Thursday, 5 April 2018

मेरा प्रिय खेल कबड्डी पर निबंध। Mera Priya Khel Kabaddi Nibandh

मेरा प्रिय खेल कबड्डी पर निबंध। Mera Priya Khel Kabaddi Nibandh

Mera Priya Khel Kabaddi Nibandh
मानव जीवन में खेलों का विशेष महत्व है। बाल्य जीवन का तो यह विशेष अंग है।इससे बच्चों का शारीरिक विकास तो होता ही है साथ ही मन का भी विकास होता है। खेलों से शरीर में चुस्ती-फुर्ती और ताजगी आती है।इससे बच्चों में आपसी सहयोग, अनुशासन और सहनशीलता की भावना उत्पन्न होती है। 

प्राचीन काल से ही भारत में खेलों की परम्परा रही है। आजकल भारत में अनेक खेल खेले जाते हैं जैसे क्रिकेट, फ़ुटबाल, हॉकी और कब्बडी इत्यादि। मुझे इन सब में सबसे अधिक अपना देशी खेल कब्बडी पसंद है। भारत में यह खेल प्राचीन काल से खेला जाता रहा है। कई राज्यों में तो कबड्डी प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई जाती हैं।
कबड्डी मेरा प्रिय खेल है क्योंकि अन्य खेलों की भाँती इसको खेलने के लिए लम्बे-चौड़े मैदान की आवश्यकता नहीं होती। इसे खेलने के लिए तो बस छोटा सा मैदान ही काफी है और वो भी ना हो तो कोई भी छोटी सी जगह जहां हरी घास, रेत या मिट्टी हो, भी चलेगी। इस खेल को खेलने के लिए कम से कम आठ खिलाड़ी तो होने ही चाहिए तभी इसका असली आनंद आता है परन्तु खिलाड़ी थोड़े कम या ज्यादा हो तो भी इसे खेला जाता है। इन सभी कबड्डी खेलने वाले खिलाड़ियों में चुस्ती-फुर्ती चालाकी और सहयोग की भावना होना आवश्यक है तभी इस खेल को जीता जा सकता है।

कबड्डी खेलने के लिए मैदान के बीचों-बीच एक रेखा खींच दी जाती है जिससे मैदान में दो पाले बन जाते हैं। इस रेखा के दोनों ओर बराबर संख्या में खिलाड़ी खड़े हो जाते हैं। खेल आरम्भ होने पर एक ओर का खिलाड़ी कबड्डी-कबड्डी कहते हुए दूसरी ओर जाता है और श्वास रहने तक दूसरी ओर के खिलाड़ी को छूने की कोशिश करता है। दूसरी ओर के खिलाड़ी भी उसे पकड़ने का प्रयत्न करते हैं। यदि वह पकड़ा गया तो उसे आउट समझा जाता है और वह अलग बैठ जाता है। इसी क्रम से कबड्डी का खेल चलता रहता है। जिस ओर के सभी खिलाड़ी पहले आउट हो जाते हैं वह टीम हार जाती है।

वास्तव में कबड्डी का खेल रोमांच से भरा है और इसे खेलने से शरीर का व्यायाम भी हो जाता है। इसीलिए यह मेरा मनपसंद खेल है। 

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