Saturday, 24 March 2018

हिंदी कहानी घास में गुड़िया। Gudiya ki kahani


हिंदी कहानी घास में गुड़िया। Gudiya ki kahani

Gudiya ki kahani
किसी राज्य में विक्रमसेन नाम का एक राजा था। उसके बारह बेटे थे। जब वे सभी बड़े हो गए, तब राजा ने उनसे कहा -"तुम्हे अपने अपने लिए एक-एक सुयोग्य पत्नी ढूंढकर लानी है। लेकिन जब वह पत्नी एक ही दिन में सूत कातकर कपड़ा बुने, फिर उससे एक कमीज सिलकर दिखाए, तभी मैं उसे बहू के रूप में स्वीकार करूंगा।"

इसके बाद राजा ने अपने बेटों को उनकी पसंद का एक-एक घोड़ा दिया। सभी राजकुमार अपनी-अपनी पत्नी खोजने निकल पड़े। अभी वे कुछ ही दूर गए थे कि उन्होंने आपस में कहा कि वे अपने छोटे भाई को साथ नहीं ले जाएंगे।

ग्यारह भाई अपने छोटे भाई को अकेला छोड़कर चले गए। छोटा राजकुमार रास्ते में सोचने लगा कि वह आगे जाए या लौट जाए। उसका चेहरा उतर गया था। वह घोड़े से उतरकर घास के मैदान पर बैठ गया और जोर से रोने लगा। रोते-रोते अचानक चौंक गया। उसके सामने की घास अचानक हिली और कोई सफेद चीज उसकी ओर आने लगी। जब वह चीज राजकुमार के पास आईतो उसे एक नन्ही-सी लड़की दिखाई दी।

उसने कहा- " मैं छोटी-सी गुड़िया हूँ। यहां घास पर ही रहती हूँ। तुम यहां क्यों आए हो? "राजकुमार ने अपने बड़े भाइयों के बारे में बताया। उसने अपने पिता की शर्त के बारे में भी बताया। फिर उसने गुड़िया से पूछा-" क्या तुम एक दिन में सूत कातकरकपड़ा बुनकर एक कमीज सिल सकती होअगर यह कर दोतो मैं तुमसे शादी कर लूंगा, क्योंकि मैं अपने भाइयों के दुर्व्यवहारों के कारण आगे नहीं जाना चाहता।" 



गुड़िया ने 'हाँकर दी। उसने तुरंत ही उसने सूत काता, कपड़ा बुना और एक छोटी-सी कमीज सिल दी जिसे लेकर राजकुमार महल की ओर चल पड़ा। जब वह महल में पहुंचा तो उसे शर्म आ रही थीक्योंकि कमीज बहुत छोटी थी। फिर भी राजा ने उसे विवाह करने की अनुमति दे दी।



राजकुमार गुड़िया को लेने चल पड़ा। जब वह घास पर बैठी गुड़िया के पास पहुंचातो उसने गुड़िया से घोड़े पर बैठने को कहा। गुड़िया ने कहा- " मैं तो अपने दो चूहों के पीछे चांदी की चम्मच बांधकर उसमें ही बैठकर जाऊंगी।"



राजकुमार ने उसका कहना मान लिया। राजकमार घोड़े पर सवार हो गया। गुड़िया चूहों के पीछे बंधी चांदी की चम्मच पर सवार हो गई। राजकुमार सड़क के एक ओर चलने लगा, क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसके घोड़े का पांव गुड़िया के ऊपर न पड़ जाए। गुड़िया सड़क के जिस ओर चल रही थी, उस ओर एक नदी बह रही थी। अचानक गुड़िया नदी में गिर गई। लेकिन जब वह नदी के अंदर से ऊपर आई, तो राजकुमार के समान बड़ी हो गई थी। राजकुमार बहुत प्रसन्न हुआ।

राजकुमार महल में पहुंचातो उसके सभी बड़े भाई अपनी-अपनी होने वाली पत्नियों के साथ वहां आ चुके थे। लेकिन उसके भाइयों की पत्नियों का न व्यवहार अच्छा था न ही वे सुन्दर थीं। जब उन्होंने अपने भाई की सुन्दर पत्नी को देखातो वे सभी जल-भुन गए। राजा को पता चला कि बड़े पुत्रों ने छोटे राजकुमार के साथ दुर्व्यवहार किया हैतो उसने बड़े बेटों की खूब निंदा की। फिर छोटे बेटे को गद्दी सौंप दी। छोटे राजकुमार का विवाह गुड़िया के साथ धूमधाम से हुआ। अब छोटा राजकुमार राजा था और गुड़िया रानी। दोनों सुख से रहने लगे। 

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