Thursday, 1 June 2017

मजेदार कहानी अक्ल बहादुर

मजेदार कहानी अक्ल बहादुर ( राजस्थानी लोक कथा )
किसी नगर में चार भाई रहते थेचारों भाई एक से बढ़कर एक बुद्धिमान थे उनकी अक्ल के चर्चे आस-पासके गांवों व नगरों में फैले थे लोग उनकी अक्ल की तारीफ़ करते थे और प्यार से उन्हें अक्ल बहादुर कहने लगे| पहले भाई का नाम सौ बुद्धि, दुसरे का नाम हजार बुद्धितीसरे का नाम लाख बुद्धितो चौथे भाई का नाम करोड़ बुद्धि था|एक दिन चारों ने आपस में सलाह-मशविरा किया की कि -किसी बड़े नगर की राजधानी में कमाने चलते हैदूसरे बड़े नगर में जाकर अपनी बुद्धि से कमायेंगे तो अपनी बुद्धि की भी असली परीक्षा होगी और हमें भी पता चलेगा कि हम कितने अक्लमंद है ? फिर वैसे भी घर बैठना तो निठल्लों का काम है चतुर व्यक्ति तो अपनी चतुराई व अक्ल से ही बड़े बड़े शहरों में जाकर धन कमाते हैऔर इस तरह चारों ने आपस में विचार विमर्श कर किसी बड़े शहर को जाने के लिए घोड़े तैयार कर चल पड़ेकाफी रास्ता तय करने के बाद वे चले जा रहे थे कि अचानक उनकी नजर रास्ते में उनसे पहले गए किसी ऊंट के पैरों के निशानों पर पड़ी|

"
ये जो पैरों के निशान दिख रहे है वे ऊंट के नहीं ऊँटनी के है |" सौ बुद्धि निशान देख अपने भाइयों से बोला|

"ये जो पैरों के निशान दिख रहे है वे ऊंट के नहीं ऊँटनी के है |" सौ बुद्धि निशान देख अपने भाइयों से बोला|"ये जो पैरों के निशान दिख रहे है वे ऊंट के नहीं ऊँटनी के है |" सौ बुद्धि निशान देख अपने भाइयों से बोला|"तुमने बिल्कुल सही कहाये ऊँटनी के ही पैरों के निशान है और ये ऊँटनी बायीं आँख से कानी भी है |" हजार बुद्धि ने आगे कहा|लाख बुद्धि बोला- "तुम दोनों सही होपर एक बात मैं बताऊँ?  इस ऊँटनी पर जो दो लोग सवार है उनमे एक मर्द व दूसरी औरत है|करोड़ बुद्धि कहने लगा- "तुम तीनों का अंदाजा सही हैऔर ऊँटनी पर जो औरत सवार है वह गर्भवती है|"अब चारों भाइयों ने ऊंट के उन पैरों के निशानों व आस-पास की जगह का निरीक्षण करने के बाद अपनी बुद्धि के आधार पर अंदाजा तो लगा लिया पर यह अंदाजा सही लगा या नहीं इसे जांचने के लिए आपस में चर्चा कर ऊंट के पैरों के पीछे-पीछे अपने घोड़ों को ऐड लगा दौड़ा दिए| जिससे ऊंट सवार का पीछा कर उस तक पहुँच अपनी बुद्धि से लगाये अंदाजे की जाँच की जा सके|

थोड़ी ही देर में वे ऊंट सवार के आस-पास पहुँच गएऊंट सवार अपना पीछा करते चार घुड़सवार देख घबरा गया कहीं डाकू या बदमाश नहीं होसो उसने भी अपने ऊंट को दौड़ा दियाऔर ऊंट को दौड़ाता हुआ आगे एक नगर में प्रवेश कर गयाचारों भाई भी उसके पीछे पीछे ही थेनगर में जाते ही ऊंट सवार ने नगर कोतवाल से शिकायत की - " मेरे पीछे चार घुड़सवार पड़े है कृपया मेरी व मेरी पत्नी की उनसे रक्षा करें|"

पीछे आते चारों भाइयों को नगर कोतवाल ने रोक पूछताछ शुरू कर दी कि कही कोई दस्यु तो नहींपूछताछ में चारों भाइयों ने बताया कि वे तो नौकरी की तलाश में घर से निकले है यदि इस नगर में कही कोई रोजगार मिल जाए तो यही कर लेंगेकोतवाल ने चारों के हावभाव व उनका व्यक्तित्व देख कर सोचा कि ऐसे व्यक्ति तो अपने राज्य के राजा के काम के हो सकते है इस प्रकार वह उन चारों भाइयों को राजा के पास ले आयासाथ उनके बारे मे जानकारी देते हुए कोतवाल ने उनके द्वारा ऊंट सवार का पीछा करने वाली बात बताई|

