Friday, 1 June 2018

आवश्यकता अविष्कार की जननी है पर निबंध

आवश्यकता अविष्कार की जननी है पर निबंध

avashyakta avishkar ki janani hai

प्रस्तावना : यह एक लैटिन कहावत है जिस का हिंदी अर्थ “आवश्यकता आविष्कार की जननी है।” लेकिन संत अगसति ने कहा था आवश्यकता कानून नहीं जानती। इसका अर्थ यह है कि जब वैज्ञानिक अनुभव करते हैं कि मनुष्य को निश्चित सुविधा की आवश्यकता है, तो वे आवश्यकता को पूरा करने के लिए आविष्कार के प्रयत्न करते हैं। यह सामाजिक कानूनों और अवधारणाओं से होकर गुजरती है।

मनुष्य और आविष्कार : संसार के आरंभ से ही मनुष्य ने अपनी सुरक्षा के लिए वस्तुएं विकसित की हैं। सुरक्षा के लिए ही नहीं अपितु आवश्यकता, आराम और विलासिता के लिए भी वस्तुओं का आविष्कार किया है। आग उस का सर्वप्रथम आविष्कार है। इसका उपयोग जानवरों से रक्षा, ठंड से रक्षा और खाना बनाने में हुआ था। आविष्कारों का एक लंबा इतिहास है। जब भेड़ से तैयार किया हुआ कपड़ा उसकी त्वचा को पर्याप्त ना होता, तो वे ठंडे वस्त्र चाहते थे। इसी कारण कपास का आविष्कार हुआ। मांस के बाद मनुष्य ने प्रकृति द्वारा प्रदत्त अनाज का आविष्कार किया और खेती प्रारम्भ की।

मानव की महत्वाकांक्षी प्रकृति : मानव मात्र खाने, कपड़े और घर के लिए जीवित नहीं रहता है। मानव महत्वाकांक्षी प्रकृति का होता है। उसके पास भावनाएं होती हैं। वह उस चीज के विरुद्ध लड़ता है, जो उसके विरुद्ध आवाज उठाती है। यह मुख्य बातें मनुष्य को पृथ्वी का सबसे अलग प्राणी बनाती हैं। हमारे पूर्वजों ने अनेक औषधियों तथा विभिन्न रोगों का उपचार निकाला था। सैकड़ों उपकरण मानव जीवन को सुखमय बनाने के लिए अविष्कारित किए गए। उसने न्यूक्लियर बम मिसाइल उपग्रह विकसित की है।

उपसंहार : मानव ने संचार के साधनों का आविष्कार किया। सैकड़ों वर्षो से वह कठिन परिश्रम का मानसिक एवं शारीरिक दबाव झेलता रहा इसलिए उसने रोबोट का आविष्कार किया। मनुष्य मशीन नहीं है उसके पास भावनाएं हैं इसलिए उसने चलचित्र, सिनेमा, टेलीविजन और गेम्स बनाए। अब उसकी महत्वकांक्षा अंतरिक्ष के अवरोध को तोड़ने की है। अब वह अंतरिक्ष के अन्य ग्रहों पर शासन करना चाहता है। उसने अपने कुछ उपग्रह मंगल ग्रह पर भेज दिए हैं।

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