Thursday, 2 February 2017

क्रिया और उसके भेद


क्रिया और उसके  भेद :


क्रिया की परिभाषा---जिस शब्द से किसी कार्य का होना या करना समझा जाय, उसे क्रिया कहते हैं । जैसे - खाना, पीना, गाना , रहना, जाना आदि ।

उदाहरण- 1 राम खाना खाता है।
             2 घोड़ा दौड़ता है।
             3 तुम स्कूल जाते हो

क्रिया के दो भेद हैं :-


1- सकर्मक क्रिया :-  जो क्रिया कर्म के साथ आती है अर्थात जब क्रिया को कर्म की आवश्यकता होती है तो उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं !

जैसे -- राकेश क्रिकेट खेलता है !
          सीता खाना पकाती है!



2 -अकर्मक क्रिया (Akarmak Kriya)--जिस क्रिया को कर्म की आवश्यकता नहीं होती है अर्थात जहाँ कर्म का आभाव होता है उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं ।


जैसे -- राधा नाचती है।
          बच्चे खेलते हैं।

रचना के आधार पर क्रिया के पाँच भेद है :-


1- सामान्य क्रिया :-जब वाक्य में केवल एक क्रिया का प्रयोग होता है ! 


जैसे - तुम चलो , मोहन पढ़ा आदि !


2- संयुक्त क्रिया :- दो या दो से अधिक क्रियाओं के मेल से बनी क्रियाएँ संयुक्त क्रियाएँ होती है !

 जैसे - मैंने खाना खा लिया
          तुम घर चले जाओ



3- नामधातु क्रियाएँ :-  क्रिया को छोड़कर दुसरे शब्दों  ( संज्ञा , सर्वनाम , एवं  विशेषण  ) से जो धातु बनते है , उन्हें नामधातु क्रिया कहते है।  

      
जैसे - अपना - अपनाना , गरम - गरमाना आदि


4- प्रेरणार्थक क्रिया :- जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य से करवाता है , उसे  प्रेरणार्थक क्रिया कहते है।

जैसे-- मैंने पत्र लिखवाया ।
         उसने खाना खिलवाया ।
         सफने उसे हंसाया ।



5- पूर्वकालिक क्रिया :- जब कोई कर्ता एक क्रिया समाप्त करके दूसरी क्रिया करता है तब पहली क्रिया ' पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है।


 जैसे - वे पढ़कर चले गये ।

          मैं दौड़कर जाउँगा ।

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