राजा ने अपने राज्य में कर्मचारियों की कमी के चलते अच्छे लोगों की भर्ती की जरुरत भी बताई पर साथ ही उनसे उस ऊंट सवार का पीछा करने का कारण भी पूछा|

सबसे पहले सौ बुद्ध बोला-"महाराज ! जैसे ही हम चारों भाइयों ने उस ऊंट के पैरों के निशान देखे अपनी अपनी अक्ल लगाकर अंदाजा लगाया कि- ये पैर के निशान ऊँटनी के होने चाहिएऊँटनी बायीं आँख से कानी होनी चाहिएऊँटनी पर दो व्यक्ति सवार जिनमे एक मर्द दूसरी औरत होनी चाहिए और वो सवार स्त्री गर्भवती होनी चाहिए|"

इतना सुनने के बाद तो राजा भी आगे की बात सुनने को बड़ा उत्सुक हुआऔर उसने तुरंत ऊंट सवार को बुलाकर पुछा- "तूं कहाँ से आ रहा था और किसके साथ ?"ऊंट सवार कहने लगा-" हे अन्नदाता ! मैं तो अपनी गर्भवती घरवाली को लेने अपनी ससुराल गया था वही से उसे लेकर आ रहा था|"

राजा- " अच्छा बता क्या तेरी ऊँटनी बायीं आँख से कानी है?"ऊंट सवार- "हां ! अन्नदातामेरी ऊँटनी बायीं आँख से कानी है|राजा ने अचंभित होते हुए चारों भाइयों से पुछा- "आपने कैसे अंदाजा लगाया विस्तार से सही सही बताएं|" 

सौ बोद्धि बोला-"उस पैरों के निशान के साथ मूत्र देख उसे व उसकी गंध पहचान मैंने अंदाजा लगाया कि ये ऊंट मादा है|"

हजार बुद्धि बोला-" रास्ते में दाहिनी और जो पेड़ पौधे थे ये ऊँटनी उन्हें खाते हुई चली थी पर बायीं और उसने किसी भी पेड़-पौधे की पत्तियों पर मुंह तक नहीं माराइसलिए मैंने अंदाजा लगाया कि जरुर यह बायीं आँख से कानि है इसलिए उसने बायीं और के पेड़-पौधे देखे ही नहीं तो खाती कैसे ?"

लाख बुद्धि बोला- " ये ऊँटनी सवार एक जगह उतरे थे अत: इनके पैरों के निशानों से पता चला कि ये दो जने है और पैरों के निशान भी बता रहे थे कि एक मर्द के है व दूसरे स्त्री के |"

आखिर में करोड़ बुद्धि बोला-" औरत के जो पैरों के निशान थे उनमे एक भारी पड़ा दिखाई दिया तो मैंने सहज ही अनुमान लगा लिया कि हो न हो ये औरत गर्भवती है|"राजा ने उनकी अक्ल पहचान उन्हें अच्छे वेतन पर अपने दरबार में नौकरी देते हुए फिर पुछा –"आप लोगों में और क्या क्या गुण व प्रतिभा है?"

सौ बुद्धि बोला-"मैं जिस जगह को चुनकर तय कर बैठ जाऊं तो किसी द्वारा कैसे भी उठाने की कोशिश करने पर नहीं उठूँ|"

हजार बुद्धि- "मुझमे भोज्य सामग्री को पहचानने की बहुत बढ़िया प्रतिभा है|"

लाख बुद्धि- "मुझे बिस्तरों की बहुत बढ़िया पहचान है|"

करोड़ बुद्धि -"मैं किसी भी रूठे व्यक्ति को चुटकियों में मनाकर ला सकता हूँ|"

