Friday, 10 February 2017

संधि और उसके भेद

संधि और  उसके  भेद 

संधि (सम् + धि) शब्द का अर्थ है 'मेल'। दो निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है वह संधि कहलाता है। 


जैसे - सम् + तोष         = संतोष 
         राम  +अवतार   = रामवतार 
         देव + इंद्र         = देवेंद्र 
         भानु + उदय     = भानूदय।

सन्धि  के तीन  भेद होते है। 

  1. स्वर संधि
  1. व्यंजन संधि
  1. विसर्ग संधि

स्वर  संधि :  दो स्वरों के मेल  को स्वर-संधि कहते हैं। जैसे - विद्या + आलय = विद्यालय।

व्यंजन संधि :  व्यंजन का व्यंजन से अथवा किसी स्वर से मेल होने पर व्यंजन  संधि कहलाती हैं। जैसे-शरत् + चंद्र = शरच्चंद्र। 

 विसर्ग  संधि (:) : विसर्ग (:) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर विसर्ग में जो परिवर्तन  होता है उसे विसर्ग-संधि कहते हैं। जैसे- मनः + अनुकूल = मनोनुकूल








SHARE THIS

Author:

Etiam at libero iaculis, mollis justo non, blandit augue. Vestibulum sit amet sodales est, a lacinia ex. Suspendisse vel enim sagittis, volutpat sem eget, condimentum sem.

0 comments: