Tuesday, 7 February 2017

अव्यय और उसके भेद

 अव्यय और  उसके भेद :

अव्यय----ऐसे शब्द जिनमें लिंग, वचन, पुरुष और कारक आदि के कारण कोई विकार नहीं आता है दूसरे शब्दों में इन शब्दों का अर्थ कभी भी बदलता नहीं है। ऐसे शब्दों को अव्यय कहते हैं ।


अव्यय के भेद:    इसके 4 भेद होते हैं ।

क्रिया विशेषण -- जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं। ये चार प्रकार के होते हैं।


१)स्थानवाचक--जैसे यहां, वहाँ, भीतर, बाहर, इधर, उधर, दाएं बाएँ  आदि।

२)कालवाचक--जैसे आजकल, अभी, तुरंत, रातभर, दिन भर, हर बार, कई बार आदि।

३)परिमाण वाचक--थोड़ा,काफी, ठीक ठाक, बहुत, कम, अत्यंत आदि।

४)रीतिवाचक-- उदाहरण ऐसे, वैसे, अचानक, इसलिए, कदाचित, यथासंभव आदि।


सम्बन्ध बोधक--जो। अव्यय किसी संज्ञा के बाद आकर उस संज्ञा का संबंध  वाक्य के किसी दूसरे शब्द से दिखाते हैं  उन्हें संबंध बोधक अव्यय कहते हैं।

जैसे--) मैं  विद्यालय तक गया।
          स्कूल के समीप मैदान है।

समुच्चय बोधक अव्यय-)जो शब्द दो वाक्यों को जोड़ने कार्य करते हैं उन्हें समुच्चय बोधक अव्यय कहते हैं।

जैसे--) सूरज निकला और पक्षी बोलने लगे।
          छुट्टी हुई और बच्चे भागने लगे।
उपर्युक्त वाक्यों में और समुच्चय बोधक अव्यय है।

विस्मयादिबोधक--जिन अव्ययों  से हर्ष, शोक, घृणा, आदि भाव पाये जाते हैं तथा जिनका संबंध वाक्य के किसी पद से नहीं होता है उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं।

जैसे-- वाह! क्या बात है।
         हाय! वह चल बसा।

         आह! क्या स्वाद है।

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