतों में अन्न उत्पन्न होता  है। वर्षा से धान आदि चारे की उत्पत्ति होती है और उससे उपयोगी पशुओं का पालन होता है। नदियों में जल आ जाने से सिंचाई के लिए जल की पूर्ती संभव हो पाती है। वर्षा से सूखे पेड़-पौधों में भी जीवन आ जाता है। और वे अपनी पूरी गति से बढ़ने लगते हैं। इस प्रकार वर्षा से ईधन और चारे की भी सुविधा रहती है। 

वर्षा ऋतु से हानि : एक और वर्षा का यह रूप इतना मनोरम और लाभदायक है तो इसका दूसरा रूप अति भयानक और संहारक भी है। अतिवृष्टि होने से नदी-नाले, तालाब अपनी सीमाओं को तोड़ देते हैं। चारों ओर जल ही जल दिखाई पड़ता है। बड़े-बड़े पेड़ पानी में बह जाते हैं। खड़ी हुई फसल बर्बाद हो जाती है। सैंकड़ों गाँव बाढ़ की चपेट में आकर अपना अस्तित्व खो बैठते हैं। सड़क, रेल-लाइनें और पुल सभी इससे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। मनुष्य या पशु-पक्षी जो भी इसकी चपेट में आ जाता है उसका बस भगवान् ही मालिक है। बाढ़ से होने वाली अपार धन-जन की क्षति हमारे ह्रदय को दहला देती है। और इससे हैजा, मलेरिआ आदि अनेक रोग फैलने लगते हैं। 

उपसंहार : इतना सब-कुछ होने पर भी वर्षा हमारे लिए अत्यंत लाभदायक है। वर्षा के बिना किसी प्रकार के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यह मन को आनंदित करती है और जीवन को प्राण देती है। ाटन वर्षा सभी ऋतुओं में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। 

निबंध पसंद आया हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में बताएं। 

Monday, 17 July 2017

पिता द्वारा पुत्र को समय के सदुपयोग पर पत्र

पिता द्वारा पुत्र को समय के सदुपयोग पर पत्र

पिता द्वारा पुत्र को समय के सदुपयोग पर पत्र

पिता द्वारा पुत्र को पत्र

प्रशांत
29/623
नोएडा ( उत्तर प्रदेश )
13 अगस्त 2017

प्रिय राहुल
बहुत-बहुत स्नेह !
                     आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होंगे। पिछले शनिवार को ही तुम्हारा पत्र मिला था। यह जानकार बहुत प्रसन्नता हुई की तुम्हारा मन छात्रावास में लग रहा है। कल तुम्हारे छात्रावास-अधीक्षक से बात हुई थी। पता चला की तुम इधर-उधर घूमने में बहुत रूचि लेते हो।
                      बेटे ! हमने तुम्हे छात्रावास में इस आशा और विश्वास के साथ भेजा है की तुम खूब ध्यान से पढोगे। जब से तुम्हारी माँ ने यह सुना है की तुम ठीक से पढ़ाई न करके मित्रों के साथ घुमते रहते हो, तब से वह बहुत अधिक चिंतित रहने लगी है। तुम अपनी माँ को जानते हो। वह बहुत अधिक चिंता करती है। तुम पढाई में मन लगाओ और माँ को पत्र लिखकर विशवास दिलाओ की तुम्हे पढ़ाई की पूरी चिंता है
तुम्हारा शुभचिंतक पिता
प्रशांत  
विशेषण और उसके भेद Adjective in Hindi

विशेषण और उसके भेद Adjective in Hindi

विशेषण और उसके भेद ( Adjective in Hindi )

Adjective in Hindi 
विशेषण: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं जैसे गुण, दोष, संख्या, परिमाण आदि। उन्हें विशेषण कहते हैं। मतलब कोई भी शब्द अगर किसी व्यक्ति या वस्तु या प्राणी की विशेषता बता रहा है तो उसे विशेषण कहा जाएगा। 

विशेष्य: जिन संज्ञा या सर्वनाम शब्दों की विशेषता बतायी जा रही हो उन्हें विशेष्य कहते हैं। 
जैसे- विद्वान् अध्यापक। यहाँ विद्वान शब्द अध्यापक की विशेषता बता रहा है इसलिए विद्वान् शब्द विशेषण हैं। दूसरी तरफ अगर हम देखें तो यहाँ विशेषता अध्यापक की बतायी जा रही है इसलिए अध्यापक विशेष्य है। 

विशेषण के भेद : विशेषण के मुख्यतः चार भेद बताये गए हैं। 

  1. गुणवाचक विशेषण 
  2. परिमाणवाचक विशेषण 
  3. संख्यावाचक विशेषण 
  4. सार्वनामिक विशेषण 
गुणवाचक विशेषण: वे विशेषण जो अपने विशेष्य (संज्ञा या सर्वनाम) के गुणों की विशेषता बताते हैं, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं। अब देखते हैं की गुणों से क्या मतलब हैं। गुण का मतलब जैसे किसी व्यक्ति का रूप, आकार, रंग, स्वाभाव, अवस्था आदि से है। ये कई प्रकार के होते हैं। नीचे उनके नाम दिए गए हैं। 
गुण बोधक, दोष बोधक, रंग बोधक, स्थान बोधक, आकार बोधक, दिशा बोधक, अवस्था बोधक, आयु बोधक, गंध बोधक आदि। जैसे: 
  • पुराना फर्नीचर बेच देना। 
  • चटपटा समोसा खाना चाहिए। 
  • ठंडा पानी पीना चाहिए। 
पहले वाक्य में पुराना दूसरे में चटपटा और तीसरे वाक्य में ठंडा शब्द गुणवाचक विशेषण हैं क्योंकि ये शब्द क्रमशः फर्नीचर, समोसा और पानी की विशेषता बता रहे हैं। 

परिमाणवाचक विशेषण : वे विशेषण जो अपने विशेष्य (संज्ञा या सर्वनाम) की मात्रा या परिमाण के विषय में ज्ञान कराएं, उन्हें परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। परिमाण या मात्रा से मतलब किसी वस्तु के वजन नापतौल आदि से हैं। ये मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। 
1- निश्चित परिमाण वाचक : निश्चित परिमाणवाचक विशेषण किसी संज्ञा या सर्वनाम के निश्चित परिमाण का बोध करते हैं।  जैसे -
  • पांच किलो चावल खरीद लिया है। 
  • कोट के लिए तीन मीटर कपड़ा चाहिए। 
  • एक एकड़ जमीन खरीद लो। 
ऊपर दिए गए वाक्यों में पांच किलो, तीन मीटर और एक एकड़ परिमाण ( मात्रा या नापतौल) का बोध करा रहे हैं इसलिए ये सभी निश्चित परिमाणवाचक विशेषण हैं। 

2- अनिश्चित परिमाण वाचक  : जिन विशेषण शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम के निश्चित परिमाण का  हो उन्हें अनिश्चित परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। जैसे -
  • चाय के लिए थोड़ी चीनी बचा लो। 
  • बहुत दिनों बाद मिले। 
  • कुछ आता और ले लो। 
  • मै ज्यादा मीठा नहीं खाता। 
ऊपर दिए गए वाक्यों में थोड़ी, बहुत, कुछ और ज्यादा आदि शब्दों  मात्रा का तो बोध हो रहा है पर यह नहीं पता चल पा रहा है की कितनी।  इसलिए ये सभी शब्द अनिश्चित परिमाण वाचक विशेषण हैं। 

