Monday, 5 March 2018

बेरोजगारी की समस्या पर निबंध। Essay on Unemployment in Hindi

बेरोजगारी की समस्या पर निबंध। Essay on Unemployment in Hindi

Essay on Unemployment in Hindi

रोजगार व्यक्ति की आधारभूत आवश्यकता है। ईश्वर ने हमें मस्तिष्क¸ हाथ¸ पांव दिमाग की अनेक शक्तियां¸ ह्रदय और भावना प्रदान की है जिससे कि उनका पूर्ण सदुपयोग किया जा सके और मनुष्य आत्म-सिद्धि प्राप्त कर सके। शायद हमारे जीवन का ही लक्ष्य हो किन्तु यदि हमारे पास करने को कोई काम ही नहीं है यदि ऊपर वर्णित शक्तियों का प्रयोग करने के लिए हमारे पास अवसर ही नहीं है तो बहुत सी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।

प्रथम - हम अपनी शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकते।
द्वितीय - कार्य की अनुपस्थिति में हमें शरारत करना आएगा।
तृतीय - उपयुक्त रोजगार अवसरों के अभाव में हम अपना नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास भी करने में समर्थ नहीं होंगे।
इस प्रकार ऐसे समाज में जिसमें रोजगार की समस्या जटिल है उसमें निराशा अपराध और अविकसित व्यक्तित्व होंगे।

भारत लगभग इसी प्रकार की परिस्थिति से गुजर रहा है। यहां बेरोजगारी की समस्या बड़ी जटिल हो गई है। हमारे रोजगार कार्यालयों में करोड़ों लोग पंजीकृत हैं जिनको काम दिया जाना है। इनके अतिरिक्त ऐसे भी व्यक्ति हैं और उनकी संख्या भी लाखों में है जोकि अपने को रोजगार कार्यालय में पंजीकृत नहीं करा पाते।

भारत में बेरोजगारी की समस्या के कई कारण हैं। पहला कारण है तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या। सरकार¸ जिस अनुपात में जनसंख्या बढ़ती है उस अनुपात में नौकरियों का सृजन नहीं कर पाती। द्वितीय हमारी दूषित शिक्षा व्यवस्था ने समस्या को उलझा दिया है जबकि लाखों की तादाद में लोग रोजगार की तलाश कर रहे हैं वही बहुत से उद्योग प्रतिष्ठान और संस्थाएं ऐसी हैं जहां पर उपयुक्त कार्य करने वालों की बहुत कमी है। हम रोजगार परक शिक्षा को प्रारंभ नहीं कर पाए हैं और ना उद्योग के साथ शिक्षा का तालमेल ही बैठा पाए हैं। बेरोजगारी का एक अन्य कारण अपर्याप्त औद्योगीकरण और कुटीर उद्योग धंधों की प्रगति है। बड़े-बड़े उद्योगपतियों के निहित स्वार्थों के कारण कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन नहीं मिल पाता। हमारे बेरोजगार युवकों का सफेदपोश नौकरी के लिए प्रेम भी बेरोजगारी का एक अन्य कारण है। हमारे नौजवान नियमित्त नौकरी की तलाश में अपनी शक्ति एवं संसाधन खर्च कर देंगे किंतु अपना कारोबार प्रारंभ नहीं करेंगे। यहां तक एक कृषि स्नातक भी खेतों में कार्य नहीं करेगा बल्कि कृषि संस्थानों या सरकारी नौकरी में उपयुक्त पद के लिए प्रतीक्षा करेगा। वास्तव में हमारे नवयुवकों का भी दोष नहीं। अपने कारोबार में विनियोग करने के लिए उनके पास पर्याप्त साधन एवं पूंजी नहीं है। वे अप्रशिक्षित भी होते हैं और उनकी प्रशिक्षण और परामर्श सुविधाओं तक पहुंच नहीं है। इन कठिनाइयों के कारण उनकी जोखिम उठाने की क्षमता कमजोर पड़ती है और स्वतंत्र कारोबार प्रारंभ करने की इच्छा कुंठित हो जाती है। हमारे देश में बेरोजगारी का एक अन्य कारण है दूषित नियोजन। हमारे नियोजक मानव शक्ति के नियोजन की ओर उचित ध्यान देने में असफल रहे हैं। वे अपना सारा ध्यान संसाधनों के नियोजन की ओर लगाते रहे हैं यही कारण है कि नियोजन के फलस्वरुप काफी मात्रा में सृजित पूंजियों और उससे उत्पन्न हुए कुल सुख में भारी अंतर है। कुल राष्ट्रीय उत्पादन के संदर्भ में देश कितना ही संपन्न क्यों ना हो जाए नागरिकों का सुख सुनिश्चित नहीं किया जा सकता यदि उपयुक्त और सही रोजगार के अवसर प्रदान नहीं किया जाते किंतु बेरोजगारी की समस्या के लिए केवल सरकार को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं जो कार्य की प्रतिष्ठा को नहीं समझते हैं और ऐसी नौकरियों की प्रतीक्षा करते रहते हैं जिनमें काम तो कम करना पड़े और प्राप्ति अधिक हो। उनकी सुस्ती और कठिन कार्य में लगन की अनिच्छा उनको बेरोजगार रखती है।

बेरोजगारी की समस्या का शीघ्र से शीघ्र हल निकालना होगा। सबसे बड़ी आवश्यकता मानव शक्ति का नियोजन है। हमें अपने नवयुवक और नवयुवतियों को रोजगारपरक और व्यवसायिक शिक्षा प्रदान करनी होगी। त्वरित औद्योगीकरण और कुटीर उद्योगों के लिए उचित प्रोत्साहन की आवश्यकता है। काफी संख्या में प्रत्येक गांव कस्बा और शहर में लघु स्तर के एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना से रोजगार के असंख्य अवसर खिलेंगे। हमारे नवयुवकों में जोखिम उठाने की भावना का संचार करना पड़ेगा और धंधा प्रारंभ करने के लिए उन्हें पथ-प्रदर्शन देना पड़ेगा। आसान शर्तों पर विनियोग हेतु उनको पूंजी उपलब्ध करानी होगी। अंत में हमें जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगानी होगी। संतोष का विषय है कि हमारे नियोजक इसी दिशा में कार्य कर रहे हैं। रोजगार की कई योजनाएं चलाई गई हैं जिनमें से मुख्य हैं- स्किल इंडिया¸ मेक इन इंडिया¸ जवाहर रोजगार योजना¸ ट्राईसेम (ट्रेनिंग ऑफ रूरल युद्ध सेल्फ एंप्लॉयमेंट) देश का औद्योगीकरण तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। सरकार ने कुछ संस्थानों में स्वयं उद्यम चलाने से संबंधित पाठ्यक्रम का प्रचलन किया है जिससे कि गतिशील नवयुवकों को अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया जा सके। कुछ राज्य सरकारों ने हाईस्कूल और माध्यमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा के पोस्ट का प्रचलन किया है और चुनी हुई संस्थाओं में विभिन्न ट्रेडों की स्थापना के लिए धन जुटाया है। योजना कार्यक्रम का विस्तार करके सभी संस्थाओं में व्यावसायिक शिक्षा के कोर्स प्रारंभ करने की है। इस व्यवस्था से पिछले समय में बहुत अच्छे नतीजे निकले हैं। आर्थिक उदारीकरण कार्यक्रम से रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। परिश्रमी और उत्साही नवयुवक स्वयं के उद्यम स्थापित करने हेतु आकर्षित हो रहे हैं। इस प्रकार व्यक्तिगत क्षेत्र में रोजगार की क्षमता बढ़ी है। आगे और भी अधिक उदारीकरण से हमारी साहसी और प्रतिभाशाली युवकों के लिए रोजगार के आकर्षक अवसर खुलेंगे। ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जिनमें लोगों ने बिल्कुल शुरुआत से प्रारंभ किया और थोड़े से समय के कमरकस श्रम के बल पर लाखों रुपए कमाए और अपने को ही नहीं दूसरों को भी रोजगार प्रदान किया। भारत के पंजाब¸ हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे कुछ क्षेत्रों में आर्थिक क्रिया अपनी चरम सीमा पर है यहां बेरोजगारी अन्य दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले कम है। हमें अपने आलस्य को त्याग मैदान में कूदना है जिसको परिश्रमी और साहसी युवकों की प्रतीक्षा है।


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