Friday, 1 December 2017

कुतुबमीनार पर निबंध। Essay on Qutub Minar in hindi

कुतुबमीनार पर निबंध। Essay on Qutub Minar in hindi

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कुतुबमीनार दिल्ली में स्थित है। यह एक प्रसिद्ध पर्यटन-स्थल है। इसे देखने प्रतिदन हजारों पर्यटक आते हैं। से दिल्ली के प्रथम मुस्लिम सासक कुतुब-उद-दीं-ऐबक ने सन् 1200 ई0 में बनाना प्ररंभ किया था। लेकिन वह उसका आधार ही बना पाया था। उसकी ऊपर की तीन मंजिलें कुतुबुद्दीन ऐबक के उत्तराधिकारी उल्तुतमिश ने बनवायीं और कुतुबमीनार की आखिरी अथवा पाँचवी मंजिल 1368 ई0 में फिरोजसाह तुगलक ने बनवाई थी। सभी शासकों ने इसका निर्माण मीनार के रूप में ही करवाया था।

कुतुबमीनार एक पाँच मंजिला इमारत है। यह 72.5 मीटर (238 फीट) ऊँची है।  इसके नजदीक ही राजा चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य द्वारा निर्मित एक लौह स्तंभ है जिसे 1600 वर्षों से जंग नहीं लगा है और न ही यह सड़ा या गला है।

कुछ विद्वानों का मत है कि कुतुबमीनार भारत में मुसलमानों के शासन करने की शुरूआत और विजय का प्रतीक है। और कुछ विद्वानों के अनुसार कुतुबमीनार अजान देने के लिए बनवाई गई थी। नि-संदेह कुतबमीनार भारत की ही नहीं विश्व की सबसे उत्कृष्ट और ऊँची मीनार है। इसका आधार 47 फीट है और इसकी शुण्डाकार चोटी 9 फीट है। इसकी चार बालकनी हैं। अन्दर से यह मीनार शिलालेखों से अलंकृत है।

कुतुबमीनार के नजदीक चौधी शताब्दी में निर्मित लौह स्तंभ को हिन्दुओं के देवता भगवान विष्णु के सम्मान में बनवाया गया था। कुछ विद्वानों के मतानुसार इसे गुप्त वंश के राजा चंद्रगुप्त की याद में बनवाया गया था जिसने सन् 375 ई0 से 413 ई0 तक शासन किया था।

दिल्ली के लालकिले की तरह कुतबमीनार को भी यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट में स्थान मिला है। इसलिए संपूर्ण संसार में यह सुविख्यात है। विश्व के कोने-कोने से इसे देखने पर्यटक आते हैं। विश्व की जनीमानी अद्भुत एवं अनुपम इमारतों तथा प्रचीन स्मारकों आदि को यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट में स्थान मिला है वे सभी दुनिया भर की आँखों का तारा बन गए है। प्रत्येक व्यक्ति उन्हें देखना चाहता है। क्योंकि यूनेस्को वर्ल् हैरिटेज साइट में अद्वितीय स्थानों¸स्मारकों  को ही स्थान दिया जाता है।

कुतुबमीनार उन्हीं अद्वितीय स्मारकों में से एक है। यह 800 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है परंतु आज भी यह अत्यंत आकर्षक एवं मनमोहक है। इसे हजारों पर्यटक प्रतिदिन देखने आते हैं। 

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