संख्या वाचक विशेषण : जो विशेषण शब्द की प्राणी, व्यक्ति या वस्तु की संख्या से सम्बंधित विशेषता का बोध करते हैं उन्हें संख्या वाचक विशेषण कहते हैं। जैसे 
  • मंदिर में दो पुजारी हैं। 
  • कक्षा में पचास छात्र हैं। 
  • उसने तीन दर्जन आम खरीद लिए। 
  • अभिषेक दौड़ में प्रथम आया। 
इन सभी वाक्यों में दो, पचास, तीन दर्जन और प्रथम संख्या वाचक विशेषण हैं क्योंकि ये सभी क्रमशः पुजारी, छात्र, आम और अभिषेक की संख्या सम्बन्धी विशेषता बता रहे हैं। 

सार्वनामिक विशेषण : जो सर्वनाम अपने सार्वनामिक रूप में ही संज्ञा के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें सार्वनामिक विशेषण कहते हैं। ये चार प्रकार के होते हैं। 

(1) संकेतवाचक या निश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण : यह,वह इस,उस आदि संकेत वाचक या निश्चय वाचक सर्वनामों के उदहारण हैं। जब ये शब्द संज्ञा शब्दों की विशेषता बताते हैं तब निश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण कहलाते हैं। जैसे :
  • इस उपन्यास को जरूर पढ़िए। 
  • उस कुर्सी को यहाँ ले आइये। 
  • वह लड़की वहां चली गयी। 
  • क्या यह कलम तुम्हारा है। 

(2)अनिश्चयवाचक सार्वनामिक विशेषण: जहाँ अनिश्चयवाचक सर्वनाम - कोई और कुछ विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं। जैसे :
  • कोई कवि आया है। 
  • कुछ मित्र मेरे घर आने वाले हैं।  
(3) प्रश्नवाचक सार्वनामिक विशेषण : कौन, क्या, किस आदि शब्दों का प्रयोग विशेषण के रूप में होता है। जैसे : 
  • कौन सी साइकिल तुम्हे चाहिए ?
  • तुम्हे क्या पसंद है ?
  • कौन जा रहा है ?
  • किस अध्यापक से मिलने जाना है ?
(4) सम्बन्ध वाचक सार्वनामिक विशेषण :  सम्बन्ध सर्वनामों जैसे- मेरा, हमारा, तेरा, तुम्हारा, इसका, उसका, जिसका और उनका आदि का प्रयोग विशेषण के रूप में किया जाता है। जैसे:
  • मेरा भाई घर पहुँच गया है। 
  • उनकी कमीज बहुत सुन्दर है। 
  • तुम्हारा सूट सील गया है। 
  • जिसका फ़ुटबाल हो, आकर ले जाए। 
अगर आपको पोस्ट पसंद आयी हो तो कमेंट कर दें। 

Friday, 14 July 2017

हिंदी कहानी कठपुतली का नाच

हिंदी कहानी कठपुतली का नाच

हिंदी कहानी कठपुतली का नाच

हिंदी कहानी कठपुतली का नाच

छतरपुर में  एक ठाकुर रहा करते थे जिनका नाम था रणवीर सिंह। उनकी उदारता के किस्से दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे। उन के दीवान करम चन्द उनसे भी दो हाथ आगे थे चारों तरफ उनकी चतुराई और ज्ञान का बोलबाला था। छत्रपुर के सारे काम-काज दीवान जी ही देखते थे। उनके होते हुए ठाकुर रणवीर सिंह को किसी भी तरह की फ़िक्र नहीं था। रणवीर सिंह भी दीवान जी का बहुत सम्मान करते थे और हर बात में उनकी सलाह जरूर लेते थे। रियासत बहुत बड़ी थी इस लिये दीवानजी को जगह-जगह घूमना फिरना पड़ता था। इसलिए दीवान जी का वेतन भी काफी ज्यादा था। सारी जनता दीवानजी को बहुत मान देती थी सिवाय ठाकुर साहब के नौकर सुन्दर के। सुन्दर को हमेशा इसी बात का अफ़सोस रहता था की सेवा तो वो भी ठाकुर साहब की बहुत करता है फिर उसे उतना सम्मान क्यों नहीं मिलता। यही बात हमेशा उसको परेशान करती थी। एक दिन ठाकुर साहिब अपनी रियासत का दौरा करने निकले। सुन्दर भी उनके साथ था। अकेले में मौका पाकर सुन्दर ने अपने मन की बात ठाकुर साहिब से कह दी और विनती की कि उसको भी दीवानजी के जितना ही वेतन मिलना चाहिए। रणवीर सिंह ने सुन्दर की बात बहुत ध्यान से सुनी और कहा कि “तुम ठीक कहते हो सुन्दर, हम घर जाकर तुम्हारी बात पर विचार करेंगे ”।
इतने में कुछ शोर-गुल की आवाज़ सुनाई पड़ी। ठाकुर साहिब ने सुन्दर को कहा कि वो जाकर देखे कि शोर कैसा है। सुन्दर भागता हुआ वहाँ गया और वापस आकर बताया कि वो बंजारे हैं।
“वो तो ठीक है, मगर वो कहाँ से आए हैं”, ठाकुर साहिब ने फिर पूछा।
सुन्दर फिर भाग कर वहां गया और आकर बोला कि वो राजस्थान से आए हैं।
“वो कौन लोग हैं और करते क्या हैं , जरा पता तो करो ”, ठाकुर साहिब ने फिर पूछा।
सुन्दर फिर भाग कर वहां गया और आकर बताया कि वो कठपुतली वाले हैं।
“पर वो यहाँ क्या करने आएँ हैं”, ठाकुर साहिब ने फिर प्रश्न किया।
सुन्दर फिर भाग कर गया और आकर बताया कि वो यहाँ कठपुतली का नाच दिखाने आए हैं।
“सुन्दर, जाकर पता तो करो कि क्या ये लोग आज रात हमको कठपुतली का नाच दिखाएँगे ?” सुन्दर फिर भागा गया और आकर बताया कि वो लोग आज रात को पुतली का नाच दिखाएँगे।
सुन्दर अब तक थक कर चूर हो चूका था उसकी समझ में नहीं आ रहा था की इन छोटी-छोटी बातों के लिए ठाकुर साहब उसे बार-बार क्यों परेशां कर रहे हैं। इतने में दीवनजी आये और ठाकुर साहिब ने उनसे भी यही सवाल किया कि वो जाकर देखें कि शोर कैसा है। दीवानजी गए और थोड़ी देर में आकर बताया कि ये लोग राजस्थान के बंजारे हैं और कठपुतली का नाच कराते हैं। सुना है कि ये लोग अपने काम में बहुत माहिर हैं, इसी लिए मैंने इनसे कहा है कि आज रात को ये यहाँ पर आपको अपनी कला का प्रदर्शन दिखाएँ।

सुन्दर ये सब बड़े गौर से देख रहा था। इस से पहले कि ठाकुर साहिब कुछ कह पाते  उसको अपनी गलती का एहसास हो गया। वो हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया और बोला, “अन्नदाता आज आपने मेरी आँखें खोल दी। मैं जहाँ भी हूँ और जैसा भी हूँ ठीक हूँ। मैंने बिना किसी कारण दीवान जी के बारे में गलत सोचा और उनसे मन ही मन ईर्ष्या रखने लगा मुझे माफ़ कर दीजिये। 
सुन्दर को अब समझ आ गया था की व्यक्ति की पहचान उसके गुणों से होती है। 

Thursday, 13 July 2017

व्यापारिक पत्र ( vyaparik patra )

व्यापारिक पत्र ( vyaparik patra )

नरेश शुक्ला
3/11 , सेक्टर ६२
नोएडा -201309
दिनांक 12/05/20XX 

विषय : व्यापार के सम्बन्ध में। ( व्यापारिक पत्र )

व्यापारिक पत्र

नरेश शुक्ला जी ,
                       मेरा नाम आकाश है और मै आपको एक व्यापारिक प्रस्ताव देना चाहता हूँ। हाल ही में मैंने सुना की आप अपना रेस्टोरेंट बेचना चाहते हैं। मेरे पहले ही दिल्ली में 3 रेस्टोरेंट हैं। यदि आप की सहमति हो तो मैं आपका रेस्टोरेंट को खरीदने का इच्छुक हूँ। 
किसी समय आपका रेस्टोरेंट बहुत ही सफल हुआ करता था परन्तु हाल के दिनों में यह नुक्सान में जा रहा है। 
मैं आपसे यह रेस्टोरेंट खरीदना चाहता हूँ जिससे मैं फिर से इसे सफलता की ऊंचाइयों पर ले जा सकूं। मैं जानता हूँ की ये रेस्टोरेंट आपके दिल के बहुत करीब है इसीलिए मैं आपसे इस रेस्टोरेंट को बहुत ही जायज़ कीमत पर खरीदना चाहता हूँ। यदि आप भी इसे बेचने के इच्छुक हों तो हम मिलकर कीमत की बात कर सकते हैं। 
आपके जवाब की प्रतीक्षा में 
आकाश मिश्रा 

Wednesday, 12 July 2017

राखी मिलने पर बहन को पत्र

राखी मिलने पर बहन को पत्र

राखी मिलने पर बहन को पत्र

राखी मिलने पर भाई बहन को पत्र

प्रिय बहन निहारिका
सस्नेह स्मरण।
                   आज रक्षाबंधन का पर्व है। इस पावन पर्व पर तुम्हारी भेजी हुई राखी बांधकर बहुत प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ और इस राखी का तार-तार मेरे हृदय में चित्रित हो गया है। मै उस परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूँ की वह मेरी छोटी बहन को दीर्घायु प्रदान करे और उसका जीवन सभी सुख सुविधाओं से परिपूर्ण हो जाए। मै आशा करता हूँ की मैं इस छोटी बहन के सुख दुःख से क्षणों में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकूंगा। घर में सबको मेरा प्यार देना।
शेष कुशल है।
तुम्हारा भाई 
आकाश 


रक्षाबंधन के पर्व पर भाई को पत्र

11 ,कृष्णापुरम 
लखनऊ 201117 
जनवरी-07-2017 
प्रिय भाई धीरेन्द्र 
                      आशा करती हूँ की तुम वहां बहुत अच्छे होंगे। रक्षाबंधन का पर्व आने वाला है। हमें ज्ञात है की इस वर्ष भी तुम घर नहीं आ पाओगे। इसीलिए मै तुम्हे और तुम्हारे सैनिक भाईओं को रक्षाबंधन की राखी भेज रही हूँ।
घर पर माता-पिता सदैव तुम्हारी प्रतीक्षा करते रहते है और तुम्हारी मंगलकामना करते हैं। ईश्वर तुम्हे दीर्घायु प्रदान करे और तुम इसी प्रकार अपने कर्तव्यों का पालन करते रहो। 
घर के सभी सदस्यों की ओर से ढेर सारा प्यार।
तुम्हारी बहन 
निहारिका 

Tuesday, 11 July 2017

सच्चा प्रेम लोककथा

सच्चा प्रेम लोककथा


स्वीडन की लोक-कथा:सच्चा प्रेम 
सच्चा प्रेम लोककथा

स्वीडन की यह लोक कथा, मूलतः डेनिश प्रेमी जोड़े को लेकर कही गई है ! कहानी का नायक आरिल्ड एक बहुत ही संपन्न और कुलीन डेनिश परिवार का इकलौता लड़का है। वो डेनिश नौसेना में काम करता है और अपने बचपन की मित्र से प्रेम करता था जिसका नाम था थाले। बात उन दिनों की है जब स्वीडन और डेनमार्क दोनों पड़ोसी देशों के मध्य शांतिपूर्ण सम्बन्ध हुआ करते थे। स्वीडन के राजा एरिक के राज्याभिषेक में पड़ोसी देश डेनमार्क के लोगों को भी बुलाया गया जिसमे आरिल्ड भी शामिल हुआ। कालांतर में, किसी कारणवश, स्वीडन और डेनमार्क में युद्ध की स्थितियां पैदा हो गयी और आरिल्ड को एक युद्धबंदी के तौर पर स्वीडन में कैद कर लिया गया।आरिल्ड की प्रेमिका थाले ने उसे पत्र लिख कर सूचित किया कि, उसके पिता ने, उसके विरोध के बावजूद, उसका विवाह, किसी और व्यक्ति से तय कर दिया है और विवाह की तिथि भी पक्की हो गयी है , क्योंकि उसके पिता का मानना था की आरिल्ड अब कभी भी वतन वापस नहीं पायेगा।जब आरिल्ड को  कैदखाने में अपनी प्रेमिका का पत्र मिला तो वह भावुक हो गया और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। जेल की कोठरी की धुंधली रौशनी में पत्र को ढीले हाथों से थामे हुए, वो युद्ध की क्रूरता और उसका भयावह परिणाम के रूप में अपना जीवन तबाह होते देख रहा था। उसने अपनी प्रेमिका को वचन दिया था की वह सिर्फ उससे ही विवाह करेगा और बिना उसकी आजादी के ऐसा संभव नहीं था। लड़खड़ाते हुए क़दमों से वो उठा और उसने स्वीडन के राजा एरिक को पत्र लिखा, महामहिम , आपको स्मरण होगा कि आपके राज्याभिषेक के समय मैं  भी  आपके समारोह में सम्मिलित हुआ था और आज आपके ही राज्य में मैं एक बंदी के रूप में कैद हूँ। राज्याभिषेक के दिन आपने मुझे अपना मित्र माना था, इसलिए मैं आपसे विनती करता हूं की आप मुझे मेरी प्रेमिका से विवाह करने के लिए मुक्त करने की कृपा करें ! मैं आपको वचन देता हूं कि मैंअपनी रोपणी की पहली फसल कटते ही आपकी कैद में वापस जाऊंगा। राजा एरिक को आरिल्ड पर दया गयी और उन्होंने उसके वचन पर विश्वास करते हुए उसे एक फसल की समयावधि के लिए , कैद मुक्त करने के आदेश दे दिये ! डेनमार्क पहुंचने पर आरिल्ड ने अपनी प्रेमिका थाले से विवाह कर लिया। सभी बहुत खुश थे  किन्तु थाले के पिता इस बात से खुश नहीं थे की फसल कटने के बाद आरिल्ड को फिर से  कैद में जाना पड़ेगा, हालांकि उनके विरोध के बावजूद उन्होंने प्रेमी युगल का ब्याह खुशीपूर्वक हो गया। आरिल्ड को पता था कि, पहली फसल कटते ही, उसे राजा एरिक की कैद में वापस जाना पड़ेगा, अतः उसने सोच विचार कर, एक विशाल भूक्षेत्र में बीजारोपण कर दिया ! बसंत के मौसम के कुछ माह बाद ही, राजा एरिक के दूत आरिल्ड से मिलने आये और, आरिल्ड से कहा, फसल कटाई का मौसम बीत चुका है और हमारे राजा आपकी वापसी का इंतज़ार कर रहे हैं ! इस पर आरिल्ड ने कहा, मेरी फसल अभी कैसे कटेगी ? वो तो अभी तक अंकुरित भी नहीं हुई है
यह सुनकर दूत ने आश्चर्य से पूछा, अंकुरित भी नहीं हुई ? ऐसा क्या रोपा है आपने ? ...
आरिल्ड ने कहा पाइन के पौधे
अपने दूत से यह किस्सा सुनकर, राजा एरिक ने हंसते हुए कहा, कि वो एक योग्य व्यक्ति है, उसे कैद में नहीं रखा जाना चाहिये ! इस तरह से आरिल्ड और थाले हमेशा एक साथ बने रहे ! कहते हैं कि पाइन का एक शानदार जंगल उनके प्रेम की विरासत बतौर आज भी जीवित है !