Thursday, 31 May 2018

ख़ुशी पर निबंध। Essay on Happiness in Hindi

ख़ुशी पर निबंध। Essay on Happiness in Hindi 

Essay on Happiness in Hindi


परिचय : हमें जीवन में खुश रहने का प्रयत्न करना चाहिए। वे लोग अक्सर बेचैन और असंतुष्ट रहते हैं जिनके भीतर आंतरिक प्रसन्नता नहीं होती। यह विचार करना गलत है कि धन प्रसन्नता लाता है। धनवान हमेशा प्रसन्न नहीं रहते। इसलिए धन प्रसन्नता का स्रोत नहीं है। लेकिन वह व्यक्ति जो अपने जीवन में संतुष्ट है, चाहे वह गरीब ही क्यों ना हो प्रसन्न रह सकता है।

अच्छा स्वास्थ्य : कुछ बाहरी शर्ते होती हैं, जिससे हम खुश रह सकते हैं। सर्वप्रथम अच्छा स्वास्थ्य प्रसन्नता के लिए आवश्यक है। वह व्यक्ति जो किसी भी रोग से पीड़ित है, कभी भी खुश नहीं रह सकता। लेकिन कुछ ऐसे रोगी व्यक्ति भी होते हैं जिनके मुख पर हमेशा मुस्कान रहती है। वे लोग बहादुर होते हैं जो शारीरिक समस्या होने पर भी प्रसन्नता ढूंढ लेते हैं। लेकिन प्रत्येक व्यक्ति नायक नहीं है। हमें अच्छे स्वास्थ्य के लिए कुछ विशेष सिद्धांत अपनाने चाहिए जिससे हम खुश रह सके।

कार्य से प्रसन्नता मिलती है : वह व्यक्ति जो कार्य नहीं करता है, प्रसन्न भी नहीं रहता है। ऐसे लोग अपने दिमाग अर्थात मस्तिष्क और समय को नियंत्रित कर पाने में सुस्त होते हैं। सुस्त कार्य करने वाला साधारणतया प्रसन्न रहता है। वह व्यक्ति जो अपने पसंद का कार्य करता है, वह अपने कार्य में ही बड़ी प्रसन्नता ढूंढ लेता है। यदि हमारा कार्य हमारी पसंद के अनुसार नहीं है, तो भी हमें अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी के साथ करना चाहिए।

स्वस्थ मनोरंजन और क्रियाकलाप : हमें अपना अवकाश बिताने के लिए स्वस्थ मनोरंजन करना चाहिए। यह कहावत उचित है “कि सिर्फ काम ही काम वह भी बिना मनोरंजन के मनुष्य को मूर्ख बना देता है।” वह व्यक्ति जो अपना अवकाश उचित ढंग से नहीं बिताता है, खुश नहीं रहता है। खेल, मनोरंजन, संगीत और पुस्तकें हमें आनंदित रखती हैं। सच्ची मित्रता आनंद और मनोरंजन का बहुत ही महत्वपूर्ण खजाना है। वह व्यक्ति भाग्यशाली है, जिसके पास सच्चा मित्र है।

प्रसन्नता का स्रोत : प्रसन्नता हमारी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं रहती है। लेकिन वह सदैव हम पर ही निर्भर रहती है। प्रसन्नता का राज्य तुम्हारे लिए स्वर्ग के राज्य के समान है। एक निर्धन मनुष्य झोपड़ी में भी प्रसन्न रह सकता है, लेकिन एक धनवान मनुष्य महल में भी अप्रसन्न रहते है। प्रत्येक मनुष्य को निस्वार्थी दयालु विनम्र होना चाहिए यही प्रसन्नता का स्रोत है।


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