Sunday, 18 June 2017

पत्र लेखन उदाहरण सहित patra lekhan in hindi

पत्र लेखन उदाहरण सहित (patra lekhan in hindi)

पत्र अपनी बात दूसरों तक लिखकर पहुंचाने का एक बहुत अच्छा तरीका है। जैसे-जैसे भाषा का विकास हुआ, उसी के साथ पत्र लेखन का भी विकास होता गया। इस प्रकार यह ,माना जा सकता है की पत्र लेखन का इतिहास बहुत पुराना है। प्राचीन काल में मोबाइल, इंटरनेट जैसे संचार के साधन नहीं हुआ करते थे इसलिए पत्र के माध्यम से ही लोग अपनी बात दूसरों तक पहुंचाते थे।
      समय के साथ पत्र लेखन की इस कला में भी अनेक परिवर्तन आये। ई-मेल भी इन्ही परिवर्तनों में से एक है। आज हम टेक्नोलॉजी ( तकनीकी ) की मदद से कुछ ही सेकेंड्स में ई-मेल अर्थात इलेक्ट्रॉनिक पत्र दूर बैठे किसी व्यक्ति को भेज सकते हैं। पत्रों के कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे: सामाजिक ,व्यावसायिक ,शासकीय और प्रशासकीय आदि।  

पत्रों के भेद या प्रकार 
पत्र किस विषय पर और किसको लिखा जा रहा है इस आधार पर पत्र 2 प्रकार के होते हैं
औपचारिक पत्र : औपचारिक पत्र का प्रयोग प्रायः दफ्तर ,कार्यालय ,संस्थानों आदि द्वारा एक दूसरे को सूचनाओं ,जानकारियों तथा तथ्यों आदि के आदान प्रदान में किया जाता है। इन पत्रों को लिखते समय औपचारिकताओं का ध्यान रखा जाता है 
सामाजिक पत्र ,शिकायती पत्र तथा आवेदन पत्र इनके उदहारण है। 

1-आवेदन पत्र : किसी विशेष उद्देश्य से लिखे प्रार्थना पत्र "आवेदन पत्र" कहलाते हैं। जैसे :अवकाश के लिए पत्र, शुल्क मुक्ति के लिए पत्र ,चरित्र प्रमाण पत्र या फिर बैंक से लोन लेने के लिए पत्र आदि। 

शिकायती पत्र : किसी व्यक्तिगत या सामाजिक समस्या के निवारण के लिए हमें अनेक बार सम्बंधित अधिकारियों को पत्र लिखने पड़ते हैं। इन्ही पत्रों को शिकायती पत्र कहते हैं। 

1-सरकारी /शासकीय /प्रशासकीय पत्र : इस वर्ग में सरकारी कार्यालयों के पत्र आते हैं। 

2-व्यापारिक या व्यावसायिक पत्र : किसी व्यापारिक या औद्योगिक संस्थानों के आपस में पत्र या किसी संस्था की ओर से किसी व्यक्ति को या फिर किसी किसी व्यक्ति की ओर  से किसी संस्था को लिखे गए पत्र इस श्रेणी में आते हैं। 


3-सम्पादक के नाम पत्र : वर्तमान युग में समाचार पत्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। समस्याओ के समाधान के लिए समाचार पत्रो के माध्यम से आवाज उठाई जाती है। इसलिए समाज की विभिन्न समस्याओं  के लिए संपादक के नाम पत्र लिखा जाता है। समाचार पत्रों में विभिन्न शीर्षकों से संपादक के नाम पत्र छापे जाते है , जिसे उच्चधिकारिओ तक पहुंचाया जाता है और समाधान शीघ्र हो जाता है। 


अनौपचारिक पत्र : अनौपचारिक पत्र निजी सम्बंधिओ ,रिश्तेदारो तथा मित्रो आदि को लिखे जाते है। यह पत्र प्रायः व्यक्तिगत विषयो तथा निमंत्रण के लिए लिखे जाते है। अनौपचारिक पत्र लिखने में औपचारिक भाषा के प्रयोग की आवश्यकता नहीं होती है।
निमंत्रण पत्र , माता को पत्र , पिता को पत्र आदि इनके उदाहरण है।  

1-निजी / व्यक्तिगत या पारिवारिक पत्र : परिवार के निकट सदस्यों, निकट सम्बन्धियों, मित्रों आदि को लिखे गए पत्र निजी या पारिवारिक पत्र होते हैं। 

2-सामाजिक पत्र : निमंत्रण पत्र ,बधाई पत्र ,परिचय पत्र ,आभार पत्र एवं सांत्वना पत्र आदि सामाजिक पत्र की श्रेणी में आते हैं। 


पत्र लेखन से सम्बंधित अभिवादन व सम्बोधनों की सूची 
सम्बन्ध
सम्बोधन
अभिवादन
अभिनिवेदन
पिता-पुत्र
प्रिय महेश 
शुभाशीर्वाद
तुम्हारा शुभाकांक्षी
पुत्र-पिता
पूज्य पिताजी
सादर प्रणाम
आपका स्त्रेहाकांक्षी
माता-पुत्र
प्रिय पुत्र
शुभाशीष
तुम्हारी शुभाकांक्षिणी
पुत्र-माता
पूजनीया माताजी
सादर प्रणाम
आपका स्त्रेहाकांक्षी
मित्र-मित्र
प्रिय भाई या मित्र या प्रिय रमेश आदि
नमस्कार 
आपका स्त्रेहाकांक्षी
गुरु-शिष्य
प्रिय कुमार या चिo कुमार
शुभाशीर्वाद
तुम्हारा सत्यैषी या शुभचिन्तक
शिष्य-गुरु
पूजनीय या आदरणीय गुरुदेव
सादर प्रणाम
आपका शिष्य
दो अपरिचित व्यक्ति
प्रिय महोदय
सप्रेम नमस्कार
भवदीय
अग्रज-अनुज
प्रिय राहुल
शुभाशीर्वाद
तुम्हारा शुभाकांक्षी
अनुज-अग्रज
पूज्य भैया या भ्राता जी
प्रणाम
आपका स्त्रेहाकांक्षी
स्त्री-पुरुष (अनजान)
प्रिय महाशय
.......
भवदीया
पुरुष-स्त्री (अनजान)
प्रिय महाशया
.......
भवदीय
पुरुष-स्त्री (परिचित)
कुमारी कमलाजी
.......
भवदीय
स्त्री-पुरुष (परिचित)
भाई कमलजी
.......
भवदीया





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