राजा ने मन ही मन एक दिन उनकी परीक्षा लेने की सोची|एक दिन सभी लोग महल में एक जगह एक बहुत बड़ी दरी पर बैठे थेसाथ में चारों अक्ल बहादुर भाई भीराजा ने हुक्म दिया कि -इस दरी को एक बार उठाकर झाड़ा जायदरी उठने लगी तो सभी लोग उठकर दरी से दूर हो गए पर सौ बुद्धि दरी पर ऐसी जगह बैठा था कि वह अपने नीचे से दरी खिसकाकर बिना उठे ही दरी को अलग कर सकता था सो उसने दरी का पल्ला अपने नीचे से खिसकाया और बैठा रहा|
राजा समझ गया कि ये उठने वाला नहीं|शाम को राजा ने भोजन पर चारों भाइयों को आमंत्रित कियाऔर भोजन करने के बाद चारों भाइयों से भोजन की गुणवत्ता के बारे में पूछा
तीन भाइयों ने भोजन के स्वाद, उसकी गुणवत्ता की बहुत सराहना की पर हजार बुद्धि बोला- "माफ़ करें हुजूर ! खाने में चावल में गाय के मूत्र की बदबू थी|"

राजा ने रसोईघर के मुखिया से पुछा -"सच सच बता कि चावल में गौमूत्र की बदबू कैसे ?रसोई घर का मुखिया कहने लगा-"गांवों से चावल लाते समय रास्ते में वर्षा आ गयी थी सो भीगने से बचाने को एक पशुपालक के बाड़े में गाडियां खड़ी करवाई थीवहीँ चावल पर एक गाय ने मूत्र कर दिया थाहुजूर मैंने चावल को बहुत धुलवाया भी पर कहीं से थोड़ी बदबू रह ही गयी |"हजार बुद्धि की भोजन पारखी प्रतिभा से राजा बहुत खुश हुआ और रात्री को सोते समय चारों भाइयों के लिए गद्दे राजमहल से भिजवा दिएजिन पर चारों भाइयों ने रात्री विश्राम किया|

सुबह राजा के आते ही लाख बुद्धि ने कहा - "बिस्तर में खरगोस की पुंछ है जो रातभर मेरे शरीर में चुभती रही|"राजा ने बिस्तर फड़वाकर जांच करवाई तो उसने वाकई खरगोश की पुंछ निकली|राजा लाख बुद्धि के कौशल से भी बड़ा प्रभावित हुआ|पर अभी करोड़ बुद्धि की परीक्षा बाक़ी थीसो राजा ने रानी को बुलाकर कहा- "करोड़ बुद्धि की परीक्षा लेनी है आप रूठकर शहर से बाहर बगीचे में जाकर बैठ जाएं करोड़ बुद्धि आपको मनाने आयेगा पर किसी भी सूरत में मानियेगा मत|"और रानी रूठकर बाग में जा बैठीराजा ने करोड़ बुद्धि को बुला रानी को मनाने के लिए कहा|

करोड़ बुद्धि बाजार गया वहां से शादी का सामान व दुल्हे के लिए लगायी जाने वाली हल्दी व अन्य शादी का सामान ख़रीदा और बाग के पास से गुजरा वहां रानी को देखकर उससे मिलने गया|रानी ने पुछा-"ये शादी का सामान कहाँ ले जा रहे है|"करोड़ बुद्धि बोला-" आज राजा जी दूसरा ब्याह रचा रहे है यह सामान उसी के लिए हैराजमहल ले कर जा रहा हूँ|

रानी ने पुछा-" क्या सच में राजा दूसरी शादी कर रहे है ?"करोड़ बुद्धि- " सही में ऐसा ही हो रहा है तभी तो आपको राजमहल से दूर बाग में भेज दिया गया है|"इतना सुन रानी घबरा गयी कि कहीं वास्तव में ऐसा ही ना हो रहा होऔर वह तुरंत अपना रथ तैयार करवा करोड़ बुद्धि के आगे आगे महल की ओर चल दी|महल में पहुँच करोड़ बुद्धि ने राजा कोप अभिवादन कर कहा-" महाराज ! रानी को मना लाया हूँ|"
राजा ने देखा रानी सीधे रथ से उतर गुस्से में भरी उसकी और ही आ रही थीऔर आते ही राजा से लड़ने लगी कि- "आप तो मुझे धोखा दे रहे थेपर मेरे जीते जी आप दूसरा ब्याह नहीं कर सकते|"राजा भी रानी को अपनी सफाई देने में लग गया|और इस तरह चारों अक्ल बहादुर भाई राजा की परीक्षा में सफल रहे |

अक्ल बहादुर (कथा श्रेय लक्ष्मी कुमारी चूंडावत)
x


SHARE THIS

Author:

Etiam at libero iaculis, mollis justo non, blandit augue. Vestibulum sit amet sodales est, a lacinia ex. Suspendisse vel enim sagittis, volutpat sem eget, condimentum sem.

0 comments: